अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिए जाने के फ़ैसले के बाद भी दोनों देश अंतरिम व्यापार समझौता क्यों करना चाहते हैं? कहा जा रहा है कि यह समझौता हाल की बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। यानी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता पर थोड़ा असर पड़ा है। तो सवाल है कि यह असर किस रूप में होगा? भारत के लिए फायदे वाला या नुक़सान वाला?

इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 18% का जवाबी टैरिफ़ लगाने की घोषणा की थी, लेकिन अब यह मान्य नहीं रह गया है। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद ट्रंप ने शनिवार को सभी व्यापारिक साझेदारों पर 15% का टैरिफ़ लगाने का ऐलान किया, जो पहले 10% था। यह 15% टैरिफ़ उत्पाद-आधारित एमएफएन (मोस्ट फेवर्ड नेशन) दरों के ऊपर लगेगा। एमएफएन दरें वे सामान्य शुल्क हैं जो एक देश विश्व व्यापार संगठन के सदस्यों से आयात पर लगाता है, सिवाय उन देशों के जिनके साथ विशेष समझौते हैं।
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रिपोर्टों के अनुसार अब 15% प्लस एमएफएन दर नया सामान्य हो गया है। भारत चाहता है कि अमेरिका या तो इस 15% शुल्क को कम करे या एमएफएन दरों में छूट दे, ताकि भारतीय सामान चीन, बांग्लादेश, वियतनाम, कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बने रहें। दोनों देश 7 फरवरी के संयुक्त बयान की भावना को बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं। इस बयान में कहा गया है कि अगर किसी देश के सहमत टैरिफ़ में बदलाव होता है, तो दूसरा देश अपनी प्रतिबद्धताओं को संशोधित कर सकता है।

एक मीडिया रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया है, 'टैरिफ़ प्रतिबद्धताओं को नई स्थिति के अनुसार समायोजित करना पड़ सकता है, क्योंकि संयुक्त बयान में ऐसे बदलावों की अनुमति है।' भारत के वाणिज्य और विदेश मंत्रालय ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार शाम एक बयान जारी किया, 'हमने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ़ पर फ़ैसले को नोट किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की। अमेरिकी प्रशासन ने कुछ क़दमों की घोषणा की है। हम इन घटनाक्रमों का अध्ययन कर रहे हैं और उनके असरों का मूल्यांकन कर रहे हैं।'

भारत और अमेरिका अभी तक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी बीटीए के कानूनी पक्ष को अंतिम रूप नहीं दे पाए हैं। यह संयुक्त बयान के आधार पर तैयार किया जा रहा था।

मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन के नेतृत्व में भारतीय टीम 23 फरवरी को वॉशिंगटन पहुंचने वाली थी, जहां तीन दिनों की बातचीत होनी थी। मार्च में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के भारत दौरे पर समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी। इन बैठकों में कोई बदलाव हुआ है या नहीं, यह अभी साफ़ नहीं है।

निर्यात बाज़ार में अनिश्चितता

उद्योग जगत में अमेरिका जैसे भारत के सबसे बड़े निर्यात बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। जानकारों का कहना है कि अगले सप्ताह की शुरुआत तक स्थिति साफ़ हो सकती है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक्स पर पोस्ट किया कि प्रशासन टैरिफ़ नीति को मज़बूत रखने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिकियों को पहले रखेंगे। कोर्ट ने हमारे टैरिफ के ख़िलाफ़ फ़ैसला नहीं दिया, बल्कि सिर्फ कहा कि आईईईपीए का इस्तेमाल राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं किया जा सकता है। हम सेक्शन 232, 301 और 122 जैसे अन्य अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे।'

सेक्शन 232 राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरे में डालने वाले आयात पर टैरिफ़ या कोटा लगाने देता है। सेक्शन 301 विदेशी देशों की अनुचित व्यापार प्रथाओं की जांच और जवाबी कार्रवाई की शक्ति देता है। सेक्शन 122 भुगतान संतुलन मुद्दों से निपटने के लिए 150 दिनों तक अस्थायी आयात शुल्क लगाने देता है।
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वैश्विक प्रभाव क्या हैं?

