जम्मू-कश्मीर में हाई सिक्योरिटी अलर्ट और सुरक्षा बलों की सतर्कता के बावजूद पिछले 10 दिनों के भीतर दो अलग-अलग आतंकवादी हमलों से घाटी दहल गई है। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग और कुलगाम जिलों में हुए इन हमलों में एक पुलिस कर्मी और छत्तीसगढ़ के दो गैर-स्थानीय प्रवासी मजदूरों समेत कुल 3 लोगों की जान चली गई है।
कम समय में हुए इन लगातार हमलों ने केंद्र शासित प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित कर दिया है।

ईंट भट्ठे पर दो प्रवासी मजदूरों की मौत

कुलगाम कस्बे से लगभग 16 किलोमीटर दूर स्थित कीलम (Kilam) गांव में आतंकवादियों ने एक ईंट भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के दो गैर-स्थानीय मजदूरों पर अंधाधुंध गोलीबारी की। हमले के दौरान एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल मजदूर को इलाज के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज (GMC), अनंतनाग रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया।
फरवरी 2024 के बाद से गैर-स्थानीय मजदूरों पर यह इस तरह का पहला बड़ा निशाना बनाकर किया गया हमला है। इससे पहले श्रीनगर के शहीद गंज इलाके में पंजाब के दो प्रवासी मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
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अनंतनाग हमला: अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात पुलिस जवान शहीद

इससे पहले लाल चौक, अनंतनाग में आईआर 3rd बटालियन के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी (निवासी: बीरवाह, बडगाम) को आतंकियों ने गोली मार दी। शहीद पुलिसकर्मी उस समय अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने इस कायरतापूर्ण हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। उपराज्यपाल ने कहा कि "इस जघन्य कृत्य को बख्शा नहीं जाएगा और जिम्मेदार आतंकियों को कानून के कटघरे में लाया जाएगा।
अप्रैल 2025 में पहलगाम की बैसरन घाटी में लश्कर-ए-तय्यबा (LeT) के आतंकवादियों द्वारा पर्यटकों को निशाना बनाकर किए गए भीषण हमले के बाद, अनंतनाग में यह हमला पहला बड़ा आतंकी हमला था। पहलगाम हमले में 26 नागरिकों की जान गई थी। ताजा हमलों के बाद पूरे दक्षिण कश्मीर में सुरक्षा बलों द्वारा तलाशी अभियान और निगरानी तेज कर दी गई है।