दिल्ली में दिवाली से पहले हवा ख़राब होने पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिवाली पर उपहारों के आदान-प्रदान की संस्कृति को भी वाहनों से होने वाले प्रदूषण की एक वजह बताया। अदालत ने कहा कि दिवाली पर उपहार देने की परंपरा अब अमीर लोगों के बीच सामाजिक प्रतिष्ठा और दिखावे का प्रतीक बन गई है। इसके कारण वाहनों की आवाजाही बढ़ती है और प्रदूषण में इजाफा होता है।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए केवल सरकारी आदेश और प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए समाज के लोगों को अपनी आदतों और व्यवहार में बदलाव लाना होगा। सीजेआई ने दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर कहा, 'हम बस बातें करते रहते हैं, जबकि AQI पहले ही 400 तक पहुंच गया है।' AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ने का मतलब है कि हवा ख़राब होती जाती है। यानी हवा जहरीली होती जाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणियां तब की हैं जब दिल्ली की हवा बेहद खराब स्थिति में पहुंच चुकी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी सीपीसीबी के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 389 दर्ज किया गया। वहीं, राजधानी के कई इलाक़ों में एक्यूआई 400 के पार पहुँच गया था। 400 से ऊपर एक्यूआई को गंभीर श्रेणी में माना जाता है।
ताज़ा ख़बरें

दिवाली के उपहारों से कैसे बढ़ता है वाहनों का प्रदूषण?

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि दिवाली पर उपहार देने की संस्कृति भी वाहनों से होने वाले प्रदूषण को बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, 'दिवाली पर उपहार देने की संस्कृति वाहनों के प्रदूषण में इजाफा करती है। लोगों को यह समझने की जरूरत है कि हमारी मूल संस्कृति क्या है और हमें क्या करना चाहिए।' सीजेआई ने कहा कि दिवाली पर उपहारों का आदान-प्रदान अब केवल एक पारंपरिक रस्म नहीं रह गया है। संपन्न लोगों के बीच यह सामाजिक प्रतिष्ठा और स्टेटस सिंबल बन गया है।
त्योहारों के दौरान लोग बड़ी संख्या में एक-दूसरे के घर जाते हैं, उपहार खरीदते हैं और उन्हें पहुंचाने के लिए वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। इससे सड़कों पर गाड़ियों की संख्या और उनके चलने का समय बढ़ जाता है। इसका असर हवा की गुणवत्ता पर पड़ता है। अदालत ने कहा कि प्रदूषण की समस्या को केवल वाहनों की संख्या से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह भी देखना होगा कि वाहन कितनी देर तक सड़कों पर चल रहे हैं।

'वाहनों के प्रदूषण की निगरानी मुश्किल'

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण की निगरानी को लेकर भी चिंता जताई। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली की समस्या केवल यहां पंजीकृत वाहनों तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों से वाहन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आते हैं। ऐसे वाहनों की स्थिति और उनसे निकलने वाले प्रदूषण की निगरानी करना मुश्किल हो जाता है। CJI ने कहा,
यहां सब कुछ खुला हुआ है। देशभर से वाहन आते हैं। आप वाहन की पूरी स्थिति या उससे निकलने वाले उत्सर्जन की निगरानी नहीं कर सकते। भले ही कोई वाहन दो घंटे के लिए यहां आए, नुकसान तो हो चुका होता है।
सीजेआई सूर्यकांत
अदालत ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण का संकट केवल वाहनों की संख्या का मामला नहीं है। वाहनों के सड़कों पर रहने की अवधि भी महत्वपूर्ण है। सीजेआई ने कहा, 'यह वाहनों की संख्या का सवाल नहीं है। सवाल यह है कि वे कितनी देर तक सड़क पर रहते हैं।' इस टिप्पणी से अदालत ने संकेत दिया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए वाहनों के उत्सर्जन के साथ-साथ उनकी आवाजाही और सड़कों पर बिताए जाने वाले समय पर भी ध्यान देना जरूरी है।

प्रदूषण रोकने के लिए उठाए जा रहे कदम: सरकार

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुईं। उन्होंने अदालत को बताया कि दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई क़दम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP के दूसरे चरण को लागू किया जा चुका है। GRAP प्रदूषण के स्तर के आधार पर लागू किए जाने वाले आपातकालीन उपायों की व्यवस्था है। इसके तहत प्रदूषण बढ़ने पर अलग-अलग स्तरों पर प्रतिबंध और नियंत्रण के कदम उठाए जाते हैं।

