कोबरापोस्ट ने NCLT के हवाले से बताया है कि एडीए ग्रुप की 9 कंपनियों पर 1,78,491 करोड़ का बकाया लोन था। 2008 से निवेशकों का 1,59,721 करोड़ नुकसान हुआ। कुल 3,38,212 करोड़ सार्वजनिक पैसा गायब हुआ, जो फ्रॉड और खराब मैनेजमेंट से हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सरकारी एजेंसियों की बड़ी नाकामी है। रिपोर्ट के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया और एसबीआई ने एडीए कंपनियों को कथित तौर पर 'फ्रॉड' लोन अकाउंट घोषित किया है।
एडीए समूह ने आरोपों को किया खारिज
रिलायंस ग्रुप ने कोबरापोस्ट द्वारा चलाई जा रही उस मुहिम की कड़ी निंदा की है, जिसे उन्होंने ग्रुप, इसके चेयरमैन अनिल अंबानी और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर तथा रिलायंस पावर के 55 लाख से अधिक शेयरधारकों को बदनाम करने की 'दुर्भावनापूर्ण और सुनियोजित साजिश' बताया है। कोबरापोस्ट को 'बंद पड़ी और बदनाम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म' बताते हुए रिलायंस ग्रुप ने बुधवार को एक बयान में कहा कि इसे स्वार्थी तत्वों ने व्यावसायिक मकसद से 'पुनर्जीवित' किया है, ताकि रिलायंस कंपनियों के शेयरों की कीमतें गिराई जा सकें और संपत्तियों को बहुत कम दाम पर हथिया लिया जाए।
द स्टेट्समैन की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने बयान में कहा, 'तथाकथित खुलासा पुरानी, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी को फिर से पेश किया गया है, जिसकी जांच सीबीआई, ईडी और सेबी जैसी वैधानिक एजेंसियों ने पहले ही कर ली है।' कंपनी ने कहा कि ऐसे मामलों पर कोई नई टिप्पणी करना अदालत की अवमानना होगी, क्योंकि कई मामले न्यायिक प्रक्रिया में हैं।