केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की कथित मुलाकात को लेकर भारतीय राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि एपस्टीन मर चुका है। सोशल मीडिया पर दोनों की एक तस्वीर सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने पुरी से सवाल पूछे हैं। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए पूछा कि पुरी एपस्टीन से किसका संदेश लेकर मिले थे। उन्होंने कहा कि यह तो शुरुआत है और आगे इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं। एपस्टीन के साथ हरदीप पुरी की फोटो अमेरिका जस्टिस डिपार्टमेंट ने जारी की है।
विवाद के केंद्र में एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज, पुरी के साथ उनकी कथित मुलाकातें और इस संबंध में पहले दिए गए पुरी के बयान हैं। वरिष्ठ पत्रकार एमके वेणु ने इस मुद्दे पर एक ट्वीट किया है। उससे पूरा मामला समझ में आ जाता है। वेणु ने लिखा है- अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप लगातार मोदी को असमंजस में रखे हुए हैं। अब जब रुबियो कई समझौतों को आगे बढ़ाने के लिए भारत में हैं, तो अमेरिकी न्याय विभाग ने मंत्री हरदीप पुरी की एपस्टीन के साथ तस्वीरें जारी की हैं। मोदी सरकार को इससे क्या गहरा संदेश मिलता है? क्या कोई बता सकता है? वेणु के ट्वीट पर बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री सुब्रह्मण्यम स्वामी ने लिखा है- मोदी हरदीप के पालक की भूमिका में उलझे हुए हैं। इसलिए हमारे प्रधानमंत्री को भारतीय मीडिया के सामने खुलकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने हरदीप के साथ क्या किया। मैं अदालत जा सकता हूं, लेकिन भाजपा के लिए बेहतर होगा कि मोदी खुद अपना पक्ष रखें।

संजय राउत ने पूछा- पुरी एपस्टीन से किसका संदेश लेकर मिले थे?

संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन की कथित मुलाकात पर सवाल उठाए। राउत ने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए पूछा कि अगर केंद्रीय मंत्री पुरी एपस्टीन से अकेले मिले थे, तो वह किसका संदेश लेकर गए थे। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या वह संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से था।
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राउत ने अपनी पोस्ट में कहा कि यह तो शुरुआत है और आगे क्या सामने आता है, इस पर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने इसी संदर्भ में सत्ता परिवर्तन यानी 'रिजीम चेंज' की बात भी कही। रिपोर्ट के अनुसार, राउत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह मामला केवल सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में इसकी चर्चा हो रही है। उन्होंने एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के सार्वजनिक होने और पुरी के साथ उनकी कथित मुलाकातों की तस्वीरों का हवाला देते हुए सवाल किया कि आखिर इस मुलाकात का उद्देश्य क्या था।

कांग्रेस नेता श्रीनिवास ने भारत-यूएस ट्रेड समझौते से जोड़ा मामला

कांग्रेस नेता श्रीनिवास बीवी ने भी इस विवाद को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने हरदीप सिंह पुरी की कथित तस्वीरों के सामने आने के समय और अमेरिकी विदेश मंत्री की मुंबई यात्रा के बीच संबंध की ओर इशारा किया। श्रीनिवास ने एक्स पर अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि अमेरिकी विदेश मंत्री के मुंबई पहुंचने के समय ही अमेरिकी न्याय विभाग की फाइलों से पुरी की तस्वीरें सामने आने का क्या कोई संबंध है? उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में यह भी पूछा कि क्या भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की तकनीकी पेचीदगियों को सुलझाने के लिए कोई वीडियो भी सामने आने वाला है। उनकी टिप्पणी में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक सवाल उठाए गए। हालांकि, रिपोर्ट में ऐसा कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे यह स्थापित हो कि तस्वीरों के सामने आने और व्यापार समझौते के बीच कोई संबंध है।

अभिजीत दिपके ने पुरी के पुराने बयान पर उठाया सवाल

सीजेपी कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने भी सोशल मीडिया पर कथित तस्वीर साझा करते हुए हरदीप सिंह पुरी के पुराने बयान को लेकर सवाल किया। दिपके ने पूछा कि क्या पुरी ने पहले यह दावा नहीं किया था कि एपस्टीन के साथ उनकी कोई निजी मुलाकात नहीं हुई थी? इस सवाल के बाद विवाद का केंद्र केवल तस्वीर नहीं, बल्कि पुरी द्वारा एपस्टीन से अपने संपर्कों के बारे में पहले दी गई सफाई भी बन गई है।

हरदीप सिंह पुरी पहले क्या सफाई दे चुके हैं?

इस विवाद की पृष्ठभूमि में फरवरी 2026 में हरदीप सिंह पुरी का दिया गया बयान महत्वपूर्ण है। उस समय उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा एपस्टीन फाइलों को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया था। पुरी ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एपस्टीन फाइलों से कोई संबंध नहीं है और इनसे जुड़े आरोप निराधार हैं। एपस्टीन से अपने संपर्कों की सफाई देते हुए पुरी ने कहा था कि वह नौ वर्षों के दौरान कुल चार बार एपस्टीन से मिले थे।
पुरी के अनुसार, वह 2009 में न्यूयॉर्क गए थे और 2017 तक उनकी एपस्टीन से चार मुलाकातें हुई थीं। उन्होंने बताया था कि वह इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) के सदस्य थे और संयुक्त राष्ट्र की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह देखने के लिए नियुक्त किए गए थे कि संयुक्त राष्ट्र अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कितना उपयुक्त है। पुरी ने यह भी कहा था कि एपस्टीन ने उनसे कहा था कि उनका नाम दिलचस्प जगहों पर है और उन्होंने इस बारे में एपस्टीन को एक नोट भेजकर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि एपस्टीन के खिलाफ आरोप यौन संबंधों के लिए एहसान, बच्चों के यौन शोषण और अन्य गलत कामों से जुड़े थे तथा उनका इन गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं था। पुरी ने यह भी कहा था कि एपस्टीन के साथ उनकी कोई स्वतंत्र रूप से आयोजित निजी मुलाकात नहीं हुई थी।

राजनीतिक विवाद क्यों बढ़ रहा है?

इस मामले में तीन प्रमुख राजनीतिक सवाल सामने आए हैं:
  • मुलाकातों का उद्देश्य: विपक्ष जानना चाहता है कि पुरी और एपस्टीन के बीच संपर्क किस संदर्भ में हुए थे।
  • पहले दिए गए बयान: पुरी द्वारा चार मुलाकातों की बात स्वीकार करने और निजी मुलाकात से इनकार करने के बीच के संदर्भ को लेकर विपक्ष स्पष्टीकरण चाहता है।
  • भारत-अमेरिका संबंध: कांग्रेस नेता श्रीनिवास बीवी ने इस विवाद को अमेरिकी विदेश मंत्री की मुंबई यात्रा और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के संदर्भ में उठाया है।
हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन की कथित मुलाकात को लेकर उठा विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया है। संजय राउत ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछे हैं, कांग्रेस नेता श्रीनिवास बीवी ने व्यापार समझौते के संदर्भ में टिप्पणी की है और सीजेपी कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने पुरी के पुराने बयान पर सवाल उठाया है। पुरी पहले एपस्टीन से नौ वर्षों में चार बार मिलने की बात कह चुके हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज कर चुके हैं। अब इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि उपलब्ध दस्तावेज और प्रमाण वास्तव में क्या दिखाते हैं। राजनीतिक सवालों और आरोपों के बीच अंतिम निष्कर्ष तथ्यों तथा स्वतंत्र रूप से सत्यापित साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।