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आर्थिक मंदी का एक और संकेत, कर उगाही लक्ष्य से कम 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ दिन पहले ही यह दावा किया कि अर्थव्यवस्था सुधरने के पर्याप्त संकेत हैं और देश मंदी के दौर में नहीं है। इसके उलट सरकार के ही आँकड़े बता रहे हैं कि आर्थिक स्थिति सुधर नहीं रही है, वरन और बिड़ती ही जा रही है। पिछले छह महीने में कर उगाही राजस्व लक्ष्य से काफ़ी कम हुआ है। इसकी कोई संभावना नहीं है कि वित्तीय वर्ष के अंत तक यह लक्ष्य हासिल कर ले। लक्ष्य से कम कर उगाही मंदी का साफ़ संकेत है। 
सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में प्रत्यक्ष कर उगाही राजस्व में 17.30 प्रतिशत की बढोतरी और कुल 13.35 लाख करोड़ रुपए की उगाही का लक्ष्य रखा था।  पर इसके पहले छह महीने यानी अप्रैल से 15 सितंबर तक 4.40 लाख करोड़ रुपये की कर उगाही हो सकी। 
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पूरे साल में 15 सितंबर की तारीख़ अधिक महत्वपूर्ण इसलिए है यह अग्रिम कर यानी एडवांस्ड टैक्स जमा करने की अंतिम तारीख़ होती है। सरकार ने अग्रिम कर राजस्व में 18 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद की थी, पर इसमें सिर्फ़ 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 

कर उगाही का लक्ष्य कम किया

जीएसटी परिषद की बैठक शुक्रवार को है, लेकिन उसके पहले ही यह साफ़ हो गया है कि इसकी उगाही भी कम हुई है। यह छह महीने के न्यूनतम स्तर 98,902 करोड़ पर पहुँच गई। पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने जीएसटी कर उगाही का लक्ष्य 12 लाख करोड़ रुपये रखा था। लेकिन सरकार को 11.37 लाख करोड़ रुपए ही मिले थे।
चालू साल में पहले सरकार ने कर उगाही का लक्ष्य 13.80 लाख करोड़ रुपये रखा था, पर बाद में उसे घटा कर 13.35 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया। यानी सरकार ने खुद यह मान लिया कि 45,000 करोड़ रुपए कम उगाही ही हो सकेगी।

जीएसटी में बदलाव नहीं

सरकार ने बार-बार यह कहा था कि जीएसटी दरों में कटौती की जाएगी और ज़्यादातर उत्पादों को कम दर वाले कर स्लैब में लाया जाएगा। लेकिन अब इसकी संभावना नहीं के बराब है क्योंकि जीएसटी  उगाही लक्ष्य से कम हो रही है। 
कम उगाही का असर वित्तीय घाटे पर पड़ेगा, यह तय है। बीते बजट में कर उगाही 3.3 प्रतिशत थी, इसे इस साल कम कर 3 प्रतिशत पर लाना तय किया गया था। पर यदि कर उगाही कम हुई तो पैसे कम होंगे और इससे वित्तीय घाटा बढ़ेगा, यह तय है। 
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