रिपोर्ट के अनुसार, US की दो संस्थाओं ने आरएसएस को 2020 से 2024 के बीच 11.78 करोड़ डॉलर के डोनेशन की जानकारी दी। इसमें से कम से कम 2.44 करोड़ डॉलर डोनर-एडवाइज्ड फंड (DAF) संचालित करने वाले 34 संगठनों से आए। पूरा मामला जानियेः
अमेरिका से आरएसएस से जुड़े संगठनों को जबरदस्त फंडिंग हुई है। इसका खुलासा खोजपूर्ण पत्रकारिता करने वाली नीदरलैंड की मीडिया वेबसाइट Bellingcat ने किया है। अमेरिका में चंदा देने वाले ऐसे फंड, जिनके जरिए दानदाता अपनी पहचान सार्वजनिक किए बिना परोपकारी संस्थाओं को पैसा दे सकते हैं, आरएसएस की संस्थाओं तक करोड़ों डॉलर पहुंचाने का जरिया बने हैं। Bellingcat की एक पड़ताल के मुताबिक, अमेरिका में रजिस्टर्ड दो एनजीओ को वर्ष 2020 से 2024 के बीच ऐसे फंडों से कम से कम 2.44 करोड़ डॉलर (19 अक्टूबर को भारत में रेट- 231.36 करोड़ रुपये) मिले।
जांच में जिन दो संस्थाओं का उल्लेख किया गया है, वे हैं Ekal Vidyalaya Foundation of USA Inc. (Ekal USA) और Sewa International Inc. (Sewa USA)। Bellingcat ने अमेरिकी गैर-लाभकारी संस्थाओं की अनिवार्य टैक्स फाइलिंग, Form 990, के साथ-साथ संगठनों की वेबसाइटों, प्रकाशनों और उनके पदाधिकारियों के बयानों की स्टडी के बाद इस रिपोर्ट को तैयार किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों संस्थाओं ने 2020 से 2024 के बीच 11.78 करोड़ डॉलर के योगदान और अनुदान प्राप्त होने की जानकारी दी। इसमें से कम से कम 2.44 करोड़ डॉलर डोनर-एडवाइज्ड फंड (DAF) संचालित करने वाले 34 संगठनों से आए। यह दोनों संस्थाओं की कुल घोषित प्राप्तियों का लगभग 20.7 प्रतिशत था। Bellingcat का कहना है कि वास्तविक रकम इससे अधिक भी हो सकती है, क्योंकि कुछ आंशिक वित्तीय वर्षों की फाइलिंग को गणना में शामिल नहीं किया गया।
डोनर-एडवाइज्ड फंड क्या हैं और इनके जरिए पैसा कैसे पहुंचता है?
डोनर-एडवाइज्ड फंड यानी DAF अमेरिका में दान देने की एक व्यवस्था है। इसके तहत कोई व्यक्ति किसी फंड को पैसा देता है और उसे टैक्स संबंधी लाभ मिल सकता है। इसके बाद वह यह सुझाव दे सकता है कि पैसा किस धर्मार्थ संस्था या एनजीओ को दिया जाए। इन फंडों का संचालन गैर-लाभकारी प्रायोजक संस्थाएं करती हैं। ये संस्थाएं अमेरिकी टैक्स विभाग के सामने Form 990 दाखिल करती हैं, जिसमें अनुदान पाने वाली संस्थाओं और दी गई रकम का विवरण उपलब्ध हो सकता है। लेकिन आम तौर पर इन दस्तावेजों से यह पता नहीं चलता कि मूल दानदाता कौन था। इस तरह, सार्वजनिक रिकॉर्ड से पैसा पाने वाली संस्था की पहचान तो हो सकती है, लेकिन पैसा देने वाले मूल व्यक्ति या स्रोत की पहचान छिपी रह सकती है।
Bellingcat रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 से 2024 के दौरान Ekal USA और Sewa USA को DAF चलाने वाले 34 संगठनों से कम से कम 2.44 करोड़ डॉलर मिले। इनमें तीन प्रमुख फंड-संचालक थे- Fidelity Charitable, American Online Giving Foundation (AOGF) और Charles Schwab से संबद्ध DAFgiving360। रिपोर्ट के अनुसार, इन तीनों ने मिलकर दोनों संस्थाओं को दिए गए DAF अनुदानों में लगभग 2 करोड़ डॉलर, यानी 81.7 प्रतिशत, उपलब्ध कराए। इस व्यवस्था पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि दान की मूल राशि का स्रोत सार्वजनिक रिकॉर्ड से हमेशा पता नहीं चलता और विशेषज्ञों के अनुसार, DAF के जरिए दिए गए अनुदानों पर कुछ अन्य प्रकार के धर्मार्थ अनुदानों की तुलना में रेगुलेटरी निगरानी कम हो सकती है।
