केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह कहकर 2029 के लोकसभा चुनाव का एजेंडा साफ़ कर दिया है कि चुनाव से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू कर दी जाएगी। बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के घोषणा-पत्र में यूसीसी लागू करने का वादा किया था। उत्तराखंड के बाद गुजरात, असम और मध्य प्रदेश समेत कई बीजेपी शासित राज्यों में इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। हालाँकि, एनआरसी को लेकर शाह ने कहा कि मणिपुर में सहयोगी दलों और विभिन्न समूहों से बातचीत जारी है और अभी कोई अंतिम फ़ैसला नहीं हुआ है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर यह बड़ी घोषणा की। 
यूसीसी बीजेपी के लंबे समय से चले आ रहे प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल रहा है। यूसीसी लागू होने के बाद शादी, तलाक, विरासत और दूसरे व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था बनाने की कोशिश की जाएगी।

अमित शाह की घोषणा

मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में अमित शाह ने कहा कि बीजेपी सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों में कई बड़े फैसले लिए हैं और यूसीसी भी उसके प्रमुख संकल्पों में शामिल है। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में यूसीसी लागू हो चुका है और अब एनडीए शासित बाकी राज्यों में भी इसे लागू किया जाएगा। शाह ने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले सभी 21 राज्यों में यूसीसी लागू करना सरकार का संकल्प है।
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इस बयान का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि 2029 के आम चुनाव से पहले यूसीसी को बीजेपी शासित राज्यों में बड़े पैमाने पर लागू करने की समयसीमा अब सार्वजनिक रूप से सामने रख दी गई है।

UCC क्या है?

समान नागरिक संहिता का मूल विचार यह है कि धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय नागरिकों के लिए कुछ प्रमुख निजी और पारिवारिक मामलों में एक समान कानून हो। इसमें विवाह, तलाक, विरासत, उत्तराधिकार, पारिवारिक कानून जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। बीजेपी लंबे समय से तर्क देती रही है कि अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग व्यक्तिगत कानून होने के बजाय समान नागरिक कानून होना समानता और लैंगिक न्याय के लिहाज से जरूरी है।

यूसीसी के आलोचक आशंका जताते रहे हैं कि देश की अलग-अलग धार्मिक, आदिवासी और सांस्कृतिक परंपराओं को एक कानून में समेटना आसान नहीं है। इसलिए यूसीसी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस लगातार चलती रही है।

उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य

बीजेपी शासित राज्यों में उत्तराखंड ने सबसे पहले समान नागरिक संहिता को लागू किया। इसके बाद दूसरे बीजेपी शासित राज्यों ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है और अब नोटिफिकेशन जारी होने का इंतज़ार है। महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल आदि में ड्राफ्ट तैयार करने या समिति गठित करने का काम चल रहा है।

अब अमित शाह के बयान से संकेत है कि केंद्र सरकार और बीजेपी आने वाले वर्षों में इसे एनडीए शासित सभी राज्यों तक ले जाने की तैयारी में है। हालाँकि राज्यों में यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है और स्थानीय कानूनों, सामाजिक परंपराओं तथा संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखना होगा।

आदिवासी UCC से बाहर रहेंगे?

यूसीसी की चर्चा में आदिवासी समुदायों का मुद्दा महत्वपूर्ण रहा है। बीजेपी की नीति के मुताबिक आदिवासी समूहों को उनके जातीय रीति-रिवाज, परंपराओं और पहचान को बनाए रखने के लिए यूसीसी से छूट दी जा सकती है। इसका मतलब यह है कि प्रस्तावित समान नागरिक व्यवस्था पूरी तरह एक जैसी नहीं होगी, बल्कि कुछ विशेष समुदायों और उनकी पारंपरिक व्यवस्थाओं को अपवाद मिल सकते हैं। यही सवाल यूसीसी की व्यावहारिक संरचना को लेकर भी अहम है कि अलग-अलग राज्यों और समुदायों के लिए किस तरह के अपवाद रखे जाएंगे।

NRC पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं: शाह

यूसीसी के साथ ही अमित शाह ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी को लेकर भी बड़ा बयान दिया। मणिपुर में एनआरसी लागू करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राज्य में सहयोगी दलों, राजनीतिक दलों और विभिन्न समूहों के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि जैसे ही कोई फैसला लिया जाएगा, उसके बारे में जानकारी दी जाएगी। इसका मतलब है कि फिलहाल मणिपुर में एनआरसी लागू करने की कोई अंतिम समयसीमा घोषित नहीं की गई है।

अवैध प्रवासियों और घुसपैठ के मुद्दे पर अमित शाह ने सरकार का पुराना सख्त रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि सरकार देश में अवैध तरीके से दाखिल हुए प्रत्येक व्यक्ति की पहचान करेगी।
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अमित शाह ने मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के कामकाज का जिक्र करते हुए ट्रिपल तलाक और अनुच्छेद 370 को प्रमुख फैसलों में गिनाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए ट्रिपल तलाक को खत्म किया। अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के मौके पर बीजेपी के एक महीने लंबे 'सेवा संकल्प अभियान' का भी ऐलान किया। यह अभियान 17 सितंबर से शुरू होगा, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। 

2029 का एजेंडा साफ?

अमित शाह का बयान यूसीसी को लेकर बीजेपी की भविष्य की राजनीतिक रणनीति का संकेत भी माना जा सकता है। बीजेपी ने अयोध्या में राम मंदिर, अनुच्छेद 370 और ट्रिपल तलाक जैसे अपने प्रमुख मुद्दों पर फैसले लेने के बाद अब यूसीसी को अगले बड़े एजेंडे के रूप में लगातार आगे बढ़ाया है।

2029 से पहले सभी एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने की घोषणा इस मुद्दे को अगले लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला सकती है।