जिस लॉरेंस बिश्नोई को बीजेपी-शासित गुजरात में रखकर संरक्षण दिए जाने का आरोप आप जैसी विपक्षी पार्टी लगाती रही है उसकी क़िस्मत अब केंद्र सरकार के हाथ में है। अमेरिकी न्याय विभाग हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड और अन्य आपराधिक आरोपों के बाद बिश्नोई के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।
अमेरिकी न्याय विभाग ने अब आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि वह लॉरेंस बिश्नोई के प्रत्यर्पण की मांग करेगा। अमेरिका ने बिश्नोई के ख़िलाफ़ यह शिकंजा तब कसा है जब हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग ने कनाडा में खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या सहित कई अंतरराष्ट्रीय आपराधिक मामलों में लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं।
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई इस समय गुजरात की जेल में बंद है और उसके खिलाफ भारत में हत्या, रंगदारी, संगठित अपराध समेत कई गंभीर मामले चल रहे हैं। ये वही लॉरेंस बिश्नोई है जिसको लेकर आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में आरोप लगाया था कि जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को आधिकारिक संरक्षण प्राप्त है। पिछले महीने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ पंजाब राज्य व्यापारी आयोग की बैठक में भाग लेने के बाद जालंधर में एक सभा को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने आरोप लगाया था, "एकमात्र गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई बचा है। वह साबरमती जेल में बैठा है और ईडी पार्टी का 'दामाद' है। वह उनके संरक्षण में है।"
बीजेपी इस आरोप को खारिज करती रही है और कहती है कि कानूनी प्रक्रिया चल रही है। हालाँकि, सोशल मीडिया पर उसके कुछ समर्थकों ने उसे 'देशभक्त' या 'खालिस्तानी-विरोधी' बताकर सपोर्ट किया। लेकिन ये उनकी व्यक्तिगत राय है, पार्टी की आधिकारिक लाइन नहीं। विपक्षी समर्थक भी आरोप लगाते हैं कि बीजेपी बिश्नोई को 'बचाती' है। सोशल मीडिया पर इन बहसों के बीच अब प्रत्यर्पण की ख़बर से नई हलचल शुरू हो गई है।
अमेरिकी अधिकारी ने क्या कहा?
बिश्नोई के प्रत्यर्पण की मांग की ख़बर की पुष्टि अमेरिकी अधिकारी ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' से इसके सवालों के जवाब में की है। अमेरिका के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया के यूएस अटॉर्नी ऑफिस के पब्लिक अफेयर्स अधिकारी सियारन मैकएवॉय ने ईमेल के ज़रिए कहा, 'लॉरेंस बिश्नोई फिलहाल भारत में जेल में बंद है। हम उसका प्रत्यर्पण अमेरिका लाने की मांग करेंगे। हालांकि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया लंबी होती है और इसमें कई साल लग सकते हैं।'पहली बार अमेरिकी प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से साफ़ किया है कि वह बिश्नोई को अमेरिका लाने की क़ानूनी प्रक्रिया शुरू करेगा। लेकिन क्या प्रत्यर्पण इतना आसान होगा और सरकार इतनी आसानी से उसे सौंप देगी?
कैसे भेजी जाएगी अमेरिकी मांग?
प्रक्रिया के अनुसार अमेरिकी न्याय विभाग औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध तैयार करेगा। इसे अमेरिकी विदेश विभाग भारत सरकार को भेजेगा। इसके बाद भारत का विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और सीबीआई जैसी एजेंसियां मिलकर जांच करेंगी कि अनुरोध भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि और भारतीय कानूनों के अनुरूप है या नहीं। अंतिम निर्णय भारत सरकार को लेना होगा।
क्या प्रत्यर्पण इतना आसान होगा?
भारत और अमेरिका के बीच 1997 की प्रत्यर्पण संधि लागू है। इसके साथ ही भारत में प्रत्यर्पण अधिनियम 1962 के तहत ऐसी मांगों पर फैसला लिया जाता है। हालाँकि लॉरेंस बिश्नोई का मामला आसान नहीं माना जा रहा क्योंकि वह पहले से भारत की न्यायिक हिरासत में है। उसके खिलाफ भारत में कई हत्या, रंगदारी और संगठित अपराध के मुकदमे लंबित हैं।
भारतीय अदालतों में इन मामलों की सुनवाई पूरी होना और संभावित सजा काटना भी कानूनी रूप से अहम माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में भारत यह तर्क दे सकता है कि पहले देश के भीतर लंबित मुक़दमों का निपटारा होगा, उसके बाद ही प्रत्यर्पण पर विचार किया जाएगा।हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड में भी नाम
बहरहाल, कुछ दिन पहले अमेरिकी न्याय विभाग ने 'ऑपरेशन हार्डबॉल' के तहत बड़ा अभियान चलाया था। अमेरिका, कनाडा और यूरोप की एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में 37 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया और 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
इस चार्जशीट में लॉरेंस बिश्नोई और उसके करीबी सहयोगी गोल्डी बराड़ पर कनाडा में खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साज़िश रचने का आरोप लगाया गया है। एफबीआई ने गोल्डी बराड़ की गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना पर 50 हजार डॉलर के इनाम की भी घोषणा की है।
किन-किन गैंगस्टरों के नाम शामिल?
अमेरिकी आरोपपत्र में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ के अलावा तीन अन्य बड़े अपराधियों का भी नाम शामिल है। इनमें असम की जेल में बंद जग्गू भगवानपुरिया, कनाडा में मौजूद रविंदर सिंह धांधा और इनके गिरोहों से जुड़े कई अन्य आरोपी शामिल हैं। अमेरिकी एजेंसियों का दावा है कि ये गिरोह कई देशों में फैले संगठित अपराध नेटवर्क का संचालन करते हैं।रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि रविंदर धांधा गिरोह से जुड़े आरोपियों की सुनवाई 31 अगस्त को लॉस एंजिलिस की अदालत में प्रस्तावित है। जग्गू भगवानपुरिया गिरोह से जुड़े मामलों की अगली तारीख 1 सितंबर तय की गई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इन तारीखों में बदलाव होने की संभावना है।
गुजरात की जेल में बंद है बिश्नोई
लॉरेंस बिश्नोई को 2014 में गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान में वह गुजरात की जेल में बंद है। विपक्षी दल समय-समय पर आरोप लगाते रहे हैं कि बीजेपी शासित गुजरात में उसे विशेष संरक्षण दिया जा रहा है। हालाँकि सरकार ने इन आरोपों को हमेशा खारिज किया है। अब अमेरिका की प्रत्यर्पण मांग आने के बाद यह मामला केवल आपराधिक नहीं बल्कि कूटनीतिक और कानूनी महत्व का भी बन गया है।
फ़िलहाल अमेरिका ने प्रत्यर्पण की मंशा साफ़ कर दी है, लेकिन आधिकारिक अनुरोध भेजने की समय-सीमा तय नहीं हुई है। माना जा रहा है कि भारत में लंबित मुकदमों और दोनों देशों के बीच कानूनी प्रक्रियाओं को देखते हुए लॉरेंस बिश्नोई के प्रत्यर्पण पर अंतिम फैसला आने में काफी समय लग सकता है। तब तक वह भारत की न्यायिक हिरासत में ही रहेगा।