एकल विद्यालय फाउंडेशन: पांच साल में 8.3 मिलियन डॉलर DAF से मिले
अमेरिका के टेक्सास राज्य के ह्यूस्टन में स्थित Ekal USA ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बच्चों को प्राइमरी शिक्षा और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को अपना उद्देश्य बताता है। संस्था की वेबसाइट के अनुसार, इसका काम भारत में एकल विद्यालय परियोजना के विस्तार से जुड़ा है।
Bellingcat की जांच में इस संस्था के RSS और विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े वैचारिक एवं ऐतिहासिक संबंधों के संकेत सामने आए।
स्थापना और पृष्ठभूमि: Vishwa Hindu Parishad of America (VHPA) के प्रवक्ता श्याम तिवारी ने Bellingcat को बताया कि Ekal USA की शुरुआत 1990 के दशक के अंत में VHPA के एक कार्यक्रम के रूप में हुई थी और 2000 के शुरुआती वर्षों में इसे स्वतंत्र संस्था बनाया गया। VHPA की वेबसाइट पर इसकी स्थापना 2002 में होने का उल्लेख है।
RSS से संबंधों के संकेत: VHPA की पत्रिका में 2017 में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, इसके दिवंगत संस्थापक महेश मेहता को 10 वर्ष की उम्र से RSS ने प्रशिक्षण दिया था। लेख में यह भी बताया गया कि RSS के पूर्व प्रमुख की सलाह पर अमेरिका में VHP स्थापित करने की पहल हुई थी।
VHP का पक्ष: भारत में VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इसे एक स्वतंत्र संगठन बताया, जो कभी-कभी VHPA के साथ विचारधारा साझा करता है। उन्होंने VHP को RSS का स्वतंत्र हिस्सा और उसका वैचारिक सहयोगी भी बताया।
RSS नेतृत्व की भागीदारी: RSS प्रमुख मोहन भागवत कई वर्षों से एकल विद्यालय के कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं। Bellingcat के मुताबिक, ऐसे कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी के प्रमाण 2014 से मिलते हैं और जांच में मई 2026 के एक कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया है।
Ekal USA को कितना पैसा मिला?
संस्था के अमेरिकी टैक्स रिकॉर्ड के मुताबिक, 2020 से 2024 के बीच उसे योगदान और अनुदान के रूप में 4.84 करोड़ डॉलर से अधिक मिले। इनमें से कम से कम 83 लाख डॉलर DAF के माध्यम से आए। इसी अवधि में Ekal USA ने 3.37 करोड़ डॉलर विदेशी अनुदान के रूप में दिए। संस्था की टैक्स फाइलिंग के अनुसार, यह पूरी रकम भारत में एकल विद्यालय परियोजना के लिए इस्तेमाल की गई। इसी दौरान अमेरिका में अन्य संस्थाओं या व्यक्तियों को घरेलू अनुदान देने की कोई रकम दर्ज नहीं थी।एकल विद्यालयों की भूमिका पर विवाद
रिपोर्ट में एकल विद्यालय आंदोलन को लेकर पहले प्रकाशित कुछ आलोचनात्मक रिपोर्टों का भी उल्लेख है। इन रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि कुछ विद्यालयों के जरिए गरीब और वंचित समुदायों के बच्चों तथा महिलाओं के बीच हिंदुत्ववादी विचारधारा का प्रचार किया जाता है। कुछ आलोचनात्मक रिपोर्टों में मुसलमानों और ईसाइयों के प्रति नकारात्मक धारणाएं फैलाने के आरोप भी लगाए गए हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आरोप हैं, जिन्हें Bellingcat ने अपनी पड़ताल में कोट किया है; इन्हें सभी विद्यालयों के बारे में स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।