सुप्रीम कोर्ट ने नीट परीक्षा में NTA के कामकाज को लेकर गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि यह "दुखद" है कि 2024 के बड़े विवाद के बाद भी NTA ने अपने अतीत की गलतियों से कोई सबक नहीं सीखा।
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार (29 मई) को हुई अहम सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने देश की परीक्षा प्रणाली और उसकी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कड़े शब्दों में पूछा कि जब परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी और ओवरसाइट मैकेनिज्म (Oversight Mechanisms) पहले से मौजूद थे, तो फिर इतनी बड़ी चूक और पेपर लीक की घटना कैसे हो गई?
कोर्ट ने पूछा- निगरानी व्यवस्था होने के बावजूद विफलता क्यों?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इसरो (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली हाई-लेवल कमेटी की सिफारिशों को लागू किए जाने की समीक्षा की। जस्टिस नरसिम्हा ने टिप्पणी की कि डॉ. राधाकृष्णन पहले इस उच्चस्तरीय सुधार समिति के सदस्य थे और बाद में उन्हें इन सिफारिशों के क्रियान्वयन की निगरानी (Monitoring) का जिम्मा भी सौंपा गया था।
सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने इस बात पर सहमति जताई कि किसी न किसी को तो जिम्मेदारी लेनी ही होगी। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। मेहता ने आगे कहा कि सरकार युवाओं को लेकर चिंतित है।
अदालत ने बेहद तल्ख लहजे में कहा- "अगर इतनी सख्त निगरानी के बावजूद यह विफलता (पेपर लीक) हुई है, तो निश्चित रूप से निगरानी प्रक्रिया में ही कोई बड़ी खामी या लापरवाही रही है।"
जजों ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन सी कमजोरियां या सुरक्षा चूक थीं, जो समिति की नजरों से बच गईं और जिसके कारण सेंधमारी का रास्ता साफ हुआ? कोर्ट ने सरकार और NTA से पूछा कि क्या सुधारों की इन सिफारिशों को उनके मूल और तय रूप में लागू किया गया था, या फिर परीक्षा प्रणाली में कुछ कमजोरियों को बिना सुधारे ही छोड़ दिया गया था?
101 सिफारिशें और उन्हें पर सवाल
अदालत के सामने दी गई दलीलों के अनुसार, परीक्षा प्रणाली को फूलप्रूफ बनाने के लिए समिति ने कुल 101 सिफारिशें पेश की थीं। इनमें से 60 लघु अवधि (Short-term) के उपाय शामिल थे, जिन्हें शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान ही पूरी तरह लागू किया जाना था। अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि इन तमाम सुरक्षा उपायों और दावों के बावजूद प्रश्नपत्र लीक हो गया। कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है, जबकि NTA और डॉ. राधाकृष्णन की ओर से दाखिल हलफनामों को रिकॉर्ड पर लिया गया है।'NTA ने अतीत की गलतियों से कोई सबक नहीं सीखा'
इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने NTA के कामकाज को लेकर गहरी नाराजगी जताई थी। अदालत ने टिप्पणी की थी कि यह बेहद "दुखद" है कि 2024 के बड़े विवाद के बाद भी NTA ने अपने अतीत की गलतियों से कोई सबक नहीं सीखा।फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) जैसी संस्थाओं द्वारा दायर याचिकाओं में NTA के पुनर्गठन या उसकी जगह किसी अधिक स्वायत्त और मजबूत संस्था को लाने की मांग की गई है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं से 22 लाख से अधिक मेडिकल उम्मीदवारों और उनके परिवारों का भविष्य अधर में लटक गया है और यह उनके मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित हुई NEET-UG परीक्षा को पेपर लीक के पुख्ता आरोपों के बाद 12 मई को रद्द कर दिया गया था। फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) इस पूरे रैकेट और लीक के पीछे की कड़ियों की गहन जांच कर रही है।