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तिहाड़ में चिदंबरम से मिले सोनिया और मनमोहन

आईएनएक्स मीडिया मामले में तिहाड़ जेल में क़ैद पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम से सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मिलने पहुँचे। मुलाक़ात से पहले चिदम्बरम ने ट्वीट कर कहा कि यह उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा, जब तक कांग्रेस पार्टी मजबूत और साहसी है, मैं भी मजबूत और साहसी रहूंगा।
74 साल के चिदंबरम 5 सितंबर से तिहाड़ जेल में हैं। हाल ही में दिल्ली की एक अदालत ने चिदंबरम की हिरासत को 3 अक्टूबर तक के लिए बढ़ा दिया था। 
आईएनएक्स मीडिया मामले में गिरफ़्तारी से बचने के लिए चिदंबरम ने दिल्ली हाई कोर्ट में अग्रिम ज़मानत के लिए याचिका लगाई थी और जब यह ख़ारिज हो गई तब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट से भी तत्काल राहत नहीं मिलने पर सीबीआई ने उन्हें उनके घर से गिरफ़्तार कर लिया था। 
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आरोप है कि 2007 में कार्ति चिदंबरम ने अपने पिता पी. चिदंबरम के ज़रिए आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश प्रमोशन बोर्ड से विदेशी निवेश की मंज़ूरी दिलाई थी जबकि विदेशी निवेश के लिए कैबिनेट की आर्थिक मामलों की सलाहकार समिति की इजाज़त लेना ज़रूरी है। आरोप है कि इस मामले में सभी नियमों को ताक पर रखा गया था। हालाँकि चिदंबरम सीबीआई के इन आरोपों को ख़ारिज़ करते रहे हैं और कहते रहे हैं कि विदेशी निवेश के प्रस्तावों को मंज़ूरी देने में कोई भी गड़बड़ी नहीं की गयी है। उस दौरान चिदंबरम केंद्र में वित्त मंत्री थे।
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चिदंबरम के परिवार ने मीडिया को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि पूर्व केंद्रीय मंत्री के बारे में दिखाई जा रही तमाम ख़बरें झूठी, बग़ैर पड़ताल के और बेबुनियाद आरोपों पर आधारित हैं। परिवार की ओर से जारी की गई चिट्ठी में पूर्व वित्त मंत्री को दानव की तरह पेश करने के लिए केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार बताया गया था। कार्ती चिदंबरम ने सरकार पर ज़ोरदार हमला बोलते हुए कहा था कि सरकार इस मामले में कोई सबूत तो पेश करे।
इस मामले में सीबीआई ने 15 मई, 2017 को एफ़आईआर दर्ज की थी। आरोप है कि कार्ति ने ही आईएनएक्स मीडिया की प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी को पी. चिदंबरम से मिलवाया था। यह भी आरोप हैं कि आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश की मंज़ूरी दिलाने में कार्ति चिदंबरम ने घूस के तौर पर मोटी रकम ली थी। इस मामले में कार्ति चिदंबरम को गिरफ़्तार भी किया गया था। हालाँकि बाद में उन्हें ज़मानत मिल गई थी। फिर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर जाँच की थी।
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