Ekal USA ने Bellingcat के इन आरोपों और RSS के साथ अपने संबंधों पर पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया। हालांकि, संस्था के FAQ पेज पर कहा गया है कि उसके विद्यालयों में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाती और जाति, धार्मिक पहचान या भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। भारत में एकल विद्यालय संस्था ने भी Bellingcat के सवालों का जवाब नहीं दिया।
सेवा इंटरनेशनल: 16 मिलियन डॉलर से अधिक DAF अनुदान
Bellingcat की जांच में दूसरी प्रमुख संस्था Sewa International Inc. है, जिसे रिपोर्ट में Sewa USA कहा गया है। यह भी ह्यूस्टन में स्थित है और खुद को हिंदू आस्था पर आधारित मानवीय सेवा करने वाला गैर-लाभकारी संगठन बताता है।
- संस्था की जनसंपर्क मामलों की उपाध्यक्ष राखी इसरानी ने Bellingcat को ईमेल के जरिए बताया कि Sewa USA, RSS की शाखा या संबद्ध संस्था के रूप में काम नहीं करता और राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेता।
- हालांकि, Bellingcat ने संस्था की वेबसाइट, पुराने सोशल मीडिया पोस्ट और प्रकाशनों में ऐसे संदर्भ पाए, जिनसे RSS या RSS से जुड़े संगठनों के साथ ऐतिहासिक अथवा वैचारिक संबंध होने के संकेत मिलते हैं।
RSS और सेवा भारती से संबंधों के संकेत
- 2022 में Sewa USA ने अपनी वेबसाइट पर एक लेख दोबारा प्रकाशित किया था, जिसमें Sewa International को RSS से संबंध रखने वाला अमेरिका स्थित धर्मार्थ संगठन बताया गया था।
- 2023 में अपने संस्थापक सदस्य वेद प्रकाश नंदा के निधन पर जारी बयान में संस्था ने लिखा कि वे RSS के आदर्शों में गहराई से रचे-बसे थे।
- 2021 और 2024 में प्रकाशित दो ब्लॉग पोस्टों में स्वयंसेवकों ने RSS द्वारा संचालित गतिविधियों को अपने सेवा कार्य से जुड़ने की प्रेरणा बताया।
- Sewa USA ने भारत में सेवा भारती (Sewa Bharati) की गतिविधियों का कई बार उल्लेख किया है। 2014 में उसने सेवा भारती को अपनी सहयोगी संस्था और 2022 में पूर्वांचल स्थित इसकी इकाई को साझेदार संगठन बताया था।
- ओडिशा में 2023 की रेल दुर्घटना के बाद राहत कार्यों में भारत स्थित साझेदार संगठनों के स्वयंसेवकों की भागीदारी का उल्लेख किया गया। सितंबर 2025 में महाराष्ट्र की बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए चलाए गए एक अभियान में भी सेवा भारती के 100 से अधिक स्वयंसेवकों द्वारा राहत कार्य किए जाने की बात कही गई।
Bellingcat के मुताबिक, RSS की वेबसाइट पर सेवा भारती की वेबसाइट का सीधा लिंक भी है। RSS की 2016 की वार्षिक रिपोर्ट में सेवा भारती का उल्लेख सेवा विभाग के अंतर्गत किया गया था। दिसंबर 2024 में सेवा भारती की वेबसाइट पर प्रकाशित एक कार्यक्रम संबंधी लेख में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भाषण का उल्लेख था। लेख के अनुसार, उन्होंने सेवा भारती की स्थापना में RSS नेताओं की भूमिका पर बात की थी। कार्यक्रम में RSS के संयुक्त महासचिव आलोक कुमार भी शामिल हुए थे। इन संदर्भों के बावजूद Sewa USA ने कहा कि सेवा भारती के संचालन या प्रशासन में उसकी कोई भूमिका नहीं है। सेवा भारती ने Bellingcat के सवालों का जवाब नहीं दिया।
अमेरिकी कानून में DAF पर निगरानी को लेकर सवाल
