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फ़ाइल फ़ोटो

देश संविधान से चलेगा, बीजेपी के घोषणापत्र से नहीं: महबूबा मुफ़्ती

अनुच्छेद 370 में फेरबदल के वक़्त से एक साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहीं जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने पहली बार प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने अनुच्छेद 370 को बहाल करने का संकल्प लेते हुए कहा कि देश संविधान से चलेगा, बीजेपी के घोषणा पत्र से नहीं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पीडीपी यानी पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी राज्य के झंडे को वापस लाने के लिए लड़ती रहेगी और विशेष दर्जे के लिए कश्मीर की लड़ाई को नहीं छोड़ेगी। 

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पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती दस दिन पहले 13 अक्टूबर को रिहा की गई हैं। जम्मू कश्मीर में पिछले साल 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 में बदलाव के वक़्त से ही वह हिरासत में थीं। पहले उन्हें नज़रबंद रखा गया था लेकिन बाद में उन्हें सख़्त क़ानून जन सुरक्षा अधिनियम यानी पीएसए के तहत हिरासत में रखा गया था। महबूबा की रिहाई तब हुई जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय हिरासत की सीमा ख़त्म होने वाली थी। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर महीने के आख़िर में सुनवाई के दौरान जम्मू कश्मीर प्रशासन से कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को हमेशा के लिए हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। 

रिहाई के बाद से ही महबूबा राज्य की राजनीति में सक्रिय हुई हैं। उनकी पार्टी पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेन्स और कुछ अन्य दलों के साथ बैठक कर चुकी है। इन दलों के प्रमुख नेताओं ने कहा था कि वे अपनी माँग को लेकर अंतिम दम तक संघर्ष करते रहेंगे। इन दलों ने एकजुट होकर 'पीपल्स एलायंस फ़ॉर गुप्कर डिक्लेरेशन' का गठन किया है। 

श्रीनगर के गुप्कर इलाक़े में स्थित पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला के घर पर हुई बैठक में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती, पीपल्स कॉन्फ्रेन्स के सज्जाद लोन, पीपल्स मूवमेंट पार्टी के जावेद मीर और सीपीआई (एम) के मुहम्मद यूसुफ़ तारीगामी भी शमिल हुए थे। एक-दूसरे की विरोधी रहीं ये पार्टियाँ साथ आ गई हैं।

इसी बीच महबूबा मुफ्ती ने अपने गुप्कर निवास से गुरुवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, 'जिन लोगों को लगता है कि हम कश्मीर को छोड़ देंगे, वह ग़लत सोचते हैं।' उन्होंने कहा-

जम्मू और कश्मीर के लोग उनके (केंद्र) के लिए मायने नहीं रखते हैं, वे जो चाहते हैं वह है- क्षेत्र। यह देश बीजेपी के घोषणा पत्र से नहीं, संविधान से चलेगा।


महबूबा मुफ्ती, पूर्व मुख्यमंत्री

बता दें कि 5 अगस्त 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर का अपना अलग संविधान था। राज्य के लिए तिरंगे के अलावा एक अलग झंडा भी था। जम्मू-कश्मीर के सरकारी कार्यालयों में राज्य के झंडे के साथ तिरंगे को फहराया जाता था। अनुच्छेद 370 हटने के साथ ही राज्य का झंडा भी निष्प्रभावी हो गया।

उन्होंने कहा कि 'एक डाकू शक्तिशाली हो सकता है, लेकिन उसे चोरी का सामान वापस करना होगा। उन्होंने संविधान को ध्वस्त कर दिया... संसद के पास विशेष दर्जा लेने की शक्ति नहीं थी।' मुफ्ती ने कहा कि तानाशाही लंबे समय तक जारी नहीं रहेगी।

देखिए वीडियो, महबूबा मुफ़्ती की रिहाई का मतलब

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, महबूबा जब प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर रही थीं तो उनके सामने टेबल पर पूर्व में जम्मू कश्मीर राज्य का झंडा पड़ा हुआ था। उन्होंने उस झंडे की ओर इशारा करते हुए कहा, 'मेरा झंडा यह है। जब यह झंडा वापस बहाल हो जाएगा, हम उस झंडे (तिरंगे) को फराएँगे। जब तक हम अपने झंडे को वापस नहीं पाते हैं, हम कोई दूसरे झंडे को नहीं उठाएँगे...।'

अपनी नज़रबंदी के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, 'जेल में मुझे लगा था कि पीडीपी ख़त्म हो गई है, लेकिन एक बार जब मैं बाहर हूँ, (मुझे लगता है) पार्टी बरकरार है।'

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