डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को लेकर रूसी तेल ख़रीद बंद करने का जो दावा किया है, क्या वह सच साबित हो रहा है? तो क्या भारत ने अमेरिकी दबाव में रूसी तेल खरीद बंद करने को स्वीकार कर लिया है? ताज़ा आँकड़े तो कुछ ऐसा ही संकेत देते हैं। भारत ने दिसंबर 2025 में रूस से कच्चे तेल की खरीद को काफी कम कर दिया है। रूस से तेल आयात का मूल्य घटकर मात्र 2.7 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले 38 महीनों में सबसे कम है। रूस से आने वाला तेल अब भारत के कुल तेल आयात का सिर्फ़ 24.9% है, जो नवंबर में 34% से काफ़ी कम हो गया है। यह तीन साल में सबसे कम हिस्सा है।

ये आँकड़े ऐसे समय में आए हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम ने पिछले हफ्ते कई बार कहा है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। बदले में अमेरिका भारतीय आयात पर टैरिफ़ 50% से घटाकर 18% कर देगा। ट्रंप ने दावा किया कि भारत अब अमेरिका और शायद वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदेगा।
लेकिन भारत सरकार ने इस दावे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है। भारत ने सिर्फ इतना कहा है कि वह बाजार की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बदलावों के अनुसार ऊर्जा स्रोतों में विविधता ला रहा है। भारत की प्राथमिकता अपनी 1.4 अरब जनता की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

भारत में तेल आयात की स्थिति

भारत ने दिसंबर 2025 में रूस से 5.8 मिलियन टन तेल आयात किया। यह फरवरी 2025 के बाद सबसे कम है। पिछले साल दिसंबर की तुलना में मूल्य में 15% की कमी आई, जबकि नवंबर 2025 की तुलना में 27.1% कम हुआ। यह नवंबर में 3.7 अरब डॉलर था।
सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि यह कमी इसलिए आई क्योंकि भारत अब तेल के स्रोतों को विविधता दे रहा है। यानी अब सरकार किसी एक या कुछ देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहती है और कई देशों से तेल आयात हो रहा है। 

पिछले साल दिसंबर में भारत ने 16 देशों से तेल खरीदा था, लेकिन इस बार 19 देशों से। इनमें से 10 देशों का हिस्सा बढ़ा है, जबकि 9 का घटा है।

अमेरिका से आयात बढ़ा

अमेरिका से तेल आयात में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। दिसंबर 2025 में अमेरिका से 569.3 मिलियन डॉलर का तेल आया, जो दिसंबर 2024 की तुलना में लगभग 31% ज्यादा है। मात्रा में देखें तो 1.1 मिलियन टन तेल आया, जो पिछले साल दिसंबर से 58% ज्यादा है।

हालांकि नवंबर 2025 में अमेरिका से आयात बहुत ज्यादा था। यह सात महीने का उच्चतम स्तर था, इसलिए दिसंबर में उससे कम दिख रहा है, लेकिन साल-दर-साल बढ़ोतरी साफ़ है।

रूस अभी भी सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता

दिसंबर में रूस से कम आयात के बावजूद, रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा। दिसंबर में कुल 11.4 अरब डॉलर के तेल आयात में रूस का हिस्सा 24% था। उसके बाद इराक (2.4 अरब), सऊदी अरब (1.8 अरब), यूएई (1.7 अरब) और अमेरिका (0.6 अरब) थे।

वित्त वर्ष 2025-2026 के पहले नौ महीनों में भारत ने 105.1 अरब डॉलर का तेल 34 देशों से खरीदा, जिसमें रूस का हिस्सा 31.5% यानी 33.1 अरब डॉलर था। पिछले साल इसी अवधि में रूस का हिस्सा 36.5% था। यह बदलाव अमेरिकी प्रतिबंधों, बाजार की कीमतों और भू-राजनीतिक स्थिति के कारण हुआ है। भारत सस्ते और सुरक्षित तेल की तलाश में है, और विविधता से जोखिम कम कर रहा है।
तो सवाल यही है कि भारत अमेरिकी दबाव में रूसी तेल खरीद बंद करने को स्वीकार कर लिया है या फिर सच में खरीद में विविधता लाने के लिए ऐसा किया गया है? इन सवालों का पक्का जवाब तो सरकार ही दे सकती है, लेकिन जानकारों का कहना है कि रूसी तेल की खरीद को कम करने का यह ट्रेंड जारी रह सकता है, लेकिन रूस से पूरी तरह बंद होना आसान नहीं है, क्योंकि रूसी तेल सस्ता मिलता है। तो क्या भारत अपनी ज़रूरतों के अनुसार फ़ैसला लेगा?