संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के इस्तीफे की मांग की है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर करने से बचने की अपील की है। मोर्चा ने इसे अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कृषि कंपनियों के सामने भारत का "पूर्ण समर्पण" करार दिया है और चेतावनी दी है कि अगर समझौता हुआ तो बड़े पैमाने पर देशभर में जन संघर्ष छिड़ जाएगा।

एसकेएम के नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की रूपरेखा बताते हुए दावा किया कि कृषि और डेयरी क्षेत्र इसमें शामिल नहीं हैं, लेकिन यह दावा झूठा है। मोर्चा ने आरोप लगाया कि गोयल किसानों और पूरे देश के साथ धोखा कर रहे हैं। अब उनका इस पद पर बने रहना नैतिक रूप से उचित नहीं है। एसकेएम ने गोयल को "देशद्रोही" तक कह डाला और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की।

भारतीय कृषि को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के फंदे पर लटका दिया जाएगा 

संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार, इस अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका से सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन (डीडीजीएस), पशु चारे के लिए लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन ऑयल, वाइन और स्पिरिट्स सहित कई कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क शून्य कर दिया जाएगा। इससे अमेरिकी कंपनियां भारतीय पशु चारा बाजार पर कब्जा कर लेंगी और भारतीय कृषि को अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के "फंदे" में लटका दिया जाएगा। एसकेएम ने कहा कि भारतीय कृषि उत्पादों पर अमेरिका का टैरिफ पहले 0 से 3% और अब 18% तक बढ़ गया है, जबकि अमेरिकी कृषि उत्पादों पर भारत का टैरिफ 30-150% से घटाकर शून्य कर दिया गया है।

किसानों ने इंपोर्टेड पशु चारा कभी नहीं मांगाः टिकैत

राकेश टिकैत जैसे नेताओं ने सवाल उठाया कि किसानों ने कभी आयातित पशु चारा नहीं मांगा, यह मांग पोल्ट्री उद्योग से आई है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी चारे में गैर-शाकाहारी सामग्री हो सकती है, जिससे गायों को मांसाहारी भोजन कराना पड़ेगा। आरएसएस के दावों के विपरीत यह अमेरिकी दबाव में बाधा हटाने जैसा है।

कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों के लिए यह समझौता विनाशकारी बताया गया है। एप्पल फार्मर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के नेता एम.वाई. तरिगामी ने कहा कि इन राज्यों में सेब और ड्राई फ्रूट्स ही मुख्य आय का स्रोत हैं, जहां पहले से ही मार्केटिंग, जलवायु चुनौतियां और आर्थिक समस्याएं हैं। केंद्र सरकार अमेरिकी मालिकों के लिए काम कर रही है और किसानों की परवाह नहीं कर रही।

कपास उत्पादकों की चिंता

कपास उत्पादकों ने भी चिंता जताई। कपास एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अतुल गनात्रा और महाराष्ट्र के कपास किसान नेता अजीत नवले ने कहा कि अमेरिकी कपास पर ड्यूटी-फ्री आयात से भारतीय कपास किसानों की स्थिति और खराब हो जाएगी, क्योंकि भारतीय उपज विदेशों से कम है और कीमतें अधिक हैं। इस सीजन में 225 लाख गांठें बाजार में आई हैं और 100 लाख और आने वाली हैं।

12 फरवरी को विरोध प्रदर्शन

एसकेएम ने किसानों से 12 फरवरी को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने और मजदूरों की सामान्य हड़ताल का समर्थन करने का आह्वान किया है। इसे मोदी सरकार की "जन-विरोधी" नीतियों के खिलाफ "उचित जवाब" बताया गया है। मोर्चा ने प्रधानमंत्री से समझौते पर हस्ताक्षर न करने की मांग की, अन्यथा देशव्यापी संघर्ष की चेतावनी दी।


कांग्रेस के पवन खेड़ा का ज़ोरदार हमला

ट्रेड डील फ्रेमवर्क के सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे मोदी सरकार की बड़ी नाकामी और भारत के हितों के साथ समझौता करार दिया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इसे "समर्पण" (surrender) बताया और कहा कि यह समझौता भारत के आत्मसम्मान और हितों की धज्जियां उड़ाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह डील अमेरिकी दबाव में की गई है, जिससे भारतीय किसानों और अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान होगा। कांग्रेस ने इसे पिछले 75 वर्षों की भारत की नीतियों के साथ विश्वासघात बताया।


डील ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तबाह कर देगीः सुरजेवाला

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने डील को किसानों के पेट पर प्रहार करार दिया और सवाल उठाया कि अमेरिकी मक्का, कपास, सोयाबीन, फल और अन्य कृषि उत्पादों पर शून्य शुल्क से भारतीय किसानों का क्या होगा। उन्होंने पीएम मोदी और पीयूष गोयल से पूछा कि "अतिरिक्त उत्पाद" क्या हैं- क्या दूध, गेहूं और डेयरी उत्पाद भी शामिल होंगे? सुरजेवाला ने चेतावनी दी कि यह समझौता ग्रामीण आजीविका को तबाह कर देगा और अमेरिकी सब्सिडी वाले सस्ते आयात से भारतीय कृषि को बर्बाद करेगा।

समझौता किसानों को बर्बाद कर देगा, महंगाई बढ़ेगीः संजय सिंह

आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने डील को भारतीय लोगों के साथ धोखा बताया और कहा कि अमेरिकी सामान भारत में शून्य टैरिफ पर आएंगे, जबकि भारतीय निर्यात पर 18% टैरिफ रहेगा। उन्होंने किसानों और आम जनता पर दोहरा झटका बताया, जिसमें रूसी तेल आयात रोकने से 70-80 हजार करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सिंह ने कहा कि यह समझौता किसानों को नष्ट कर देगा और मुद्रास्फीति बढ़ाएगा, तथा पार्टी सड़कों से संसद तक विरोध जारी रखेगी।

सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस मुद्दे पर सीधे विस्तृत टिप्पणी नहीं की, लेकिन विपक्षी दलों के साथ जुड़कर उन्होंने मोदी सरकार की व्यापार नीतियों को किसानों और बहुजन हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने बजट सत्र और अन्य मुद्दों पर चर्चा में इसे अमेरिकी दबाव में भारत की कमजोरी के रूप में देखा, हालांकि उनका मुख्य फोकस दलित-बहुजन मुद्दों पर रहा। कुल मिलाकर, विपक्ष ने डील को किसान-विरोधी और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ एकजुट होकर निंदा की है।