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कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से हटाए जाएंगे येदियुरप्पा?

कर्नाटक में एक बार फिर मुख्यमंत्री बदले जाने की अटकलों पर चर्चा ज़ोरों पर है। राजनीतिक गलियारे में कहा जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान येदियुरप्पा को किसी बड़े राज्य का गवर्नर बनाकर उन्हें कर्नाटक के बाहर भेजना चाहती है, ताकि राज्य में नया और युवा नेतृत्व हो। यही वजह कि कई नेता मुख्यमंत्री बनने की कोशिश में जुट गये हैं।
सूत्रों के मुताबिक़, पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, उप मुख्यमंत्री लक्ष्मण संगप्पा सवदी पूरी ज़ोरआज़माइश कर रहे हैं।
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येदियुरप्पा ने उठाए कदम

उधर येदियुरप्पा मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने विरोधियों की साज़िशों को नाकाम करने और अपनी ताक़त बढ़ाने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिये हैं।
येदियुरप्पा ने पार्टी पर पकड़ मजबूत करने के लिए 20 विधायकों को अलग-अलग सरकारी निगमों का अध्यक्ष बना दिया। इनमें कई विधायकों को कैबिनेट मंत्री का दर्ज़ा भी मिला।
इतना ही नहीं, येदियुरप्पा ने नाराज़ विधायकों को मनाने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी शुरू कर दी है। कहा जा रहा है कि जो वरिष्ठ विधायक विरोधी ख़ेमे में जाते दिखाई दे रहे हैं, येदियुरप्पा उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर उन्हें अपने खेमे का बना सकते हैं।

येदियुरप्पा को हटाने का फ़ॉर्मूला

दूसरी ओर, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी. एल.  संतोष चाहते हैं कि येदियुरप्पा की जगह उनका कोई ख़ासमख़ास मुख्यमंत्री बने। येदियुरप्पा और संतोष के बीच अनबन जगज़ाहिर है। संतोष जानते हैं कि बीजेपी आला कमान उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी।

बीजेपी आलाकमान लिंगायत नेता के सिवाय किसी और को मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में नहीं है। संतोष ब्राह्मण हैं और कर्नाटक में ब्राह्मणों की संख्या तीन फ़ीसदी से भी कम है।

जातीय समीकरण

लिंगायत समुदाय के लोग हमेशा से ही बीजेपी के साथ रहे हैं और लिंगायतों की आबादी 15 फ़ीसदी है। इतना ही नहीं, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक तौर पर लिंगायत काफी मजबूत हैं। उनकी ताकत बड़ी है। येदियुरप्पा निःसंदेह सबसे बड़े राजनीतिक लिंगायत नेता हैं। यही वजह है कि अगर येदियुरप्पा को बदलना है तो किसी दूसरे बड़े लिंगायत नेता को ही उनकी जगह सौंपनी होगी, वरना लिंगायत समाज बीजेपी से दूर हो सकता है। 

संतोष उपमुख्यमंत्री सवदी पर दाँव आज़मा रहे हैं। सवदी लिंगायत हैं और संतोष की कोशिश है कि ज़्यादा से ज़्यादा विधायकों को उनके पक्ष में लाया जाए। उधर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी भी विधायकों को अपने पक्ष में जुटाने की कोशिश में हैं। जगदीश शेट्टार, ईश्वरप्पा, सदानंद गौड़ा  भी इस दौड़ में बताए जा रहे हैं।

राज्यपाल बनेंगे येदियुरप्पा?

येदियुरप्पा को कुर्सी छोड़ने के लिए मनाने एक प्लान बनाया गया है। इस प्लान के तहत येदियुरप्पा किसी बड़े राज्य के गवर्नर बनाये जाएँगे। उनके बेटे विजयेंद्र को नए राज्य मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा।
ग़ौर करने वाली बात यह है कि लालजी टंडन के निधन से मध्य प्रदेश के राज्यपाल का पद खाली है। इसी वजह से येदियुरप्पा को हटाने की अटकलों को बल मिल रहा है।

येदियुरप्पा होने का मतलब!

लेकिन निकटवर्ती सूत्रों से पता चला है कि येदियुरप्पा किसी हाल में मुख्यमंत्री पद छोड़ने को तैयार नहीं है। वह अपना कार्यकाल पूरा करना चाहते हैं और साथ ही अगले चुनाव में बीजेपी की अगुवाई कर दुबारा मुख्यमंत्री बनने की योजना बना चुके हैं। 77 साल के येदियुरप्पा राजनीतिक तौर पर सक्रिय हैं और उनके समर्थकों को विश्वास है कि 85 साल तक वह कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहेंगे और बीजेपी की अगुवाई करेंगे। 

बीजेपी आलाकामन जानता है कि येदियुरप्पा को नाराज़ करने का मतलब संगठन को कमज़ोर करना है। कर्नाटक में बीजेपी को खड़ा करने में येदियुरप्पा की भूमिका सबसे बड़ी है।
उन्हें न सिर्फ ज़्यादातर विधायकों का समर्थन हासिल है, बल्कि लिंगायत समुदाय के साथ-साथ बड़े पैमाने पर जन-समर्थन भी हासिल है। वह मौजूदा समय में कर्नाटक में सबसे ताक़तवर नेता हैं। इसी वजह से उनकी जगह किसी और को मुख्यमंत्री बनाना आसान नहीं है। फिर भी उनके कुछ विरोधी उन्हें हटाने की कोशिश में लगे हैं।

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