सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने आरोप लगाया कि उन्होंने पीएम मोदी को नेताजी की जो टोपी सौंपी थी वो गायब है। विवाद बढ़ा तो अब 'असली नकली' का विवाद खड़ा हो गया है। आख़िर ये हो क्या रहा है?
क्या पीएम मोदी को सौंपी गई टोपी गायब?
क्या सुभाषचंद्र बोस यानी नेताजी की वो टोपी गायब हो गई जिसे नेताजी के परिवार ने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपी थी? नेताजी के परपोते चंद्र कुमार बोस ने जब इसकी शिकायत की तो क्या एक 'नकली टोपी' रख दी गई? जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई ने शुक्रवार को कहा कि हाल ही में पोर्ट ब्लेयर में एक प्रदर्शनी के लिए ले जाए जाने के बाद वह अब सुरक्षित कस्टडी में है तो चंद्र कुमार बोस ने इस पर भी सवाल उठा दिए कि टोपी को जगह-जगह प्रदर्शनी के लिए कैसे ले जाया जा रहा है?
नेताजी के परपोते और बीजेपी के पूर्व नेता चंद्र कुमार बोस इन घटनाक्रमों से बेहद नाराज़ हैं। उन्होंने कहा कि रेड फोर्ट के नेताजी संग्रहालय में टोपी नहीं मिल रही, और अब जो टोपी दिखाई जा रही है, वह असली नहीं लगती। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई ने कहा कि टोपी सुरक्षित है, लेकिन चंद्र कुमार बोस ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
'टोपी गायब' मामला कैसे सामने आया?
ओपन प्लेटफॉर्म फॉर नेताजी यानी ओपीएन से जुड़े चंद्र कुमार बोस ने एक दिन पहले यानी 12 मार्च को एक्स पर लिखा, 'जनवरी 2019 में नेताजी जयंती (23 जनवरी) पर मैंने, मेरे परिवार और दोस्त सुपर्णो सत्पथी समेत कई लोगों ने मिलकर नेताजी की यह टोपी प्रधानमंत्री मोदी को सौंपी थी। पीएम मोदी ने खुद इसे रेड फोर्ट के नेताजी संग्रहालय में रखवाया था।'
चंद्र कुमार बोस ने आगे कहा है कि हाल ही में ओपीएन के सदस्य और सुप्रीम कोर्ट के वकील नवीन बामेल 10 मार्च 2026 को संग्रहालय गए। उन्होंने देखा कि नेताजी की टोपी वाली डिस्प्ले बॉक्स खाली है। एएसआई के कर्मचारियों से पूछा तो किसी को पता नहीं चला कि टोपी कहाँ गई। चंद्र कुमार बोस ने इसे बहुत शर्मनाक बताया और कहा कि नेताजी हमारे सबसे बड़े नेता हैं, उनकी ऐसी चीज गायब होना अपमान जैसा है। उन्होंने पीएम मोदी से इसकी जांच कराने की अपील की।'
एएसआई का जवाब है?
एएसआई ने शुक्रवार को सफ़ाई दी कि टोपी गायब नहीं है, बल्कि सुरक्षित कस्टडी में है। एएसआई के एक अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस से बताया, 'जनवरी 2026 में पराक्रम दिवस के दौरान टोपी को पोर्ट ब्लेयर ले जाया गया था, जहां अस्थायी प्रदर्शनी लगी थी। इसलिए 19 से 25 जनवरी तक बॉक्स खाली था। प्रदर्शनी के बाद टोपी वापस लाई गई और डिस्प्ले पर रखी गई। लेकिन डिस्प्ले बॉक्स के ताले में खराबी आ गई, इसलिए फिर से सुरक्षित रख दी गई थी। अब ताला ठीक हो गया है और 13 मार्च से टोपी फिर से प्रदर्शनी में लगा दी जाएगी।' नेताजी की टोपी गायब होने की शिकायत के बाद ख़बर आई कि शुक्रवार को दिन में ही टोपी को प्रदर्शनी में लगा दी गई। लेकिन इसके बाद भी विवाद थमा नहीं। चंद्र कुमार बोस ने नये सिरे से आरोप लगा दिये।
चंद्र कुमार बोस के नए आरोप
एएसआई की सफाई के बाद भी चंद्र कुमार बोस संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने दो पोस्ट किए। पीएम मोदी को धन्यवाद दिया कि उनकी त्वरित कार्रवाई से टोपी वापस लगाई गई। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 'जिन लोगों ने पहले असली टोपी देखी है, वे कह रहे हैं कि अब जो रखी गई है, वह मूल नहीं लगती'। बोस ने अब जांच और सही प्रमाणिकता की मांग कर दी है।इसके साथ ही उन्होंने एएसआई की सफाई पर धन्यवाद देते हुए सवाल उठाया कि जो टोपी परिवार ने पीएम को सौंपी और रेड फोर्ट में रखवाई गई, उसे जगह-जगह प्रदर्शनी के लिए कैसे ले जाया जा रहा है? उन्होंने कहा कि इतनी छोटी चीज आसानी से गुम हो सकती है। संग्रहालय में कोई जानकारी क्यों नहीं दी जाती कि टोपी कहां है? 2021 से यह भ्रम चल रहा है, इसलिए स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाना चाहिए।
2021 में भी ऐसा हुआ था
यह पहली बार नहीं है जब टोपी के 'गायब' होने की ख़बर आई है। 2021 में भी टोपी के ग़ायब होने की खबर आई थी। तब संस्कृति मंत्रालय ने कहा था कि टोपी को कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में उधार के रूप में दिया गया था, जहां नेताजी की 125वीं जयंती पर प्रदर्शनी थी। तब भी चंद्र कुमार बोस ने नाराजगी जताई थी।
क्यों है यह टोपी इतनी खास?
यह टोपी नेताजी की पर्सनल कैप है, जो उनके बेटे अमिया नाथ बोस के पास फैमिली हीरलूम यानी पारिवारिक विरासत के रूप में थी। इसे परिवार ने 2019 में पीएम मोदी को सौंपा था ताकि रेड फोर्ट के संग्रहालय में रखकर सब देख सकें। नेताजी की ये यादें आजादी की लड़ाई की प्रेरणा हैं, इसलिए इसकी सुरक्षा बेहद ज़रूरी है।यह मामला अब सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। कई लोग कह रहे हैं कि नेताजी की चीजों की सुरक्षा पर सरकार को और ध्यान देना चाहिए। चंद्र कुमार बोस की मांग है कि टोपी की जांच हो और साफ-साफ पता चले कि असली है या नहीं।