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कारोबार का माहौल ख़राब, देश छोड़ भागे हज़ारों कारोबारी

क्या भारत में व्यापार या उद्योग-धंधा करना अब ज़्यादा मुश्किल हो गया है? कैफ़े कॉफ़ी डे यानी सीसीडी के मालिक वी.जी. सिद्धार्थ ने अपनी मौत से पहले जो चिट्ठी लिखी थी वह भारत में व्यापार या उद्योग-धंधे करने के ख़राब माहौल की ओर इशारा करता है। इस पर व्यापार जगत ने भी प्रतिक्रियाएँ दी हैं। अरबपति उद्योगपति किरण मज़ूमदार शॉ ने भी कुछ ऐसा ही संकेत दिया है। छोटे स्तर पर ऐसी शिकायतें अक्सर आती रहती हैं कि कारोबारियों को भारतीय एजेंसियाँ परेशान करती हैं। क्या यही वजह है कि हज़ारों करोड़पति कारोबारी हर साल भारत छोड़कर जा रहे हैं और क्या सरकार इस समस्या को स्वीकार करती है? 

करोड़पति कारोबारियों के देश छोड़ने पर 2018 में न्यू वर्ल्ड वेल्थ रिपोर्ट आई थी। इसमें कहा गया था कि 2014 से अब तक 23,000 करोड़पति भारत छोड़ चुके हैं। यानी वे भारत की नागरिकता छोड़ चुके थे और उन्होंने किसी दूसरे देश में व्यापार स्थापित कर लिया। इनमें से 7,000 अमीरों ने तो 2017 में भारत की नागरिकता छोड़ी। यह उससे पिछले साल की तुलना में 16 फ़ीसदी ज़्यादा है। आँकड़ों के मुताबिक़ 2.1 प्रतिशत भारतीय अमीर, 1.3 फ्रेंच अमीर और 1.1 चीनी रईस अपना देश छोड़ चुके हैं। यानी प्रतिशत के हिसाब से भारत इस मामले में शीर्ष पर रहा। 2016 में 6000 और 2015 में 4000 अमीरों ने देश छोड़ा था। यानी हाल के वर्षों में देश छोड़ने वाले अमीरों की संख्या में हर साल इज़ाफा हुआ है।

ये अमीर लोग वहाँ ठिकाना बना रहे हैं जहाँ इन्हें अपने अनुकूल माहौल नज़र आ रहा है। 2018 की रिपोर्टों के अनुसार, अपना देश छोड़ने वाले अमीरों के पंसदीदा ठिकानों में इंग्लैंड, दुबई, सिंगापुर, ऑकलैंड, मोंट्रियल, तेल अवीव और टोरंटो शामिल हैं। वैसे, फ्रांस के अमीर लोग भी शायद बहुत ज़्यादा टैक्स से परेशान होकर दूसरे देशों का रुख कर रहे हैं। 

देश छोड़ने वाले क्या कारण बताते हैं, इस पर रियल एस्टेट से जुड़े हीरानंदानी ग्रुप के को-फाउंडर सुरेंद्र हीरानंदानी का एक इंटरव्यू आया था। उन्होंने साइप्रस की नागरिकता ली है। सुरेंद्र अभिनेता अक्षय कुमार के बहनोई हैं। हीरानंदानी ने पिछले साल एक इंटरव्‍यू में भारतीय नागरिकता छोड़ने की वजह बताई थी। इंटरव्‍यू में उन्‍होंने कहा था, ‘यह क़दम उठाने की सबसे पहली वजह यह है कि भारतीय पासपोर्ट पर वर्क वीजा मिलने में मुश्किल आती है...’ सुरेंद्र हीरानंदानी भारत में कंस्ट्रक्शन बिजनेस की हालत से खुश नहीं थे। उन्‍होंने अपने इंटरव्‍यू में कहा था कि इसमें प्रॉफिट मार्जिन 10 फ़ीसदी से कम रह गया है।

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क्या असली वजह पर चर्चा होती है?

अमीरों के देश छोड़ने का कारण साफ़ तौर पर अनुकूल माहौल नहीं होना रहा है। यानी ज़्यादा टैक्स रेट और कुछ ज़्यादा ही अफसरशाही जैसे बड़े कारण रहे हैं। कैफ़े कॉफ़ी डे के मालिक ने भी अपनी चिट्ठी में टैक्स के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा परेशान किए जाने का ज़िक्र किया है। जब ऐसी ख़बरें आईं तो एक बड़ी उद्योगपति किरण मज़ूमदार शॉ ने भी उस बात का ज़िक्र करते हुए ट्वीट किया। बड़े कारोबारी राहुल बजाज ने भी एक अन्य संदर्भ में कहा है कि देश में व्यापार की स्थिति ठीक नहीं है और अर्थव्यवस्था पर इसका असर देखा जा सकता है। 

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सरकार समस्या माने तब तो समाधान हो!

देश के अमीरों के देश छोड़ने पर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने पिछले साल एक पाँच सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। सीबीडीटी ने इस पलायन की मुख्य वजह स्पष्ट करते हुए कहा था, ‘हाल के दौर में एक अलग ही चलन देखने को मिला है। अमीर भारतीय अब पलायन कर दूसरे देश की नागरिकता ले रहे हैं। इस तरह का पलायन बहुत बड़ा जोख़िम है क्योंकि टैक्स संबंधी कार्यों के लिए वे ख़ुद को ग़ैर-निवासी के तौर पर पेश कर सकते हैं, फिर चाहे भारत के साथ उनके कितने ही मज़बूत व्यक्तिगत और आर्थिक संबंध क्यों न हों।’ इसमें यह भी कहा गया था कि टैक्स बचाने के उद्देश्य से देश के अमीर पलायन कर दूसरे देशों की नागरिकता हासिल कर रहे हैं। लेकिन क्या सिर्फ़ टैक्स बचाने के लिए इतने बड़े स्तर पर पलायन हो रहा है, या कारण कुछ और भी है?

ऐसा देखा जा सकता है कि सीबीडीटी की रिपोर्ट में सिर्फ़ टैक्स के नज़रिए को पेश करने की कोशिश की गई है। इसमें व्यापार करने में ‘लालफीताशाही’ जैसी आने वाली परेशानियों पर ज़ोर नहीं है जिसका ज़िक्र कैफ़े कॉफ़ी डे के मालिक ने अपनी चिट्ठी में किया है। ऐसे में ताज्जुब नहीं कि देश छोड़ कर जाने वाले लोगों की संख्या में कमी नहीं आई है, बल्कि यह संख्या बढ़ी ही है।

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अब ऐसी परिस्थितियों में क्या सरकार यह विचार करेगी कि वी.जी. सिद्धार्थ द्वारा वरिष्ठ आयकर अधिकारी पर परेशान करने का आरोप लगाना कितना गंभीर है? क्या मरने से पहले किसी व्यक्ति द्वारा ऐसे आरोप लगाना सामान्य बात है? क्या इससे यह साफ़ नहीं होता है कि देश में व्यापार करने का माहौल ख़राब हुआ है। तो क्या सरकार का रवैया बदलेगा?
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