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यस बैंक घोटाले की चार्जशीट: सरकार सजग रहती तो दो साल पहले ही हो जाता ख़ुलासा

ईडी की जाँच में यह भी सामने आया कि डीएचएफ़एल से 12 हज़ार करोड़ रुपये बेईमानी से निकाले गए। ये और ऐसे ही कई खुलासे ईडी ने अपनी चार्जशीट में किये हैं। पूरी चार्जशीट सरकारी एजेंसियों की लापरवाही और कॉरपोरेट रिश्वतखोरी के साथ साथ करोड़ों के वारे-न्यारे करने का खेल उजागर करती है।
आलोक वर्मा

यस बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की चार्जशीट ने और हड़कंप मचा दिया है। इस चार्जशीट में हुए खुलासों ने घोटालों पर पहले से ही सजग रहने के सरकारी दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

यस बैंक घोटाले पर अगर सरकार और एजेंसियाँ सजग होतीं तो दो साल पहले ही इस मामले का खुलासा हो जाता। रिज़र्व बैंक को दो साल पहले इस घोटाले की भनक लग गई थी। रिज़र्व बैंक की वजह से यस बैंक को डीएचएफ़एल यानी दीवान हाउसिंग फ़ाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड समूह की कंपनी के 950 करोड़ के लोन प्रस्ताव को रद्द करना पड़ा था। यह खुलासा यस बैंक मामले में ईडी की चार्जशीट से हुआ है। यह चार्जशीट ईडी ने मुंबई कोर्ट में दाखिल किया है। ईडी को संदेह है कि यह लोन प्रस्ताव भी उसी प्लान का हिस्सा था जिसमें 1700 करोड़ रुपये के लोन प्रस्ताव को अंदरूनी क्रेडिट अप्रूवल की कमेटी की समीक्षा से बचाने की साज़िश रची गई थी। ग़ौरतलब है कि ईडी ने हाल ही में यस बैंक संस्थापक राणा कपूर, उसकी पत्नी और तीन बेटियों और उनसे जुड़े तीन फ़र्मों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल की है।

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इस पत्रकार को हाथ लगी इस चार्जशीट के मुताबिक़ यस बैंक ने 750 करोड़ का एक लोन सितंबर 2018 में बेलिफ रियलटर्स प्रा. लिमि. नामक फ़र्म को दिया था। इसके एक महीने पहले ही यस बैंक ने 950 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लोन भी इसी कंपनी के लिए स्वीकृत किया था। रिज़र्व बैंक ने एक विशेष ऑडिट में इसी कमी को पकड़ा था। दरअसल, इस कुल 1700 करोड़ रुपये के लोन के लिए बैंक बोर्ड क्रेडिट कमेटी के 28 अगस्त 2018 को होने वाली मीटिंग में चर्चा ज़रूरी थी। 

रिज़र्व बैंक के विशेष ऑडिट में लोन स्वीकृत करने के दौरान हुई इस घोर लापरवाही को इंगित करने के बाद भी सरकारी एजेंसियाँ सोयी रहीं।

नतीजतन राणा कपूर अपनी मनमानी करता रहा और जनवरी 2019 में पद से हटने को वह मजबूर ज़रूर हुआ लेकिन उसके उत्तराधिकारी रवनीत गिल के पास बैंक को बचाने के लिए ज़्यादा कुछ नहीं था। गिल ने ईडी को बताया है कि बैंक की साख बचाने के लिए राणा की ग़लतियों पर पर्दा डालना ज़रूरी हो गया था। ये और इस तरह के कई ख़ुलासे ईडी की चार्जशीट में हुए हैं।

