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बेंगलुरु हिंसा : एसडीपीआई के 16 लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर

बेंगलुरु पुलिस ने मंगलवार की शाम हुए दंगों के मामले में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (एसडीपीआई) के 16 लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज किया है।
मंगलवार की शाम शहर के के.जी. हल्ली और डी.जे. हल्ली इलाक़ों में हुए उपद्रव के मामले में 7 एफ़आईआर दर्ज किए गए हैं, जिनमें इन लोगों के ख़िलाफ़ आरोप लगाए गए हैं।
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याद दिला दें कि कांग्रेस के एक विधायक के रिश्तेदार ने फ़ेसबुक पर समुदाय विशेष से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट की। इसके बाद लोग भारी तादाद में विधायक के घर के बाहर जमा हो गए, तोड़फोड़ की। स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आँसू गैस के गोल छोड़े और फिर उसने गोलियाँ चलाईं। इसमें तीन लोग मारे गए, 60 से ज़्यादा घायल हो गए। 

क्या है मामला?

पूर्वी इलाक़े डी. जी. हल्ली और के. जी. हल्ली के दो पुलिस थानों और कांग्रेस विधायक के घर पर तोड़फोड़ की गई। थाना के बेसमेंट में रखी 200 मोटरसाइकिलों को आग के हवाले कर दिया गया। घायल होने वालों में दर्जनों पुलिस कर्मी भी हैं। पुलिस ने 145 लोगों को गिरफ़्तार किया है। 
इंडियन एक्सप्रेस ने एक ख़बर में कहा है कि महानगर की पुलिस ने दो पुलिस थानों पर हमले करने के आरोप 300 लोगों को नामजद किया है। इसमें से 16 लोगों की पहचान एसडीपीआई के कार्यकर्ता के रूप में की गई है। यह पार्टी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का राजनीतिक संगठन है। 

एसडीपीआई के लोगों पर एफ़आईआर

एसडीपीआई के जिन लोगों के ख़िलाफ़ पुलिस थाने पर हमला और तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया गया है, उनमें प्रमुख हैं, अफ़नान, मुज़म्मिल पाशा, सैयद मसूद, अयाज़, अल्लाबकख़्श, अब्बास, फ़ैरोज़, मुज़म्मिल, हबीब, पीर पाशा, ज़िया, कलीम, करचीफ़ सादिक, जावीद, मुज्जू, सादिक,गोविंदपुर सैयद, सैफ़ और फ़रहान। इसके अलावा दूसरे 6 लोगों भी एफ़आईआर में शामिल किया गया है। 

इन पर धारा 143 (ग़ैरक़ानूनी तरीके से एकत्रित होने), 147 (दंगा), 307 (हत्या करने की कोशिश), 332 व 333 (सरकारी कर्मचारियों को जानबूझ कर काम करने से रोकना), 353 (सरकारी कर्मचारियों पर हमला), 436 (तोड़फोड़ के मक़सद से विस्फोटक का इस्तेमाल) लगाए गए हैं।
कांग्रेस विधायक अखंड श्रनिवास मूर्ति के भतीजे पी. नवीन के ख़िलाफ़ भी ए़फ़आईआर दर्ज किया गया है।
उन पर धारा 153 ए (अलग-अलग समुदायों के लोगों के बीच दुश्मनी बढाने) और 295 ए (किसी समुदाय की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने के मकसद से अपमानजक टिप्पणी करना) लगाए गए हैं। 

क्या कहना है एसडीपीआई का?

दूसरी ओर एसडीपीआई का कहना है कि उसके लोगों पर ग़लत आरोप लगाए गए हैं। कर्नाटक एसडीपीआई के अध्यक्ष इलियास मुहम्मद तुंबे ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा,

‘हमेशा की तरह इस बार भी ईशनिंदा रोकने में ख़ुफ़िया एजेंसियों और पुलिस की नाकामियों को ढंकने के लिए एसडीपीआई को इस मामले में घसीटा जा रहा है।’


इलियास मुहम्मद तुंबे, अध्यक्ष, कर्नाटक एसडीपीआई

उन्होंने यह दावा भी किया कि पुलिस ने मुज़म्मिल पाशा पर पुलिस थाने पर हमला करने का आरोप लगाया है जबकि वह एक वीडियो में लोगों को शांत करने की कोशिश करता हुआ दिख रहा है। 

उनके इस बयान के पहले राज्य के गृह मंत्री बासवराज बोम्मई ने कहा था कि एसडीपीआई और पीएफ़आई पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा रहा है। 

कांग्रेस विधायक और पूर्व गृह मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने माँग की है कि एसडीपीआई और पीएफ़आई के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए क्योंकि वे दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। 

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