loader
फ़ाइल फ़ोटो

गठबंधन ने जम्मू-कश्मीर का पुराना झंडा अपनाया, फारूक होंगे नेता

दशकों पुरानी आपसी प्रतिद्वंद्विता छोड़कर पहली बार साथ आईं जम्मू कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों ने अपने गठबंधन का नेता तो चुन ही लिया है आगे की रणनीति भी बनानी शुरू कर दी है। राज्य के विशेष दर्जे को ख़त्म करने और अनुच्छेद 370 में फेरबदल के ख़िलाफ़ बने इस गठबंधन- 'पीपुल्स एलायंस फ़ॉर गुप्कर डिक्लेरेशन' का नेतृत्व फारूक अब्दुल्ला करेंगे। जम्मू कश्मीर के झंडे और संविधान को निरस्त किए जाने के विरोध में और राज्य के विशेष दर्जे को बहाल करने के लिए इस गठबंधन ने प्रतीकात्मक तौर पर अपना झंडा राज्य के पूर्व झंडे को अपनाया है। 

इस मामले में नेशनल कॉन्फ़्रेंस, पीडीपी और कुछ अन्य दलों की बैठक हो चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती, पीपुल्स कॉन्फ्रेन्स के सज्जाद लोन, पीपुल्स मूवमेंट पार्टी के जावेद मीर और सीपीआई (एम) के मुहम्मद यूसुफ़ तारीगामी भी कई बार मिल चुके हैं। 

सम्बंधित ख़बरें

एक-दूसरे की विरोधी रहीं ये पार्टियाँ केंद्र सरकार द्वारा राज्य के विशेष दर्जे को ख़त्म किए जाने के विरोध में साथ आ गई हैं। इन दलों के प्रमुख नेताओं ने कहा है कि वे राज्य में पहली की स्थिति की बहाली की अपनी माँग को लेकर अंतिम दम तक संघर्ष करते रहेंगे। इन दलों ने एकजुट होकर 'पीपुल्स एलायंस फ़ॉर गुप्कर डिक्लेरेशन' का गठन किया है। अब इस मामले में शनिवार को इस गठबंधन को औपचारिक आकार दिया गया।

नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेता फारूक़ अब्दुल्ला को अध्यक्ष बनाए जाने के अलावा पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती को उपाध्यक्ष बनाया गया है। पीपुल्स कॉन्फ़्रेंस के प्रमुख सजाद लोन को गठबंधन का प्रवक्ता बनाया गया है। सजाद लोन ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की नियुक्ति के अलावा गठबंधन की रणनीति के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने गठबंधन के झंडे के बारे में कहा, 'जो प्रतीक सचिवालय पर फहरा रहा था, वह गठबंधन का प्रतीक होगा।' 

बता दें कि इस झंडे को लेकर महबूबा मुफ़्ती के दिए बयान को लेकर जम्मू कश्मीर और बीजेपी के बीच नोंकझोंक तेज़ हो गई है। एक साल से ज़्यादा की नज़रबंदी से रिहा होने के बाद दो दिन पहले ही महबूबा जब पहली प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर रही थीं तो उनके सामने टेबल पर पूर्व में जम्मू कश्मीर राज्य का झंडा पड़ा हुआ था। उन्होंने उस झंडे की ओर इशारा करते हुए कहा, 'मेरा झंडा यह है। जब यह झंडा वापस बहाल हो जाएगा, हम उस झंडे (तिरंगे) को फराएँगे। जब तक हम अपने झंडे को वापस नहीं पाते हैं, हम कोई दूसरे झंडे को नहीं उठाएँगे...।'

5 अगस्त 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर का अपना अलग संविधान था। राज्य के लिए तिरंगे के अलावा एक अलग झंडा भी था। जम्मू-कश्मीर के सरकारी कार्यालयों में राज्य के झंडे के साथ तिरंगे को फहराया जाता था। अनुच्छेद 370 हटने के साथ ही राज्य का झंडा भी निष्प्रभावी हो गया।

झंडे को लेकर महबूबा के इस बयान के बाद बीजेपी ने सख़्त प्रतिक्रिया दी थी और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना ने ‘आज तक’ से कहा था, ‘मैं जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल से निवेदन करता हूं कि महबूबा मुफ़्ती ने जो राष्ट्रद्रोह किया है, इसका तुरंत संज्ञान लेकर उन पर राष्ट्रद्रोह का मुक़दमा दायर करके उन्हें जेल की सलाखों के पीछे बंद कर दिया जाए।’

इन्हीं आरोपों प्रत्यारोपों के बीच गठबंधन ने यदि राज्य के पुराने झंडे को अपना झंडा होना तय किया है तो इसका संदेश साफ़ है कि वे इस मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। बैठक में सजाद लोन ने भी यही इशारा किया।

सजाद लोन ने कहा कि गठबंधन एक महीने के भीतर जम्मू कश्मीर में 370 के हटाए जाने और पिछले एक साल में प्रशासन को लेकर ह्वाइटपेपर लाएगा। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से बीजेपी के 'झूठ और प्रोपेगेंडा' को उजागर किया जाएगा। 

बैठक के बाद फारूक अब्दुल्ला ने कहा,

मैं आपको बताना चाहता हूँ कि यह बीजेपी द्वारा ग़लत प्रचार है कि पीपुल्स अलायंस फॉर गुप्कर डिक्लेरेशन राष्ट्र-विरोधी है। मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि यह सच नहीं है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह बीजेपी विरोधी है। लेकिन यह देश विरोधी नहीं है।


फारूक अब्दुल्ला, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री

बता दें कि महबूबा मुफ़्ती को इसी महीने 13 अक्टूबर को रिहा किए जाने के बाद से राज्य में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। इससे काफ़ी पहले ही फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला सहित अधिकतर बड़े नेता रिहा किए जा चुके हैं। जम्मू कश्मीर में पिछले साल 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 में बदलाव के वक़्त उन्हें हिरासत में लिया गया था। 

अब जब ये नेता इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि वे राज्य में पहले की स्थिति बहाल करने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे, केंद्रीय क़ानून मंत्री ने कहा है कि इसका सवाल ही नहीं है कि जो गठबंधन चाह रहा है वह वे पा लेंगे। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 बहाल नहीं होगा। 

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
क़मर वहीद नक़वी
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

जम्मू-कश्मीर से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें