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अर्थव्यवस्था में सुधार नहीं, लेकिन बढ़ रही है महंगाई दर

ऐसे समय जब भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी पटरी पर नहीं लौटी है, खाने-पीने और घरेलू इस्तेमाल की दूसरी चीजों की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं। सब्जियाँ, किराना की चीजें महंगी हुई हैं और परिवहन खर्च बढ़ा है। 

यह ऐसे समय हो रहा है जब लॉकडाउन की वजह से करोड़ों लोगों की नौकरी चली गयी या रोज़ी-रोटी का ज़रिया छिन गया, वेतन में कटौती हो गई और लोग तरह-तरह की आर्थिक दिक्क़तों से जूझ रहे हैं। भारतीय अर्थव्यस्था लॉकडाउन के प्रभाव से बाहर अभी नहीं निकली है।

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खुदरा महंगाई दर बढ़ी

फरवरी के अंत में खुदरा महंगाई दर पाँच प्रतिशत पर पहुँच गई, जो तीन महीने का उच्चतम है। इसी समय थोक मूल्य सूचकांक 4.2 पर पहुँच गया तो 27 महीने का उच्चतम स्तर है।

खाने-पीने की चीजें, ईंधन व उत्पादित वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से महंगाई में यह वृद्धि देखी गई है। 

कोलकाता की गायक परमिता विश्वास ने 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' से कहा कि यह बहुत बड़ी समस्या है, बढ़ी हुई कीमतें ने मासिक बजट को एकदम बिगाड़ दिया है। 

फरवरी में मछली-मांस की कीमत में 11.3 प्रतिशत, अंडे में 11 प्रतिशत, तेल में 20.8 प्रतिशत, दाल में 12.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 

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खाने-पीने की चीजें महंगी

पिछले साल दिल्ली में अप्रैल में तूर दाल की कीमत 95 रुपए प्रति किलो थी, यह फरवरी में 108 रुपए हो गई। इसी तरह मुंबई में सरसों तेल की कीमत उसी समय 114 रुपए थी, वह फरवरी में 155 रुपए हो गई। कोलकाता में इस दौरान सूरजमुखी तेल की कीमत 105 रुपए से 179 रुपए प्रति किलो हो गई। 

इसी तरह ईंधन की कीमत भी लगातार बढ़ी है।

भारतीय रिज़र्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि अगले एक साल तक घरेलू इस्तेमाल की चीजों की कीमतें बढ़ती रहेंगी। यह खाद्य और ग़ैर-खाद्य दोनों ही चीजों की कीमतों के साथ होगा। 

इसके अलावा सेवा क्षेत्र पर भी कीमतों का दबाव होगा और साल की पहली तिमाही की तुलना में तमाम तरह की सेवा शुल्क में वृद्धि होगी।

इसके पहले थोक मूल्यों पर आधारित महंगाई दर में नवंबर में 1.55 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह बीते 9 महीनों की सबसे ऊँची वृद्धि है। 

थोक मूल्यों का सूचकांक अक्टूबर में 1.48 प्रतिशत की दर से बढ़ा था। बीते साल इसी दौरान यानी अक्टूबर 2019 में 0.58 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। यानी लॉकडाउन के बावजूद इस साल महंगाई दर पहले से अधिक तेज़ी से बढ़ रही है। 

रिज़र्व बैंक ने अक्टूबर 2020 में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत में इतिहास में पहली बार तकनीकी रूप से आर्थिक मंदी आ गई है। अब तक रिपोर्टों में आर्थिक मंदी की बात तो की जाती रही है, लेकिन अब इसे तकनीकी तौर पर भी माना गया है। 

सिकुड़ती जीडीपी, बढ़ती महंगाई!

आरबीआई का ताज़ा अनुमान है कि इस तिमाही में जीडीपी में 8.6 फ़ीसदी की सिकुड़न आएगी। इससे पहले अगस्त महीने में आई एनएसओ यानी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, पहली तिमाही अप्रैल-जून में अर्थव्यवस्था 23.9 फ़ीसदी सिकुड़ी थी। 

 

इस तरह से लगातार दो तिमाही में यानी छह महीनों में अर्थव्यवस्था सिकुड़ी। हालाँकि आरबीआई का अनुमान है कि अगली तिमाही अक्टूबर-दिसंबर में जीडीपी विकास दर सकारात्मक हो जाएगी। 

ऐसे में महंगाई दर का लगातार बढ़ना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है। 

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