यूएस राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद देश में विरोध तेज हो गया है। नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष खरगे समेत विपक्ष के कई नेताओं ने पीएम मोदी पर ट्रेड डील को लेकर जल्दबाजी में 'सरेंडर' करने का आरोप लगाया है।
पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ
टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भारत में हलचल मचा दी है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या मोदी सरकार अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतज़ार नहीं कर सकती । सवाल ये भी है कि आखिर इतनी जल्दी क्या थी डील करने की। विपक्ष ने मोदी सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं और कहा है कि एक बार फिर पीएम मोदी ट्रंप के आगे झुक जाएंगे ।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने जो टैरिफ लगाया है वो बिल्कुल गलत है । अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 के फैसले से कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1977 के IEEPA कानून का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर आयात शुल्क लगाकर अपनी कानूनी सीमा पार की। जिसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने नया 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है। ट्रंप ने कहा कि अब ये टैक्स नए कानून के तहत लगाया जाएगा। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ नाराज़गी जाहिर की और कहा कि कुछ जज विदेशी ताकतों के असर में आ गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे जज देशभक्त नहीं हैं और संविधान के प्रति वफादार नहीं हैं। भारत में अभी तक यह साफ नहीं है कि भारतीय सामानों पर 10 फीसदी या फिर 18 फीसदी टैक्स लगेगा।
भारत के विपक्षी दल भड़के, मोदी सरकार पर सवाल
ट्रंप के इसी नए फैसले पर विपक्ष भड़का हुआ है । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। राहुल ने एक्स पर लिखा कि "प्रधानमंत्री समझौता कर चुके हैं। उनका विश्वासघात अब उजागर हो चुका है। उन्होंने कहा, "पीएम दोबारा बातचीत नहीं कर सकते। वह फिर से सरेंडर कर देंगे."
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पूछा ये बिना समझ की विदेश नीति है या फिर एकतरफा आत्मसमर्पण? मोदी सरकार ने अमेरिका के यूएस सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ पर फैसले का इंतज़ार क्यों नहीं किया और इतनी जल्दी एक ऐसे “ट्रैप डील” में क्यों फंस गई, जिसमें भारत से बड़े समझौते करवा लिए गए? खरगे ने आगे दो सवाल भी पूछे और लिखा कि ये सवाल सीधी मोदी जी से पूछे जा रहे हैं कि किसने या किस दबाव में आपने भारत के राष्ट्रीय हित और स्वतंत्र फैसले लेने की ताकत से समझौता किया? क्या यह एपस्टीन फाइल्स का दबाव था? क्या भारत सरकार अपनी गहरी नींद से जागेगी और एक ऐसा निष्पक्ष व्यापार समझौता करेगी जो 140 करोड़ भारतीयों के आत्मसम्मान और हमारे किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के हितों की रक्षा करे?
मोदी 18 दिन इंतज़ार नहीं कर सकते थेः जयराम रमेश
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि आख़िर ऐसी क्या मजबूरी थी कि प्रधानमंत्री मोदी ने सुनिश्चित किया कि 2 फरवरी 2026 की रात राष्ट्रपति ट्रंप ही भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा करें? यदि पीएम मोदी अपनी नाज़ुक छवि बचाने को लेकर इतने व्यग्र न होते और केवल 18 दिन और प्रतीक्षा कर लेते, तो भारतीय किसान इस पीड़ा और संकट से बच सकते थे और भारत की संप्रभुता भी सुरक्षित रहती। जयराम रमेश का कहना है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील दरअसल एक ऐसी कठिन परीक्षा बन गई है, जिसका सामना देश को प्रधानमंत्री की व्यग्रता और आत्मसमर्पण के कारण करना पड़ रहा है।
शिवसेना यूबीटी की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर लिखा कि अमेरिकी कोर्ट के दखल के बाद चीन भी दुनिया के बाकी देशों की तरह अब 10% टैरिफ पर आ गया है, लेकिन चीन ने रूसी तेल खरीदने का अधिकार नहीं छोड़ा है। इसलिए वह बिना किसी नुकसान के सस्ता रूसी तेल खरीद रहा है। वहीं भारत भी अब 10% टैरिफ की श्रेणी में आ गया है, लेकिन भारत के पास रूसी तेल खरीदने की कोई ताकत (लेवरेज) नहीं बची है, क्योंकि हमने वह अधिकार एक “ऐतिहासिक 18% टैरिफ” के बदले छोड़ दिया। यही है भारत के ट्रेड मिनिस्टर की “अक्लमंदी”।
टैरिफ पर आई इस नई खबर पर आम आदमी पार्टी ने भी मोदी सरकार को जमकर घेरा। पार्टी ने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा यह फैसला भारत-अमेरिका Trade Deal के तहत हुआ है और मोदी सरकार इसे जीत बता रही है। यह ट्रेड डील भारतीय व्यापारियों और किसानों का Death Warrant है लेकिन मोदी सरकार इसका जश्न मना रही है।
इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक सरकार की तरफ से ट्रंप के इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है । बहरहाल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप के नए टैरिफ ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। जिनका जवाब सरकार को देना होगा ।