loader

सीतारमण : हर क्षेत्र का होगा निजीकरण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक पैकेज की पाँचवे और अंतिम खेप के रूप में बेहद अहम आर्थिक सुधार का एलान किया है। उन्होंने कहा है कि अब कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं होगा, जिसमें निजी क्षेत्र को काम करने का मौक़ा नहीं मिलेगा। 
अर्थतंत्र से और खबरें
वित्त मंत्री के कहने का अर्थ साफ़ है, हर क्षेत्र का निजीकरण कर दिया जाएगा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सरकार कुछ स्ट्रैटेजिक क्षेत्र चुनेगी, जिन्हें नोटिफ़ाई  किया जाएगा। इस क्षेत्र में सार्वजनिक कंपनी को काम करने का हक़ होगा। वे बनी रहेंगी और पहले की तरह ही अहम भूमिका निभाती रहेंगी। लेकिन इस क्षेत्र में भी निजी क्षेत्र को काम करने का मौका मिलेगा, यानी सरकारी क्षेत्र का एकाधिकार ख़त्म हो जाएगा। 

उन्होंने कहा कि इन नोटिफ़ाइड स्ट्रैटेजिक क्षेत्रों में एक या अधिकतम दो बड़ी सरकारी कंपनियाँ रहेंगी। यदि अधिक कंपनियाँ हुईं तो उनका विलय कर दिया जाएगा। इसके अलावा निजी क्षेत्र की कंपनी काम करेगी। 

इसके अलावा तमाम क्षेत्रों में निजी कंपनियाँ ही होंगी वे ही काम करेगी। उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा और सरकारी कंपनियां उन क्षेत्रों में काम नहीं करेंगी। 

क्या होगा नेहरूवादी अर्थव्यवस्था का?

पर्यवेक्षकों का कहना है यह बहुत ही बड़ा आर्थिक सुधार है और से 'बिग टिकट रिफ़ॉर्म' कहा जा सकता है।
इसका असर यह होगा कि आने वाले कुछ सालों में पूरी अर्थव्यवस्था बदल जाएगी और नेहरूवादी आर्थिक मॉडल ध्वस्त हो जाएगा। सार्वजनिक और निजी कंपनियों के एक साथ फलने फूलने का मॉडल भी ख़त्म हो जाएगा।
धीरे-धीरे सार्वजनिक क्षेत्र ही ख़त्म हो जाएगा। इसकी वजह यह है कि इन स्ट्रैटेजिक क्षेत्रों के अलावा हर क्षेत्र से सार्वजनिक उपक्रमों को हटा लिया जाएगा। दूसरी बात यह होगी कि स्ट्रैटेजिक क्षेत्र में भी एक-दो सरकारी कंपनिया ही रहेंगी और उनके सामने बड़े कॉरपोरेट हाउसेस होंगे। 

बिक जाएंगी सरकारी कंपनियाँ?

धीरे-धीरे सार्वजनिक क्षेत्र ही ख़त्म हो जाएगा। इसकी वजह यह है कि इन स्ट्रैटेजिक क्षेत्रों के अलावा हर क्षेत्र से सार्वजनिक उपक्रमों को हटा लिया जाएगा। दूसरी बात यह होगी कि स्ट्रैटेजिक क्षेत्र में भी एक-दो सरकारी कंपनिया ही रहेंगी और उनके सामने बड़े कॉरपोरेट हाउसेस होंगे। 

पर्यवेक्षकों का कहना है कि इसकी अगली परिणति यह होगी कि तमाम सरकारी कंपनियाँ धीरे-धीरे बेची जाएँगी। पहले सरकारी हिस्सेदारी कम की जाएगी और उसके अगले चरण के रूप में उन्हें बेच दिया जाएगा। नया सार्वजनिक उपक्रम नहीं आएगा। इसका नतीजा यह होगा कि सार्वजनिक उपक्रम पूरी तरह ख़त्म हो जाएगा। 

फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में भी सार्वजनिक क्षेत्र है और मजबूत है। पर भारत उससे आगे निकल अमेरिका की राह पर चल पड़ेगा, यानी सरकार की कोई कहीं भूमिका नहीं रहेगी। 

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

अर्थतंत्र से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें