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झारखंड : पहले चरण में 63% वोटिंग, बीजेपी की राह मुश्किल

राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच मार-पीट की छिटपुट घटनाओं और नक्सली हमले के बीच झारखंड चुनाव का पहला चरण पूरा हो गया। कुल 13 सीटों के लिए हुए मतदान में 62.87 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। 

शनिवार को हुए मतदान में बिश्रामपुर से बीजेपी के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी और लोहरदगा से राज्य कांग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर ओरांव प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल हैं। उनका मुक़ाबला राज्य के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सुखदेव भगत से है। भगत इस बार बीजेपी की ओर से चुनाव लड़ रहे हैं। 

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मारपीट

विरोधी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट की घटनाएँ भी हुई हैं। पलामू के डिप्टी कमिश्नर और चुनाव के रिटर्निंग अफ़सर शांतनु अग्रहरि ने कहा कि डाल्टनगंज विधानसभा के कोसियारा में दो गुटों के बीच मारपीट हुई जब कांग्रेस के के. एन. त्रिपाठी ने पोलिंग बूथ में ज़बरन घुसने की कोशिश की। पुलिस ने एक रिवॉल्वर और उसकी तीन गोलियाँ त्रिपाठी के पास से कथित तौर पर बरामद की। यहां आलोक चौरसिया और त्रिपाठी के समर्थकों के बीच मारपीट हुई।
दूसरी ओर, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मुरारी लाल मीणा ने कहा कि नक्सलियों ने गुमला के जंगल में बनालत और बीरनपुर के बीच एक जगह बम विस्फोट किया, लेकिन इसमें किसी के मारे जाने की ख़बर नहीं है।
शनिवार को जिन 13 सीटों के लिए मतदान हुआ, वे हैं चतरा, गुमला, विशुनपुर, लोहारदगा, मणिका, लातेहार, पनकी,डाल्टनगंज, विश्रामपुर, छतरौर, हुसैनाबाद, गढ़वा और भवनाथपुर। सभी सीटों पर बीजेपी और गठबंधन के उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर है।

कहाँ-कहाँ पड़े वोट?

बीजेपी हुसैनाबाद से निर्दलीय उम्मीदवार विनोद कुमार सिंह का समर्थन कर रही है। बाकी सभी 12 सीटों पर उसने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। 

गठबंधन की ओर हर सीट पर एक ही उम्मीदवार है। इन 13 सीटों में से कांग्रेस ने 6, झामुमो ने 4 और आरजेडी ने 3 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।  इन सभी सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों का सीधा मुक़ाबला विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार से है, यानी विपक्षी वोट बँट नहीं रहा है। 

मुसीबतें बीजेपी की

सत्तारूढ़ दल बीजेपी को एन्टी-इनकम्बेन्सी यानी सत्ता के ख़िलाफ़ लहर से तो जूझना पड़ ही रहा है, दूसरी बातें भी उसकी चिंता बढ़ा रही हैं। शनिवार को जिन 13 सीटों के लिए मतदान हुआ है, उनमें से 9 ऐसे हैं, जहाँ से कोई दल दुबारा जीत कर विधानसभा नहीं पहुँचा है।

भवनाथपुर, बिशुनपुर, बिश्रामपुर, चतरा, डाल्टनगंज, गढ़वा, हुसैनाबाद, लातेहार और पनकी से लगातार दूसरी बार किसी दल को जीत हासिल नहीं हुई है। इस बार क्या होगा, लोगों की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं।

ऑल इंडिया झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) ने पिछले विधानसभा चुनाव बीजेपी के साथ मिल कर लड़ा था। इस बार वह उसके ख़िलाफ़ चुनाव मैदान में है। आजसू ने इस बार लातेहार में अपना उम्मीदवार उतारा है, जो बीजेपी के सामने है। पिछले चुनाव में यह सीट आजसू ने जीती थी। ज़ाहिर है, बीजेपी के लिए लातेहार सीट निकालना आसान नहीं होगा। 

पूर्व मुख्य मंत्री बाबू लाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास पार्टी भी चुनावी मैदान में है। मरांडी की पार्टी अपने बूते चुनाव लड़ रही है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि उसके पीछे बीजेपी का परोक्ष समर्थन है क्योंकि वह विपक्षी वोटों को काट सकेगी, जिससे सत्तारूढ़ दल को फ़ायदा होगा। 

कांग्रेस ने रामेश्वर ओरांव को लोहरदगा में उतारा है। कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार पनकी, बिश्रामपुर, भवनाथपुर, मणिका और डाल्टनगंज में भी उतारे हैं। झामुमो ने गुमला, लातेहार, गढ़वा और विष्णुपुर में अपने उम्मीदवार उतारे हैं तो आरजेडी चतरा, छतरपुर और हुसैनाबाद में मैदान में है। 

18 बड़े नेताओं ने बदले दल

राजनीति में दल-बदल तो होते ही रहते हैं झारखंड में भी हुए हैं। पर इस बार इसने इस मामले में यहाँ रिकॉर्ड तोड़ दिया है। लगभग सभी दलों में ऐसा हुआ है। मजे की बात यह है ये नेता अपना दल छोड़ कर उसी दल में शामिल हुए हैं, जिसकी वे चंद रोज पहले तक लानत-मलानत करते नहीं थकते थे। 
टिकट नहीं मिलने पर 18 बड़े और रसूखदार नेताओं ने अपनी-अपनी पार्टी छोड़ दी और विरोधी दल में शामिल हो गए। प्रदेश कांग्रेस के तीन पूर्व अध्यक्षों ने टिकट नहीं मिलने पर पार्टी छोड़ दी और विरोधियों से जा मिले।

प्रदीप कुमार बालमुचु को टिकट नहीं मिला तो वे ऑल इंडिया झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) में शामिल हो गए। आजसू ने उन्हे घाटशिला से उम्मीदवार बनाया। इसी तरह सुखदेव भगत को टिकट नहीं मिला तो वह बीजेपी में शामिल हो गए, बीजेपी ने उन्हें लोहरदगा से अपना उम्मीदवार बनाया। एक और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सरफ़राज अहमद झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर गंडे से चुनाव लड़ रहे हैं।
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