विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा संस्थानों को “भारतीय-नारी से नारायणी” शीर्षक से आयोजित होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। यह सम्मेलन 7–8 मार्च 2026 को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित किया जाएगा।
यूजीसी द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, यह सम्मेलन भारतीय विद्वत परिषद (BVP) और राष्ट्र सेविका समिति द्वारा आयोजित किया जा रहा है। सर्कुलर में इस कार्यक्रम को महिला विचार नेताओं के लिए एक “सहयोगात्मक राष्ट्रीय मंच” बताया गया है, जहां आत्मनिर्भरता, समावेशी नेतृत्व और समग्र राष्ट्रीय विकास जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसमें महिलाओं की उपलब्धियों का उत्सव मनाने, नवाचार को प्रोत्साहन देने और भारत के भविष्य के लिए साझेदारी विकसित करने का उद्देश्य बताया गया है।
यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों से सम्मेलन से पहले शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित करने का आग्रह किया है। इनमें पैनल चर्चा, पोस्टर प्रस्तुति और ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति जैसी गतिविधियां शामिल हैं, जो आठ चिन्हित विषयों के इर्द-गिर्द आयोजित की जानी हैं। संस्थानों को इन गतिविधियों के निष्कर्ष और सिफारिशों को संकलित कर यूजीसी को रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है। इसकी एक प्रति बीवीपी की सचिव प्रो. शिवानी वी. को भी भेजने का निर्देश दिया गया है, ताकि सम्मेलन के दौरान “राष्ट्रीय सिफारिश दस्तावेज” में देश की सामूहिक शैक्षणिक आवाज को शामिल किया जा सके।
परिपत्र में यह भी कहा गया है कि सभी महिला कुलपतियों और वरिष्ठ महिला प्रशासकों को विशेष “महिला कुलपति सम्मेलन” में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है, जहां उच्च शिक्षा में नेतृत्व, प्रशासन और लैंगिक संवेदनशील नीतियों पर चर्चा की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, उच्च शिक्षा संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे नई दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए दो-दो संकाय सदस्यों को नामित करें। ये प्रतिनिधि शैक्षणिक सत्रों में भाग लेंगे, अपने संस्थानों की सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेंगे और सम्मेलन के निष्कर्षों को अपने-अपने विश्वविद्यालयों में प्रसारित करेंगे।
इस परिपत्र को लेकर आलोचना भी सामने आई है। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और स्तंभकार अपूर्वानंद ने सोशल मीडिया मंच X पर इस कदम की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठनों का “सक्रिय प्रचार और प्रसार” कर रहा है। सम्मेलन में भागीदारी के लिए जारी परिपत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने लिखा कि “सभी राज्य संस्थान अब आरएसएस के विस्तारित अंग बनते जा रहे हैं।”