दिवाली के त्योहार का हो रहा व्यावसायीकरण: SC

सुनवाई के दौरान एक वकील ने सुझाव दिया कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए दिवाली पर उपहारों के आदान-प्रदान की परंपरा को रोकने की जरूरत हो सकती है। सीजेआई सूर्यकांत ने इस सुझाव पर कहा कि लोगों को इसी तरह के सांस्कृतिक बदलाव को अपनाने की जरूरत है। पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी दिवाली जैसे त्योहारों के बढ़ते व्यावसायीकरण पर चिंता जताई। जस्टिस बागची ने कहा, 'त्योहारों के व्यावसायीकरण और उन्हें वस्तुओं के कारोबार में बदलने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।'

गरीबों की रोजी-रोटी पर असर नहीं पड़ना चाहिए: CJI

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में प्रदूषण के कारण गरीबों पर पड़ने वाले असर का मुद्दा भी उठा। अदालत की मदद कर रहीं वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि प्रदूषण का सबसे ज्यादा नुकसान गरीब लोगों को उठाना पड़ता है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि त्योहारों के समय गरीब लोगों की आर्थिक स्थिति को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
सीजेआई ने कहा, 'हमें ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहिए। यह वह समय है जब गरीब लोग, जो कोई प्रदूषण पैदा नहीं करते, पैसा कमाते हैं। वे दुकानें लगाते हैं और दीये बेचते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि समस्या उन लोगों से है, जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं और उपहार देने की परंपरा को सामाजिक प्रतिष्ठा और दिखावे का प्रतीक बना रहे हैं। CJI ने कहा कि ऐसे लोग वाहनों से होने वाले प्रदूषण में इजाफा कर रहे हैं।

'सिर्फ प्रतिबंध लगाने से प्रदूषण नहीं रुकेगा'

सुनवाई के अंत में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जितने अधिक आदेश जारी करेगा, उनके उल्लंघन के मामले भी उतने ही सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा, 'लोगों के योगदान के बिना कोई भी प्रतिबंध काम नहीं करेगा। हम जितनी अधिक पाबंदियां लगाएंगे, उतना ही अधिक उल्लंघन देखने को मिलेगा।' सीजेआई ने स्थानीय पार्षदों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन से भी अपील की कि वे लोगों को दिवाली मनाने के दौरान प्रदूषण नहीं बढ़ाने के लिए समझाएं। अदालत ने कहा कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए समाज की भागीदारी जरूरी है।
देश से और खबरें

दिल्ली में हर साल दिवाली के आसपास बिगड़ती है हवा

दिल्ली में हर साल दिवाली के आसपास वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। इसके पीछे कई कारण हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक प्रदूषण, मौसम में बदलाव और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं दिल्ली की हवा को खराब करती हैं। दिवाली के दौरान पटाखों का इस्तेमाल भी प्रदूषण बढ़ाने में योगदान देता है।
इसके अलावा त्योहारों के दौरान बाजारों में भीड़ बढ़ती है और लोग बड़ी संख्या में खरीदारी करने तथा एक-दूसरे से मिलने के लिए बाहर निकलते हैं। इससे वाहनों की आवाजाही भी बढ़ जाती है। इस बार भी दिल्ली का AQI गंभीर श्रेणी के करीब पहुंच गया है। शुक्रवार को औसत AQI 389 दर्ज किया गया, जबकि कई इलाकों में यह 400 से अधिक था। AQI के 400 के पार पहुंचने का मतलब है कि हवा की गुणवत्ता गंभीर स्थिति में है और इसका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
अब सवाल यह है कि क्या दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए सरकार और प्रशासन के साथ-साथ नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे? क्या दिवाली पर दिखावे और अनावश्यक वाहन यात्राओं को कम करने के लिए समाज में बदलाव आएगा? सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि जब तक लोग अपनी आदतों में बदलाव नहीं करेंगे, तब तक केवल प्रतिबंधों और आदेशों के जरिए दिल्ली की हवा को साफ करना मुश्किल होगा।