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जम्मू-कश्मीर में क्या बंदिशों में मनेंगी ईद की ख़ुशियाँ?

जिन कश्मीरियों की बेहतरी और ख़ुशियों के नाम पर अनुच्छेद 370 में फेरबदल किया गया वे ईद की ख़ुशियाँ मना भी पाएँगे या नहीं, इस पर अभी भी संदेह है। शुक्रवार की नमाज़ के लिए आवाजाही पर लगाई गई पाबंदियों में भले ही ढील दी गई हो, लेकिन ईद के दिन सुरक्षा में ढील दी जाएगी या नहीं, इस पर रविवार को फ़ैसला किया जाएगा। हालाँकि प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को कश्मीरियों को आश्वासन दिया है कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि उन्हें 12 अगस्त को ईद मनाने में किसी भी तरह की मुश्किलों का सामना न करना पड़े। यदि ढील दी भी जाएगी तो कितनी दी जाएगी, यह भी एक सवाल है। यानी कुल मिलाकर यदि कश्मीरी ईद मना भी पाएँ तो ख़ुशियाँ मनाने की छूट देने की भी एक ‘सीमा’ होगी।

त्योहार की तैयारियाँ पहले ही शुरू हो जाती हैं और यह भी एक तरह से त्योहार की ख़ुशियों का हिस्सा ही होती हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर में जो स्थिति है वह सामान्य तो नहीं ही कही जा सकती है। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा कड़ी करने के 5 दिन बाद भी अधिकतर हिस्सों में फ़ोन और इंटरनेट सेवाएँ बंद हैं। हालाँकि शुक्रवार सुबह इसे आंशिक रूप से बहाल किया गया है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की भी यही स्थिति है। 

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केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 में फेरबदल किए जाने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँटे जाने के बाद वहाँ की स्थिति पर नज़र रखने के लिए काफ़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला सहित क़रीब 400 राजनेताओं को हिरासत में रखा गया है, ताकि किसी तरह का कोई प्रदर्शन या रैलियाँ न हो।

कब तक सामान्य होगी स्थिति?

ईद के मद्देनज़र कई लोगों को उम्मीदें हैं कि जल्द ही स्थिति कुछ बेहतर हो जाएगी। हालाँकि हालात तो अभी भी सामान्य नहीं हैं। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार और पूर्व सीआरपीएफ़ प्रमुख के. विजय कुमार ने कहा कि रविवार को ईद की सुरक्षा पर फ़ैसला किया जाएगा। उनका कहना है कि बड़े पैमाने पर कोई विरोध-प्रदर्शन नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘श्रीनगर शहर के आसपास के क्षेत्रों तक सीमित पथराव के कुछ मामले आए हैं। जवानों को न्यूनतम बल और अधिकतम संवेदना के साथ निषेधात्मक आदेशों को लागू करने के लिए छूट दी गई है।’

उन्होंने यह भी कहा कि वे सार्वजनिक व्यवस्था के लिए कम से कम व्यवधान डालेंगे और लोगों को उचित भावना से ईद मनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहेंगे। उनके अनुसार, सभी चिकित्सा आपात स्थितियों में हर संभव सहायता और सुविधा दी जा रही है। कई मामलों में सुरक्षा बलों ने ख़ुद के वाहनों का उपयोग नागरिकों को चिकित्सा सहायता के लिए किया है।

फ़ोन और यातायात सेवा

अधिकारी ने कहा कि चरणबद्ध तरीक़े से आवश्यक सेवाओं के लिए फ़ोन लाइनों को बहाल किया जा रहा है। आपात स्थिति में लोग सुरक्षा बलों से संपर्क कर सकते हैं। लोगों को ख़ास उद्देश्यों के लिए कहीं जाने के लिए पास दिए गए हैं। उनका यह भी कहना है कि ये पास क्षेत्र-विशेष या मार्ग-विशेष के नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द आवाजाही की सामान्य स्थिति को बहाल करना चाहते हैं और इसे चरणबद्ध तरीक़े से किया जाएगा।

राज्यपाल के सलाहकार कुमार ने कहा कि लोगों को आवश्यक चीजें लेने के लिए बाहर जाने की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने कहा, ‘शाम को प्रत्येक इलाक़े में कुछ दुकानें खुलती हैं और इस शर्त पर अनुमति दी जाती है कि कोई भीड़ इकट्ठा न हो। ज़रूरत की चीजों का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की जा रही है। इन्हें सुरक्षा बलों की सहायता से वितरित किया जाएगा।’

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श्रीनगर में येचुरी, डी राजा हिरासत में

सवाल यह भी उठता है कि यदि जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य हो रही है तो बाहर से आने वाले नेताओं को क्यों रोका जा रहा है। अब तक तीन नेताओं को रोका जा चुका है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी और भाकपा के डी. राजा को शुक्रवार को श्रीनगर एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया गया। वे राज्य के पार्टी इकाई के सदस्यों के परिवारों से मुलाक़ात करने जम्मू-कश्मीर आए थे। दोनों ने एक दिन पहले ही राज्यपाल सत्यपाल मलिक को चिट्ठी लिखकर अपनी यात्रा के बारे में जानकारी दी थी। 

येचुरी ने लिखा था कि राज्य की भंग विधानसभा के माकपा विधायक यूसुफ़ तारीगामी बीमार हैं और माकपा के राष्ट्रीय महासचिव होने के नाते वह तारीगामी और पार्टी के अन्य नेताओं से मिलने के लिये नौ अगस्त को श्रीनगर पहुँचेंगे।

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बता दें कि कि गुरुवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद को श्रीनगर हवाईअड्डे पर ही रोक दिया गया था। अनुच्छेद 370 में फेरबदल के बाद कांग्रेस नेता कश्मीर घाटी के हालात का जायजा लेने के लिए वहाँ पहुँचे थे।

जम्मू-कश्मीर में फ़िलहाल जिस तरह की स्थिति है, वह त्योहार की ख़ुशियाँ मनाने के अनुकूल तो नहीं ही हैं, लेकिन अधिकारी भी साफ़ तौर पर नहीं कह रहे हैं कि ईद के दिन कितनी ढील दी जाएगी। अधिकारियों के इस बयान से भी अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि घाटी में स्थिति कैसी है।

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