दस साल की उम्र में बनी शेयर होल्डर

यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर ने अपनी बेटी रोशनी कपूर को दस साल की उम्र में मोरगन क्रेडिट इंडिया प्रा. लिमिटेड (एमसीपीएल) और यस कैपिटल प्रा. लिमिटेड (वाईसीपीएल) का हिस्सेदार बना दिया था। यह बात स्वयं राणा कपूर की बेटी रोशनी कपूर ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से पूछताछ में बताया है। ईडी से पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उपरोक्त दोनों कंपनियों में वह और उसकी दो बहनें 33 प्रतिशत की हिस्सेदार हैं। ईडी से पूछताछ में रोशनी ने बताया है कि उपरोक्त दोनों कंपनियाँ 2003-2004 में स्थापित की गई थीं। उस समय उसकी उम्र मात्र दस साल थी इसलिए उसे नहीं मालूम कि इन कंपिनयों के शेयर लेने के लिए उसके पास प्रारंभिक निवेश कहाँ से आए थे। ईडी को दिए अपने बयान में उसने क़रीब 3 दर्जन और कंपनियों के नाम भी बताए।  

यस बैंक घोटाले की जाँच में लगे (ईडी) ने बताया है कि बैंक के संस्थापक और उनके परिवार के सदस्यों ने 100 से अधिक छोटी-छोटी कंपनियाँ बनाकर रक़म को ट्रांसफ़र किया। इसके साथ ही राणा ने अपनी पत्नी के मालिकाने हक़ वाली कंपनी को 87 करोड़ रुपये बतौर गिफ्ट दे दिए। ईडी इन सभी कंपनियों का कच्चा-चिट्ठा खंगाल रही है।

5050 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग!

प्रवर्तन निदेशालय अब दिवालिया हो चुकी डीएचएफ़एल ग्रुप और यस बैंक के बीच 2018 में हुए लेन-देन के मनी लॉन्ड्रिंग के केस में जाँच कर रही है। जाँच में 5050 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की बात निकलकर सामने आई। यह बात भी सामने आई कि पैसे और फंड को डायवर्ट करने के लिए कपूर फ़ैमिली से जुड़ी कई कंपनियों का इस्तेमाल किया गया।

100 से भी अधिक कंपनियाँ

यस बैंक केस की सुनवाई कर रही स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय ने बताया, ‘अभी तक हुई जाँच में 100 से भी अधिक कंपनियों का खुलासा हुआ, जिसका मालिकाना हक़ कपूर के परिवार के पास था। इन सभी कंपनियों का प्रबंध राणा कपूर ही कर रहा था। इन सभी कंपनियों का इस्तेमाल फंड को ट्रांसफर करने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता था।‘ ये सभी फर्म्स रियल एस्टेट, फैशन, ईको टूरिज़्म से जुड़े हुए हैं।

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पत्नी की कंपनी में 87 करोड़ रुपये बतौर गिफ्ट

इन कंपनियों में मुख्य तौर पर आरएबी इंटरप्राइजेज, मॉर्गन क्रेडिट्स प्राइवेट लिमिटेड, डूइट अर्बन वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं, जिन्हें ईडी की चार्जशीट में शामिल किया गया है। ईडी के अनुसार आरएबी इंटरप्राइजेज राणा कपूर की पत्नी बिंदु कपूर के मालिकाना हक में है। उनके पास आय का ख़ुद कोई ज़रिया नहीं है लेकिन राणा ने 87 करोड़ रुपये उनके नाम पर रजिस्टर्ड कंपनी में ट्रांसफर किया था। ईडी के अनुसार राणा ने गिफ्ट के तौर पर अपनी पत्नी को यह रक़म ट्रांसफर किया।

मार्च में आरबीआई ने यस बैंक के अकाउंट्स से 50 हज़ार रुपये निकासी की सीमा तय की थी। इसके 3 दिन बाद 8 मार्च को ईडी ने बैंक के संस्थापक राणा कपूर को गिरफ्तार कर लिया था। निकासी की लिमिट हालाँकि 10 दिनों बाद ही हटा ली गई थी। ईडी की जाँच में यह भी सामने आया कि डीएचएफ़एल से 12 हज़ार करोड़ रुपये बेईमानी से निकाले गए।

ये और ऐसे ही कई खुलासे ईडी ने अपनी चार्जशीट में किये हैं। पूरी चार्जशीट सरकारी एजेंसियों की लापरवाही और कॉरपोरेट रिश्वतखोरी के साथ साथ करोड़ों के वारे-न्यारे करने का खेल उजागर करती है।

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