चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शनिवार को भारत आने की पुष्टि हो गई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा है कि शी जिनपिंग भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह उनकी सात वर्षों में पहली भारत यात्रा होगी। इससे पहले वे 2019 में तमिलनाडु के महाबलीपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए भारत आए थे।

शी जिनपिंग की इस यात्रा को भारत-चीन संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। सम्मेलन के दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात भी होने की संभावना है। शी जिनपिंग से एक दिन पहले यानी शुक्रवार को ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आने की रिपोर्टें हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। हालाँकि, बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान के नयी दिल्ली आने पर संशय बना हुआ है क्योंकि बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने कहा है कि बांग्लादेश पीएम को ब्रिक्स में न्योता नहीं मिला, बल्कि बंगाल की खाड़ी देशों के क्षेत्रीय संगठन के प्रमुख के तौर पर बुलाया गया।
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व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को भारत आएंगे

ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार यानी 11 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचेंगे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुतिन और शी जिनपिंग दोनों का विमान दिल्ली के पालम एयर फोर्स स्टेशन पर उतरेगा। वहां से उन्हें चाणक्यपुरी स्थित निर्धारित होटलों में ले जाया जाएगा।

दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

ब्रिक्स सम्मेलन को देखते हुए राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। विशेष रूप से चाणक्यपुरी इलाके के उन होटलों की सुरक्षा बढ़ाई गई है, जहां विदेशी राष्ट्राध्यक्ष ठहरेंगे। मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चीन और रूस की सुरक्षा टीमें पहले ही दिल्ली पहुंच चुकी हैं। ये टीमें आधुनिक हथियारों और सुरक्षा उपकरणों के साथ आई हैं। होटलों की छतों से लेकर हर मंजिल तक सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।

ब्रिक्स के लिए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी सुरक्षा व्यवस्था की लगातार निगरानी कर रही हैं। रिपोर्ट है कि पूरी सुरक्षा के लिए 30000 से ज़्यादा पुलिसकर्मी लगाए जाएँगे।

क्यों अहम है शी जिनपिंग की यात्रा?

शी जिनपिंग की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में कई उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और पूर्वी लद्दाख में तनाव के बाद संबंधों में ठहराव आया था। हालाँकि हाल के महीनों में दोनों पक्ष संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होती है तो सीमा विवाद, व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

ब्रिक्स कितना अहम?

इस वर्ष भारत ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर रहा है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन 'बिल्डिंग फोर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' विषय पर केंद्रित रहेगा। ब्रिक्स समूह की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से हुई थी।
इसके बाद 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात इसमें शामिल हुए। 2025 में इंडोनेशिया भी इस समूह का सदस्य बना। आज ब्रिक्स को वैश्विक अर्थव्यवस्था और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में बड़ा मंच माना जाता है।

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की यात्रा पर संशय

इस बीच बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत आने को लेकर स्थिति अभी साफ़ नहीं है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि, 'बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को ब्रिक्स सम्मेलन का निमंत्रण नहीं मिला है। निमंत्रण केवल BIMSTEC (बिम्सटेक) के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में भेजा गया है।' बिम्सटेक में बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल और श्रीलंका मिलाकर सात सदस्य देश हैं। कबीर ने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय यात्रा के लिए अनुकूल समय आने पर अलग से कार्यक्रम बनाया जाएगा।

भारत ने क्या कहा?

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में कहा था कि बांग्लादेश की ओर से प्रधानमंत्री की भागीदारी को लेकर अभी कोई अंतिम पुष्टि नहीं मिली है। भारत की ओर से बिम्सटेक अध्यक्ष के रूप में बांग्लादेश को सम्मेलन के आउटरीच सत्र में आमंत्रित किया गया है।
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भारत-बांग्लादेश संबंध कैसे?

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की संभावित अनुपस्थिति ऐसे समय चर्चा में है जब दोनों देशों के संबंधों में कुछ तनाव देखा जा रहा है। यह तनाव उस समय बढ़ा जब भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को राजनीतिक शरण दी थी। अगस्त 2024 में जन आंदोलन के बाद उन्हें पद छोड़कर भारत आना पड़ा था। इसी वजह से दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्कों को लेकर लगातार अटकलें लगती रही हैं।

ब्रिक्स सम्मेलन में रूस, चीन और ईरान सहित कई सदस्य देशों के शीर्ष नेता भाग लेंगे। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच आयोजित हो रहा यह सम्मेलन वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का मंच बनेगा। भारत के लिए यह सम्मेलन इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि वह ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मजबूत करने और बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अब सभी की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के बीच संभावित बैठकों और सम्मेलन से निकलने वाले साझा संदेश पर रहेगी।