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जब सिर्फ़ चार महीने के लॉकडाउन से देश ही नहीं, बल्कि राज्यों की भी अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है तो फिर जम्मू-कश्मीर में जहाँ 11 महीने से लॉकडाउन है वहाँ क्या हालत होगी! क्या इसकी कल्पना की जा सकती है?
स्थिति ज़्यादा ख़राब होने लगी तो ज़िंदगी को पटरी पर लाने के लिए 68 दिनों के लॉकडाउन बाद अनलॉक की प्रक्रिया शुरू की गई। लॉकडाउन के बीच ही यह प्रक्रिया जारी है।
मार्च का यही वह महीना है जब कोरोना संकट के कारण पूरे देश भर में लॉकडाउन लगाया गया। इसमें जम्मू-कश्मीर भी शामिल है। इसका मतलब यह हुआ कि पिछले साल 5 अगस्त से लगाई गई पाबंदी धीरे-धीरे हटाई जा रही थी कि कोरोना के कारण लॉकडाउन लगा दिया गया। यानी पहले से ही बदहाल स्थिति में पहुँच गए जम्मू कश्मीर के लिए लॉकडाउन और ख़तरनाक साबित हुआ।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाबंदियों का सबसे ज़्यादा बुरा असर यह रहा कि 'जम्मू कश्मीर के लोगों के हित की बात की नुमाइंदगी करने के लिए कोई भी चुना हुआ प्रतिनिधि नहीं था'।