वंदे मातरम के पूर्ण गायन को लेकर छिड़ा विवाद सोमवार को भी थमता नजर नहीं आया, जब कांग्रेस ने गोवा में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत की केवल पहली दो कड़ियां गाईं। इस कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद थे। यह घटनाक्रम संसद द्वारा हाल ही में पारित एक कानून को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच सामने आया है, जिसमें वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समकक्ष दर्जा दिया गया है और इसके पूर्ण गायन को अनिवार्य बनाया गया है।
इस गीत को केवल दो कड़ियों तक सीमित रखने के फैसले से संकेत मिलता है कि कांग्रेस आगामी पार्टी कार्यक्रमों में भी यही रुख बरकरार रख सकती है। कांग्रेस ने अपने इस फैसले का बचाव करते हुए 1937 के एक प्रस्ताव का हवाला दिया है, जिसे रवींद्रनाथ टैगोर की सिफारिश के बाद अपनाया गया था। इस प्रस्ताव में गीत की बाद की कड़ियों में मौजूद धार्मिक बिंबों से बचते हुए केवल पहली दो कड़ियां गाने का समर्थन किया गया था।

भाजपा कार्यकर्ताओं ने खड़गे के काफिले को रोकने की कोशिश की

सोमवार को दिन में इससे पहले, जब खड़गे सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए गोवा पहुंचे, तो भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले को रोकने की कोशिश की। कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पर 15 अगस्त को राष्ट्रीय गीत का अनादर करने का आरोप लगाया। भाजपा युवा मोर्चा के गोवा अध्यक्ष तुषार केलकर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने खड़गे के आगमन के दौरान गोवा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, डाबोलिम के बाहर प्रदर्शन किया।
ताज़ा ख़बरें
केलकर ने कांग्रेस अध्यक्ष पर राष्ट्रीय गीत के प्रति "अनादरपूर्ण व्यवहार" दिखाने का आरोप लगाया और खड़गे व उनकी पार्टी से माफी की मांग की। उन्होंने कांग्रेस पर वंदे मातरम का सम्मान न करने का आरोप लगाते हुए पार्टी को "देश-विरोधी" भी करार दिया। प्रदर्शन जारी रहने के बीच खड़गे हवाई अड्डे से लगभग 10 किलोमीटर दूर वेर्णा में आयोजित सार्वजनिक सभा के लिए रवाना हुए। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और उनके काफिले को रोकने का प्रयास किया, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया।

80वें स्वतंत्रता दिवस पर शुरू हुआ था विवाद

कांग्रेस का पहली दो कड़ियां गाने का यह फैसला उस विवाद के बाद आया है, जिसमें भाजपा ने नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सोनिया गांधी, राहुल गांधी और खड़गे पर वंदे मातरम के प्रति "घोर अनादर" दिखाने का आरोप लगाया था।
गीत के दूसरी कड़ी के आगे जारी रहने पर सोनिया गांधी को इशारा करते हुए देखा गया था, जिसके बाद बीजेपी ने आरोप लगाया कि उन्होंने गीत के पूर्ण संस्करण पर आपत्ति जताई थी। कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज किया और कहा कि सोनिया गांधी राष्ट्रीय गीत पर आपत्ति नहीं जता रही थीं, बल्कि खड़गे के लिए कुर्सी मंगवाने का इशारा कर रही थीं।

वंदे मातरम को लेकर भाजपा की मुहिम

हाल ही में पारित कानून के तहत, राष्ट्रीय गीत का अपमान करने या इसके गायन में बाधा डालने पर तीन साल तक की कैद हो सकती है। 
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सरकार वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर वर्षभर चलने वाले समारोहों का आयोजन कर रही है। पिछले कुछ महीनों में केंद्र सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत को बढ़ावा देने के प्रयास लगातार तेज किए हैं। फरवरी में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया था कि जहां भी राष्ट्रगान जन गण मन बजाया जाता है, वहां वंदे मातरम का गायन या वादन भी अनिवार्य रूप से किया जाए।

तिरंगे और संविधान का अपमान, अंग्रेजों की मुखबिरी

आरएसएस मुख्यालय में पहली बार 26 जनवरी 2002 को तिरंगा झंडा फहराया गया। संघ वहां अपना झंडा फहराती रही थी। जब कुछ युवकों ने आरएसएस मुख्यालय में जाकर तिरंगा फहराना चाहा तो उन पर एफआईआर करा दी गई। लेकिन बाद में आरएसएस ने खुद ही इस मुकदमे को आगे नहीं बढ़ाया। मुकदमा आगे बढ़ता तो आरएसएस की किरकिरी होती।
  • आरएसएस ने बाबा साहब द्वारा लिखे गए भारतीय संविधान का हमेशा विरोध किया। संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को अपनाने के कुछ दिन बाद, 30 नवंबर 1949 को प्रकाशित अखबार Organizer के संपादकीय में इसकी आलोचना की गई थी।आरएसएस ने कहा था कि यह संविधान भारतीयों के किसी काम का नहीं है। बीच-बीच में आरएसए और बीजेपी नेताओं के ऐसे बयान भी आये कि पूर्ण बहुमत में आने के बाद बीजेपी भारतीय संविधान को बदल देगी।
  • नेता विपक्ष राहुल गांधी आरोप लगाते रहे हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आरएसएस के लोग अंग्रेजों के लिए काम करते थे। उनके सहयोगी थे। अंडमान जेल या काला पानी की सजा पाये लोगों ने जेल से बाहर आने के लिए अंग्रेजों से माफी मांगी थी। ऐसे लोगों को पेंशन भी मिली। सावरकर इन्हीं लोगों में से एक थे। इन आरोपों के लिए राहुल गांधी पर मानहानि का केस भी किया गया। ऐसा ही एक मुकदमा सावरकर के प्रपौत्र सात्यकी की शिकायत पर पुणे की अदालत में चल रहा है। लेकिन अदालत की कार्यवाही जैसे जैसे आगे बढ़ रही है, राहुल गांधी के आरोप तथ्यात्मक रूप से सही साबित हो रहे हैं।