Bellingcat की पड़ताल का एक महत्वपूर्ण पहलू अमेरिका में धर्मार्थ अनुदानों की निगरानी से जुड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार, DAF के जरिए पैसा देने की व्यवस्था में कुछ कानूनी सीमाएं हैं, लेकिन सार्वजनिक धर्मार्थ संस्था के रूप में पंजीकृत संगठनों को अनुदान देते समय निगरानी का स्तर सीमित हो सकता है। शिकागो की लोयोला यूनिवर्सिटी के कानून विशेषज्ञ सैमुअल ब्रनसन ने Bellingcat से कहा कि DAF को निजी फाउंडेशन के बजाय सार्वजनिक धर्मार्थ संस्थाओं के रूप में माना जाता है, इसलिए अमेरिकी आंतरिक राजस्व सेवा (IRS) की निगरानी कुछ मामलों में कम होती है।नोट्रे डेम यूनिवर्सिटी के गैर-लाभकारी संस्थाओं के विशेषज्ञ लॉयड हितोशी मेयर ने भी बताया कि अमेरिकी कर कानून के तहत 501(c)(3) दर्जा रखने वाली संस्था को अनुदान दिए जाने पर उसे धर्मार्थ उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किए जाने की धारणा के आधार पर अतिरिक्त निगरानी की जरूरत सीमित हो सकती है। इसका अर्थ यह नहीं है कि DAF के जरिए होने वाले सभी लेनदेन बिना किसी नियम के चलते हैं। इन फंडों के प्रायोजकों पर कुछ कानूनी प्रतिबंध लागू होते हैं और वे किसी संगठन को अनुदान देने से इनकार भी कर सकते हैं।
RSS की जवाबदेही और राजनीतिक संदर्भ
RSS भारत में एक पंजीकृत संस्था के रूप में काम नहीं करता और उसका औपचारिक सदस्यता ढांचा भी सामान्य संगठनों जैसा नहीं है। संगठन खुद को समान विचारधारा वाले व्यक्तियों का समूह बताता है। इस कारण उससे संबंधित संगठनों के साथ उसके औपचारिक संबंधों का आकलन करना कई बार जटिल हो जाता है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले की मानवविज्ञानी और दक्षिण एशिया अध्ययन विशेषज्ञ डॉ. अंगना पी. चटर्जी ने Bellingcat से कहा कि RSS के संसाधनों, वित्त, प्रभाव और गतिविधियों पर स्वतंत्र निगरानी नहीं है। उनके अनुसार, संगठन की व्यापक पहुंच और प्रभाव को देखते हुए जवाबदेही तथा सार्वजनिक जांच का अभाव गंभीर सवाल पैदा करता है।रिपोर्ट में RSS की राजनीतिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख है। इसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) का वैचारिक आधार माना जाता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके पूर्व कार्यकर्ता रहे हैं। RSS की हिंदू राष्ट्र संबंधी विचारधारा पर भारत और विदेशों में बहस होती रही है। Bellingcat के अनुसार, अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी द्विदलीय आयोग ने हाल में अमेरिकी सरकार से RSS पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि लगभग 100 अमेरिकी सांसदों और राजनेताओं ने RSS से जुड़ी संस्थाओं से धन नहीं लेने की प्रतिबद्धता जताई थी। RSS ने Bellingcat के कई अनुरोधों के बावजूद प्रकाशन के समय तक इन सवालों का जवाब नहीं दिया था।
RRS से जुड़ी दोनों संस्थाओं ने इसी अवधि में भारत और दक्षिण एशिया में बड़े पैमाने पर पैसे खर्च किये। Ekal USA की टैक्स फाइलिंग में 3.37 करोड़ डॉलर के विदेशी अनुदान का पूरा इस्तेमाल भारत में एकल विद्यालय परियोजना के लिए बताया गया, जबकि Sewa USA ने दक्षिण एशिया में 2.97 करोड़ डॉलर के विदेशी अनुदान दर्ज किए। DAF व्यवस्था में मूल दानदाता की पहचान सार्वजनिक रिकॉर्ड से पता नहीं चल सकती। इससे वित्तीय पारदर्शिता और अनुदानों की निगरानी को लेकर सवाल उठते हैं।