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला वैश्विक संदर्भ में देखा जा रहा है-
  • सबसे पहले, यह ट्रंप प्रशासन की मनमाने टैरिफ लगाने की शक्ति को सीमित करता है, जो व्यापार को हथियार बनाने से रोक सकता है और नियम-आधारित व्यापार को बहाल कर सकता है।
  • दूसरा, प्रशासन के पास अब देशों पर दबाव बनाने के सीमित विकल्प हैं। ये सेक्शन तथ्यात्मक आधार पर काम करते हैं, जिनमें टैरिफ़ स्तरों पर कैप और निरंतरता की सीमाएँ हैं। कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत भी।
  • तीसरा, भारत जैसे कई देशों ने अमेरिका के साथ समझौते पर बात की है लेकिन हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जबकि कई देशों के साथ मज़बूत समझौते हैं, वे राहत मांग सकते हैं।
  • चौथा, रिफंड की उम्मीद है। कई आयातक अमेरिकी सरकार से अतिरिक्त टैरिफ के रिफंड के लिए दावा दायर करेंगे। कुछ ने भारत जैसे देशों के निर्यातकों से कहा है कि वे रिफंड साझा करेंगे। ऊंचे टैरिफ का बोझ निर्यातकों, आयातकों और अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ा है। कई चीजों की कीमतें गिरने की उम्मीद है।

आगे क्या होगा, विशेषज्ञ क्या मानते हैं?

एचटी की रिपोर्ट के अनुसार फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस यानी एफआईईओ के डायरेक्टर जनरल और सीईओ अजय सहाय ने कहा, 'अमेरिका और भारत एक-दूसरे के मूल्यवान साझेदार हैं, इसलिए जल्द ही कोई फायदेमंद समाधान निकलेगा।' उन्होंने जोड़ा कि फैसले से पहले प्रस्तावित टैरिफ में समायोजन होगा और 18% टैरिफ अब अप्रासंगिक है क्योंकि सभी देशों पर 15% लग रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार डेलॉइट इंडिया के पार्टनर गुलजार डिडवानिया ने कहा कि फैसला 20 फरवरी 2026 के बाद अमेरिका में क्लियर होने वाले सामानों पर लागू होगा। उन्होंने कहा, 'यह रत्न और आभूषण, कपड़ा, कुछ ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग सामान जैसे भारतीय निर्यातों के लिए बड़ी राहत है।' हालाँकि, सेक्शन 232 के तहत आने वाले स्टील, एल्यूमिनियम जैसे उत्पादों पर 50% टैरिफ़ जारी रहेगा। बीटीए पर उन्होंने कहा कि जवाबी टैरिफ़ अब लागू नहीं होंगे, लेकिन अन्य क्षेत्रों जैसे रूसी पेनल्टी हटाना, कोटा-आधारित रियायती टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं जारी रहेंगी। उन्होंने कहा, 'अगर अन्य देश 15% देते हैं, तो भारत भी वही देगा। यह अस्थायी है और 150 दिनों के बाद कांग्रेस की मंजूरी चाहिए।'
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सबसे ज़्यादा प्रभावित कपड़ा क्षेत्र अभी सतर्क है। कंफेडरेशन ऑफ़ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री यानी सीआईटीआई के चेयरमैन अश्विन चंद्रन ने कहा, '20 फ़रवरी के घटनाक्रम ने नई अनिश्चितता पैदा की है। अधिकारियों से सफाई मिलनी चाहिए, खासकर अंतरिम समझौते की शर्तों पर। अमेरिका भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है।'

हालाँकि, कुछ क्षेत्रों में राहत है। कामा ज्वेलरी के मैनेजिंग डायरेक्टर कोलिन शाह ने 15% सरचार्ज के साथ टैरिफ रद्द होने को भारतीय रत्न और आभूषण निर्यातकों के लिए बड़ी राहत बताया। एचटी की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, 'यह मांग-आपूर्ति के खालीपन को दूर करेगा। फैसला याद दिलाता है कि व्यापार उपाय संवैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप होने चाहिए। निर्यातकों को अभी भी सतर्क रहना है, लेकिन भारत-अमेरिका संबंध सकारात्मक दिशा में बढ़ेंगे।'

कुल मिलाकर, यह फ़ैसला वैश्विक व्यापार में स्थिरता ला सकता है, लेकिन भारत जैसे देशों के लिए चुनौतियाँ बनी हुई हैं। दोनों सरकारें जल्द समाधान निकालने की कोशिश कर रही हैं ताकि द्विपक्षीय व्यापार मज़बूत रहे।