मुक्त व्यापार समझौते और विदेश नीति पर ही संसद के बजट सत्र में बड़ा हंगामा हो सकता है। खुद बीजेपी की ही अहम सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी यानी टीडीपी भी इसका हिस्सा हो सकती है। विपक्षी दल और टीडीपी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह हाल ही में हुए विदेश व्यापार समझौतों और अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के बारे में संसद को जानकारी दे। यह मांग 27 जनवरी को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में रखी गई।

भारत ने हाल ही में कई बड़े मुक्त व्यापार समझौते यानी एफ़टीए किए हैं। 27 जनवरी को ही भारत और यूरोपीय संघ के बीच एफ़टीए की बातचीत पूरी हुई। इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है, क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है। इसमें 2 अरब लोग शामिल हैं और वैश्विक जीडीपी का लगभग एक चौथाई हिस्सा कवर होता है। इससे पहले भारत ने यूके, सिंगापुर और यूएई के साथ एफ़टीए साइन किए थे। इन समझौतों से भारत के निर्यात को फायदा होगा, टैरिफ कम होंगे और नौकरियां बढ़ने की उम्मीद है।

विपक्ष और टीडीपी की मांगें

विपक्षी नेताओं ने बैठक में कहा कि सरकार को संसद को इन एफ़टीए के बारे में बताना चाहिए। खासकर अमेरिका के नए टैरिफ नियमों और बदलते वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच यह जरूरी है। लोकसभा में टीडीपी के फ्लोर लीडर लवु श्री कृष्ण देवरायालु ने कहा कि वैश्विक स्थिति बदल रही है, इसलिए संसद को अपडेट होना चाहिए। उन्होंने अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी बनाने के लिए कानूनी समर्थन देने वाला बिल लाने की भी मांग की। टीडीपी ने तीन राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा मांगी - एफ़टीए, 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन और अमरावती कैपिटल बिल।

विदेश नीति पर भी बहस की मांग

विपक्ष ने भारत की विदेश नीति पर भी बहस की मांग की। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों को बार-बार अपमान बताया। ट्रंप ने पीएम मोदी के बारे में कुछ ऐसे बयान दिए जिन्हें विपक्ष ने भारत की गरिमा पर हमला माना। विपक्ष ने वेनेजुएला, इसराइल-फिलिस्तीन संघर्ष, ग्रीनलैंड पर अमेरिका के दावे और अन्य वैश्विक मुद्दों पर भारत की चुप्पी पर सवाल उठाए। सीपीआई(एम) के जॉन ब्रिटास, कांग्रेस के कोडिकुन्निल सुरेश, सीपीआई के पी. संतोष कुमार, सपा के राम गोपाल यादव और आप के संजय सिंह ने सरकार से स्पष्ट रुख बताने की मांग की।

SIR और VB-G RAM G पर विवाद

विपक्ष ने चुनावी रोल्स की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर पर बहस की मांग की। एसआईआर चुनाव आयोग की एक बड़ी कवायद है। इसमें वोटर लिस्ट को साफ़ करने के लिए हर योग्य वोटर को शामिल किये जाने और अयोग्य नाम के हटाए जाने के दावे किए जा रहे हैं। यह प्रक्रिया 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले कई राज्यों में चल रही है। लेकिन इसकी पूरी प्रक्रिया पर ही विवाद है और विपक्ष इस पर बीजेपी और चुनाव आयोग की मिलीभगत का आरोप लगा रहा है।

विपक्ष ने विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G एक्ट पर भी बहस मांगी। यह नया कानून ग्रामीण रोजगार की गारंटी बढ़ाने का दावा करता है। जबकि विपक्ष कहता है कि यह रोजगार गारंटी के अधिकार को ख़त्म कर देगा।

सरकार का जवाब

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एसआईआर और VB-G RAM G Act पर बहस से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, 'एक बार कानून देश के सामने आ गया तो हमें उसे मानना होगा। हम गियर रिवर्स नहीं कर सकते।' SIR पर उन्होंने कहा कि पिछले सत्र में चुनावी सुधारों पर लंबी चर्चा हुई थी, सदस्यों को काफी समय मिला था। ये मुद्दे राष्ट्रपति के अभिभाषण और बजट बहस में उठाए जा सकते हैं।
रिजिजू ने कहा कि सरकार सदन सुचारू रूप से चलाना चाहती है। उन्होंने सभी दलों से शालीनता बरतने की अपील की और कहा कि बोलने का अधिकार है, लेकिन दूसरों की सुनने की ड्यूटी भी है। उन्होंने बताया कि सत्र का बिजनेस लिस्ट जल्द साझा किया जाएगा।

टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर, विपक्षी राज्यों के बकाया और सुरक्षा एजेंसियों के दुरुपयोग पर सवाल उठाए। राज्या सभा में उनकी डिप्टी लीडर सागरिका घोष ने कहा, 'संसद एक तरफा सड़क नहीं है, न ही सरकार का नोटिस बोर्ड।'

यह बैठक 28 जनवरी से अप्रैल तक चलने वाले बजट सत्र से पहले हुई। सत्र में राष्ट्रपति का अभिभाषण 28 जनवरी को और बजट 1 फरवरी को पेश होगा। विवाद से लगता है कि सत्र में बहस के दौरान हंगामा होगा, खासकर एफ़टीए, विदेश नीति और चुनावी मुद्दों पर।