केंद्र सरकार ने ₹2,000 तक के UPI लेनदेन और RuPay डेबिट कार्ड भुगतान पर बैंक व पेमेंट कंपनियों को फीस लगाने से रोक दिया है। दो हज़ार से ऊपर वाले भुगतान या लेन-देन पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। इसके बारे में बाद में सरकार स्थिति साफ करेगी।
यूपीआई भुगतान पर कोई फीस नहीं
डिजिटल लेन-देन को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर किसी भी तरह की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष फीस लगाने से रोक दिया है। इसके साथ ही RuPay से जुड़े डेबिट कार्ड के जरिए किए जाने वाले भुगतान को भी फीस से मुक्त रखा गया है।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि तय इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों से भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर बैंक अथवा पेमेंट सिस्टम प्रदाता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई फीस नहीं लगा सकते।
सरकार का यह कदम अगस्त 2026 में संसद से पारित Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 के बाद आया है। इस कानून के जरिए सरकार को यह तय करने का अधिकार दिया गया था कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों को शुल्क से वैधानिक सुरक्षा मिलती रहेगी।
इस कानूनी बदलाव के बाद यह आशंका पैदा हुई थी कि भविष्य में UPI भुगतान पर फीस लगाई जा सकती है। हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उस समय स्पष्ट किया था कि यह बदलाव केवल एक प्रावधान है और आम उपभोक्ताओं को UPI के लिए फीस नहीं देनी होगी।
₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान का क्या होगा?
नई अधिसूचना का मतलब यह नहीं है कि ₹2,000 से अधिक के हर UPI भुगतान पर अब तत्काल फीस लगने लगेगी। सरकार ने फिलहाल ₹2,000 की सीमा तय की है जिसके नीचे UPI लेनदेन शुल्क से प्रोटेक्टेड रहेंगे। अधिक राशि वाले भुगतान के लिए अलग से शुल्क व्यवस्था लागू की जा सकती है।इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू Merchant Discount Rate यानी MDR से जुड़ा है। यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो सरकार के अनुसार यह कुछ तय सीमा से अधिक के व्यापारी लेनदेन तक सीमित हो सकता है। MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान की प्रोसेसिंग के बदले बैंकों या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा व्यापारियों से लिया जाता है।
सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि यदि कुछ बड़े व्यापारिक लेनदेन पर MDR लागू किया जाता है तो इसका बोझ उपभोक्ताओं के बजाय व्यापारियों पर डाला जाएगा। साथ ही व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI भुगतान मुफ्त रहने की बात भी कही गई है। लेकिन हकीकत में ऐसा होगा नहीे। अगर व्यापारियों पर एमडीआऱ लागू किया जाता है तो व्यापारी ग्राहक से वसूलने का कोई न कोई रास्ता निकाल लेगा। जिसमें सामान को महंगे रेट पर बेचना सबसे आसान तरीका होता है।
बैंकों और पेमेंट कंपनियों के लिए आमदनी का नया रास्ता
₹2,000 से ऊपर के कुछ व्यापारी लेनदेन पर संभावित MDR बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स के लिए राजस्व का नया स्रोत बन सकता है। UPI लेनदेन की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में बड़े मूल्य वाले मर्चेंट पेमेंट पर शुल्क व्यवस्था भुगतान कंपनियों के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। दूसरी ओर, छोटे मूल्य के डिजिटल भुगतान मुफ्त रखे जाने से आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।UPI का इस्तेमाल रिकॉर्ड स्तर पर
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा संचालित UPI दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल फास्ट-पेमेंट प्रणालियों में शामिल है। 2025 की IMF रिपोर्ट के अनुसार, लेनदेन की मात्रा के लिहाज से UPI दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल फास्ट-पेमेंट प्रणाली है। अगस्त 2026 में UPI के जरिए 24.51 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि करीब ₹29.82 लाख करोड़ रही। इनमें Google Pay और Walmart के स्वामित्व वाले PhonePe की हिस्सेदारी मिलाकर लगभग तीन-चौथाई मासिक लेनदेन की रही।RuPay डेबिट कार्ड भी शुल्क मुक्त
सरकार ने UPI के साथ RuPay-powered debit cards से होने वाले भुगतान को भी शुल्क से मुक्त रखने का फैसला किया है। यानी अधिसूचना के तहत इन कार्ड भुगतानों पर भी बैंक या संबंधित पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शुल्क नहीं लगा सकेंगे।MDR क्या है और इसका असर किस पर पड़ेगा?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारियों से बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर ले सकते हैं।
UPI को भारत में लंबे समय से Zero-MDR व्यवस्था के तहत चलाया जा रहा है। इसका अर्थ है कि UPI भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों से सामान्य तौर पर MDR नहीं लिया जाता।क्या है पूरे फैसले का मतलब?
सरकार के ताजा फैसले से फिलहाल ₹2,000 तक के UPI भुगतान और RuPay डेबिट कार्ड भुगतान पर शुल्क लगाने की गुंजाइश खत्म हो गई है। हालांकि ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट लेनदेन को लेकर भविष्य में अलग MDR व्यवस्था बनाई जा सकती है। इसलिए उपभोक्ताओं के लिए सबसे अहम बात यह है कि छोटे UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेंगे, जबकि बड़े मूल्य वाले व्यापारिक डिजिटल भुगतान के लिए शुल्क व्यवस्था का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया गया है।
लेकिन तीन सवाल अभी बाकी हैं:
- ₹2,000 से ऊपर के UPI भुगतान पर MDR लगेगा या नहीं?
- अगर लगेगा तो उसकी दर कितनी होगी?
- यह शुल्क किन merchant transactions पर लागू होगा?
सरकार का यह फैसला एक तरफ छोटे डिजिटल भुगतानों को पूरी तरह शुल्क-मुक्त रखने की गारंटी देता है, वहीं दूसरी तरफ UPI के मौजूदा Zero-MDR मॉडल में संभावित बदलाव का संकेत भी देता है। इसका सबसे बड़ा संदेश यही है कि आम उपभोक्ता के छोटे UPI भुगतान फिलहाल मुफ्त रहेंगे, लेकिन बड़े merchant transactions के लिए भविष्य में शुल्क व्यवस्था की संभावना अब पहले से ज्यादा स्पष्ट हो गई है।