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एशिया के 20 देशों की जीडीपी 20 परिवारों की संपत्ति के बराबर

एशिया के सबसे धनी 20 परिवारों के पास जितने पैसे हैं, 20 सबसे ग़रीब देशों का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी लगभग उतना ही है। इन परिवारों के पास 450 अरब डॉलर की जायदाद है, दूसरी ओर इन 20 ग़रीब देशों की जीडीपी 468.50 अरब डॉलर है। इस विडंबनापूर्ण स्थिति का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के मालिक मुकेश अंबानी के पास 50.40 अरब डॉलर की संपत्ति है तो भूटान की जीडीपी ही 2.6 अरब डॉलर है। यानी पूरे भूटान का जो सकल घरेलू उत्पाद है, उसका 20 गुणा पैसा सिर्फ़ मुकेश अंबानी के परिवार के पास है।

20 सबसे धनाढ्यों में 3 भारतीय

ब्लूमबर्ग ने अपने अध्ययन में पाया है कि इन 20 धनाढ्यों में 3 भारतीय हैं। इस सूची में सबसे ऊपर रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के मुकेश अंबानी हैं। उनके पास 50.4 अरब डॉलर की संपत्ति है। उनके पिता धीरूभाई अंबानी यमन से भारत 1957 में आए और अपना धंधा शुरू किया। उनकी मौत 2002 में होने के बाद बड़े बेटे मुकेश ने अध्यक्ष पद संभाल लिया। धीरूभाई कोई वसीयत छोड़ कर नहीं गए थे, लिहाज़ा उनकी विधवा कोकिला बेन ने दोनों भाइयों की रज़ामंदी से संपत्ति का बंटवारा करवाया। छोटे बेटे अनिल की आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई और वह इस सूची में कहीं नहीं हैं।

हॉंग कॉंग का क्वॉक परिवार

एशिया का दूसरा सबसे धानढ्य परिवार है क्वॉक परिवार।  क्वॉक ताक-सेंग हॉंग कॉंग में रहते थे। उन्होंने 1972 में सन हंग काई प्रोपर्टीज़ की नींव डाली। यह कंपनी देखते देखते वहाँ की सबसे बड़ी कंपनी बन गई। इस परिवार के पास 38 अरब डॉलर की संपत्ति है। यह निर्माण उद्योग की कंपनी है। उनकी मौत के बाद उनके बेटों वॉल्टर, थॉमस और रेमंड ने 1990 में कामकाज संभाल लिया। 

चीन से भागे, थाईलैंड के सबसे धनी बन गए

थाईलैंड का चेयरवेनॉन्त परिवार एशिया का चौथा सबसे संपन्न परिवार है। इस परिवार की कुल संपत्ति की कीमत 37.90 अरब डॉलर है। इस परिवार के मुखिया धानिन चेयरवेनॉन्त हैं। वह चरोन पोकफाँद समूह के मालिक हैं। इस समूह की कंपनियाँ खाद्य सामग्री, रीटेल और दूरसंचार के क्षेत्र में हैं। लेकिन धानिन के पिता चिया एक चर दक्षिण चीन के एक छोटे से गाँव में रहते थे और एक बार भयानक तूफान से बचने के लिए वहाँ से भाग कर थाईलैंड चले आए थे। उन्होंने अपने भाई के साथ मिल कर सब्जियों के बीज का कारोबार 1921 में शुरू किया था और उसके बाद कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। उनकी एक कंपनी भारत में भी है, जिसका नाम है लॉट्स होलसेल सॉल्यूशन्स। इसने भारत में 2018 में अपना कामकाज शुरू किया। 

सिगरेट से साम्राज्य

इंडोनेशिया के हार्तोनो परिवार के पास 32.50 अरब डॉलर की संपत्ति है। उनके पितामह ओई वाई ग्वान ने 1950 में एक सिगरेट कंपनी खरीदी और उसके ब्रांड का नाम बदल कर 'ज़ारुम' रख दिया। इसके बाद वह देश की सबसे बड़ी सिगरेट कंपनी के मालिक बन गए। ओई ग्वान की मौत के बेटों माइकल और बूडी ने बैंकिंग उद्योग में हाथ आजमाया और बैंक सेंट्रल एशिया के मालिक बन गए। 

फल से इलेक्ट्रॉनिक्स

दक्षिण कोरिया के ली ब्युंग-चुल ने 1938 में फल, सब्जी और मछली का व्यापार करे के लिए एक कंपनी की स्थापना की और उसका नाम रखा सैमसंग। उन्होंने इसके कामकाज का विविधिकरण 1969 में करते हुए कंप्यूटर के मेमोरी चिप्स और स्मार्टफ़ोन बनाना शुरू किया। उनकी मौत के बाद उनके तीसरे बेटे ली कुआन-ही ने व्यापार संभाला और उसे नई ऊँचाइयाँ दी। उनकी मौत 2014 मे हो गई और उनके बेटे जे वाई ली ने कामकाज संभाल लिया। इस परिवार के पास 28.50 अरब डॉलर की जायदाद है। 

थाईलैंड के वूविद्या परिवार के पास 24.50 अरब डॉलर है। चालियो वूविद्या ने टी. सी. फ़ार्मास्यूटिकल्स की स्थापना की। इस कंपनी के पास रेड बुल ब्रांड है। 

सापूरजी पल्लनजी 

भारत का सापूरजी पल्लनजी समूह एशिया का सातवाँ सबसे संपन्न परिवार है। पल्लनजी मिस्त्री ने 1865 में निर्माण का काम शुरू किया था। सापूरजी पल्लनजी समूह निर्माण की देश की अग्रणी कंपनी है। टाटा समूह में भी इनकी बड़ी हिस्सेदारी है। समूह के मालिक साइरस मिस्त्री टाटा समूह के अध्यक्ष भी बने थे, जिन्हें बाद में पद से हटना पड़ा। 

हिन्दुजा परिवार

भारत के हिन्दुजा परिवार के पास 16 अरब डॉलर की संपत्ति है। परमानंद हिन्दुजा 1914 में मौजूदा पाकिस्तान से भाग कर मुंबई आ गए और व्यापार शुरू किया। बाद मे वह ईरान चले गए। उनके बेटों गोपीचंद और अशोक हिन्दुजा ने बाद में लंदन और पेरिस में अपना कामकाज जमाया। भारत में उनकी कंपनी अशोक लीलैंड है, जो बस और ट्रक बनाती है। 

लेकिन इसके दूसरी ओर एक देश भूटान है, जिसकी कुल सकल घरेलू उत्वाद ही 2.6 अरब डॉलर है। इसकी अर्थव्यवस्था भारत की मदद से चलती है और यह एशिया के सबसे ग़रीब देशों में एक है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल  78.3 करोड़ लोग ग़रीबी रेखा से नीचे बसर कर रहे थे। रोज़ाना 1 डॉलर की आय को अंतरराष्ट्रीय ग़रीबी रेखा माना जाता है। दुनिया के कुल ग़रीब के 9 प्रतिशत लोग एशिया में रहते हैं। लेकिन इसी एशिया में मुकेश अंबानी भी रहते हैं, जिनकी निजी संपत्ति 50 अरब डॉलर की है।

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