आरएसएस रजिस्ट्रेशन विवाद पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जो तर्क दिया था कि संघ सरकार से पैसे नहीं लेता है उस पर तब फिर से बहस छिड़ गई जब द न्यूज़ मिनट ने खोजी रिपोर्ट दी कि सरकारी कंपनी ओएनजीसी ने पिछले 10 साल में RSS से जुड़ी 20 संस्थाओं को 668 करोड़ रुपये से ज़्यादा का चंदा या दान दिया। इसके बाद आरएसएस के रजिस्ट्रेशन पर सवाल उठाने वाले कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने संघ की फंडिंग पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। द न्यूज़ मिनट की खोजी रिपोर्ट पर अभी तक ओएनजीसी या आरएसएस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रिपोर्ट के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी नहीं हुई है। लेकिन इस रिपोर्ट को लेकर प्रियांक खड़गे ने नये सिरे से सवाल दागा है।

प्रियांक खड़गे ने क्या कहा?

प्रियांक खड़गे ने एक्स पर इस रिपोर्ट को साझा करते हुए लिखा कि सार्वजनिक क्षेत्र यानी पीएसयू की एक कंपनी का 668 करोड़ रुपये का सरकारी पैसा पिछले दस वर्षों में सीएसआर यानी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के माध्यम से आरएसएस से जुड़े संगठनों तक पहुंचा है।

खड़गे के आरोप

  • PSU का पैसा RSS से जुड़े संगठनों तक पहुंचाया गया।
  • मंदिरों में चढ़ाया गया चढ़ावा भी RSS से जुड़े संस्थानों की ओर मोड़ा गया।
  • आपदा राहत और कोविड राहत से जुड़े फंड का भी इस्तेमाल ऐसे संगठनों के लिए किया गया।
  • सैकड़ों एकड़ सरकारी जमीन आरएसएस को दिया गया।
  • कल्याण कर्नाटक विकास फंड को भी RSS को डायवर्ट किया गया।
प्रियांक खड़गे ने कहा कि हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि आरएसएस सरकार से फंड नहीं लेता और केवल सरकारी सहायता लेने वाले संगठनों को ही पंजीकरण की ज़रूरत होती है। उन्होंने द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट का ज़िक्र करते हुए सवाल उठाया कि यदि ऐसा है तो आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों तक लगातार करोड़ों रुपये का सरकारी धन कैसे पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि अब सवाल केवल आरएसएस के पंजीकरण का नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही का है।
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द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट में क्या दावा?

द न्यूज़ मिनट की खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकारी तेल कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन यानी ओएनजीसी ने पिछले लगभग दस वर्षों में अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी सीएसआर फंड से आरएसएस से जुड़ी 20 संस्थाओं को करीब 668 करोड़ रुपये दिए।

रिपोर्ट के अनुसार ओएनजीसी ने साल 2015 से 2025 के बीच सीएसआर के तहत देशभर में 4531 करोड़ रुपये से अधिक की राशि 2000 से ज्यादा परियोजनाओं और संस्थाओं को दी। रिपोर्ट का दावा है कि इनमें से 668.01 करोड़ रुपये यानी कुल सीएसआर खर्च का लगभग 14.7 प्रतिशत आरएसएस से जुड़े 20 संगठनों को मिला। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसने जिन 20 संगठनों की पहचान की है उनमें से नौ संगठन सीधे तौर पर संघ से जुड़े हैं, नौ संगठन या तो RSS से जुड़े लोगों ने शुरू किए थे या उनका नेतृत्व ऐसे लोग कर रहे हैं जिनके RSS से संबंध हैं, और दो संगठनों ने संघ के साथ मिलकर काम किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन संस्थाओं की पहचान एक शोध परियोजना 'Seeing the Sangh' के आधार पर की गई, जिसमें आरएसएस से जुड़े 2500 से अधिक संगठनों का डेटाबेस तैयार किया गया है।

किन संस्थाओं का नाम लिया गया?

रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक राशि असम के शिवसागर जिले स्थित स्वर्गदेव सियू-का-फा अस्पताल को मिली। बताया गया है कि इस अस्पताल का संचालन ओएनजीसी द्वारा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर वैद्यकीय प्रतिष्ठान यानी BAVP के सहयोग से किया जाता है, जिसे रिपोर्ट में आरएसएस की विचारधारा से जुड़ा संगठन बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ओएनजीसी ने वर्ष 2016 से 2024 के बीच इस अस्पताल के लिए लगभग 434 करोड़ रुपये सीएसआर फंड से दिए।

इस अस्पताल का उद्घाटन वर्ष 2023 में हुआ था और यहां आयुष्मान भारत योजना के तहत भी इलाज की सुविधा उपलब्ध है। अस्पताल का मक़सद आम लोगों को सस्ती और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना बताया गया है।

स्वर्गदेव सियू-का-फा अस्पताल के चेयरमैन डॉ. अनंत पंधारे BAVP के बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टीज़ में शामिल हैं। उन्हें फरवरी 2025 में AIIMS नागपुर का प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया था। उन्होंने उस साल लिंक्डइन पर एक पोस्ट में RSS की शाखा में समय बिताने का ज़िक्र किया था। इकोनॉमिक टाइम्स से असम के अस्पताल के बारे में बात करते हुए पंधारे ने कहा था, 'हम RSS से जुड़ी एक संस्था हैं और सेवा ही हमारा मकसद है।'

नागपुर के कैंसर संस्थान को भी मिली बड़ी राशि

रिपोर्ट में दूसरा सबसे बड़ा लाभार्थी डॉ. आबाजी थत्ते सेवा एवं अनुसंधान संस्थान को बताया गया है। दावा किया गया है कि ओएनजीसी ने 2017 से 2022 के बीच इस संस्था को 140 करोड़ रुपये दिए, जिनका उपयोग नागपुर स्थित नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट की स्थापना में किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संस्था के पदाधिकारियों के आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद यानी वीएचपी से संबंध रहे हैं।

अन्य संस्थाओं को मिला पैसा

द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट के अनुसार ओएनजीसी ने बीएवीपी और डॉ. आबाजी थट्टे सेवा और अनुसंधान संस्था के अलावा आरएसएस से जुड़ी 18 और संस्थाओं को भी फंड दिया। इन संस्थाओं को सबसे ज़्यादा फ़ायदा पाने वाली दो संस्थाओं की तुलना में कम रक़म मिली। फिर भी ग्रांट की रक़म एक करोड़ रुपये से लेकर 15 करोड़ रुपये तक थी। रिपोर्ट के अनुसार-
  • सेवा भारती की विभिन्न शाखाओं को 13.95 करोड़ रुपये (मेडिकल उपकरण, बाढ़ राहत आदि के लिए) मिले।
  • राष्ट्रोत्थान परिषद को 11.6 करोड़ (स्कूलों के लिए) मिले।
  • एकल विद्यालय फाउंडेशन को 8.69 करोड़ रुपये मिले।
  • विवेकानंद मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट को 7.47 करोड़।
  • परम शक्ति पीठ (साध्वी ऋतंभरा द्वारा स्थापित) को 2.49 करोड़।
  • विवेकानंद केंद्र को 3.96 करोड़ रुपये मिले।
इनके अलावा आरएसएस की शैक्षणिक शाखा विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान से जुड़े नेताजी सुभाष चंद्र बोस मिलिट्री एकेडमी, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, रज्जू भैया सैनि विद्या मंदिर, शिशु शिक्षा समिति असम, मानव सेवा प्रतिष्ठान जैसी कई संस्थाओं को स्कूल, छात्रावास, योग केंद्र और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए करोड़ों रुपये मिले।
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ONGC ने नहीं दिया जवाब

द न्यूज़ मिनट ने रिपोर्ट दी है कि इस पूरे मामले पर टिप्पणी के लिए ONGC से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। RSS की ओर से भी इस रिपोर्ट या प्रियांक खड़गे के आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

यह मामला तब सामने आया है जब RSS की फंडिंग और उसके पंजीकरण को लेकर राजनीतिक बहस पहले से ही जारी है। कांग्रेस इस रिपोर्ट के आधार पर सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है। वहीं, दूसरी ओर अभी तक इन आरोपों पर संबंधित संस्थाओं का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद और तेज होने की संभावना है।