सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे बागी TMC विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही पर फैसला लें। उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट जाने को कहा।
ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से जल्द फ़ैसला लेने को कहा है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को सीधे समयसीमा के भीतर फैसला लेने का निर्देश देने की मांग वाली TMC नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय की याचिका खारिज कर दी और उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट जाने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि वे इस मामले को जल्द सुनवाई के लिए दो जजों की पीठ के सामने सूचीबद्ध करें और शीघ्र निपटारा करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए। अदालत ने कहा कि वह हाईकोर्ट से इस मामले पर तत्काल विचार करने और जल्द फैसला लेने का अनुरोध करती है। यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष द्वारा TMC के 10 बागी विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी से जुड़ा है।
पांच महीने से लंबित है अयोग्यता केस
टीएमसी विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने 8 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष के सामने 10 बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिका दायर की थी। इन विधायकों पर टीएमसी के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतने के बाद पार्टी छोड़कर दूसरी राजनीतिक धारा में जाने का आरोप है। अयोग्यता याचिका में जिन विधायकों के नाम शामिल हैं, उनमें ऋतब्रत बनर्जी, फिरहाद हकीम, अरूप रॉय, संदीपन साहा, अखरुज्जमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष शामिल हैं।
शोभनदेव चट्टोपाध्याय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि इन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की याचिका दायर किए हुए पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों के तहत निर्धारित समयसीमा के दायरे में आता है। इसलिए विधानसभा अध्यक्ष को जल्द निर्णय लेना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान शोभनदेव चट्टोपाध्याय के वकील ने कहा, 'अयोग्यता की याचिका जुलाई की है। यह पूरी तरह से इस अदालत के आदेशों के दायरे में आती है। पांच महीने बीत चुके हैं।' इस पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा, 'हम आपकी बात समझते हैं। आप कतार से आगे निकलने के लिए मुकदमा नहीं कर सकते।' वकील ने इसके बाद अनुरोध किया कि इस मामले को कलकत्ता हाईकोर्ट की दो जजों की पीठ के सामने रखा जाए, ताकि सुनवाई के बाद फिर से हाईकोर्ट के भीतर अपील की प्रक्रिया में मामला न उलझे।शोभनदेव चट्टोपाध्याय के वकील ने कहा कि पश्चिम बंगाल से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी आदेश दे चुका है और अब जल्द निपटारा होना चाहिए। वकील ने यह भी बताया कि कलकत्ता हाईकोर्ट 12 नवंबर तक छुट्टियों पर है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह यह बात जानता है। अदालत ने यह भी कहा कि केवल इसलिए कि उसने एक मामले में आदेश दिया है, सभी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में नहीं लाई जा सकतीं।
पहले भी विधानसभा अध्यक्ष पर भरोसा जता चुका है SC
शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उस समय अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष के कामकाज पर अविश्वास जताने का कोई कारण नहीं बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई थी कि विधानसभा अध्यक्ष पिछले न्यायिक फ़ैसलों में तय की गई समयसीमा का पालन करेंगे। लेकिन जब पांच महीने बाद भी अयोग्यता याचिकाओं पर फ़ैसला नहीं हुआ तो चट्टोपाध्याय ने फिर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के केशम मेघचंद्र सिंह बनाम मणिपुर विधानसभा अध्यक्ष मामले का हवाला दिया गया है। इस फैसले में दल-बदल से जुड़े मामलों में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अयोग्यता याचिकाओं पर उचित समयसीमा के भीतर फैसला लेने की जरूरत पर जोर दिया गया था।
TMC में टूट के बाद शुरू हुआ विवाद
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार और बीजेपी की जीत के बाद पार्टी में बड़ी राजनीतिक टूट हुई। चुनाव में टीएमसी के टिकट पर जीतने वाले कई विधायक बागी हो गए। विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के कुछ ही हफ्तों बाद ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाए जाने वाले प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को TMC से निष्कासित कर दिया गया। जल्द ही पार्टी के 80 विधायकों में से 60 से अधिक विधायक बागी खेमे में शामिल हो गए। TMC ने पार्टी में टूट से पहले शोभनदेव चट्टोपाध्याय को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता नामित किया था। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने बागी TMC विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दे दी। इसके साथ ही एक अन्य बागी विधायक को चीफ व्हिप के रूप में भी मान्यता दी गई। शोभनदेव चट्टोपाध्याय और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष के इस फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है, इसलिए उन्हें विपक्ष के नेता के पद पर मान्यता नहीं दी जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब 10 बागी TMC विधायकों की अयोग्यता का मामला कलकत्ता हाईकोर्ट के सामने जाएगा। इस मामले का फैसला पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद और TMC के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से अहम हो सकता है।
यदि इन विधायकों को दल-बदल के आधार पर अयोग्य घोषित किया जाता है, तो विधानसभा की राजनीतिक स्थिति पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों की अयोग्यता पर कोई फैसला नहीं दिया है। अदालत ने केवल कलकत्ता हाईकोर्ट को मामले पर जल्द सुनवाई करने का अनुरोध किया है।