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अगले चुनाव के बाद बीजेपी की वापसी मुश्किल, सर्वेक्षणों का नतीजा

अब तक आए तीन अलग-अलग चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों से यह बात अब बिल्कुल साफ़ हो गई है कि अगली लोकसभा त्रिशंकु होगी और किसी को बहुमत नहीं मिलेगा। ऐसी स्थिति उभर रही है जिसमें कई क्षेत्रीय दल 'किंगमेकर' की भूमिका में आ सकते हैं क्योंकि चाहे एनडीए गठबंधन हो या यूपीए, दोनों को ही सरकार बनाने के लिए इन दलों के समर्थन की ज़रूरत पड़ेगी। 

एनडीए को सौ सीटों का घाटा

इंडिया टीवी-सीएनएक्स, इंडिया टुडे-कार्वी और एबीपी न्यूज़-सी वोटर के तीन ओपिनियन पोल अब तक आ चुके हैं और इन तीनों के आँकड़ों में मामूली सा ही अंतर है। इन सब तीनों ओपिनियन पोल का औसत यह है कि एनडीए को 238, यूपीए को 160 और अन्य को 145 सीटें मिल सकती हैं। 
पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने बूते बहुमत का आँकड़ा पार कर लिया था। बीजेपी को तब 282 सीटें मिली थीं और एनडीए का आँकड़ा 336 का था। यानी इस बार एनडीए को लगभग सौ सीटों का घाटा होने का अनुमान है। और वह बहुमत से 30-35 सीट पीछे रह सकता है।  
अगर एनडीए को सरकार बनानी हो तो उसे अन्य में शामिल दलों जैसे तृणमूल कांग्रेस, सपा-बसपा, एआईएडीएमके, वाईएसआर कांग्रेस, बीजू जनता दल, टीआरएस जसै तमाम छोटे-बड़े दलों के सामने हाथ फैलाना पड़ेगा।

सपा-बसपा-तृणमूल

लेकिन, एनडीए की समस्या यह है कि उसे तृणमूल कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन तो समर्थन देगा नहीं। इसी एक कारण से यूपीए के सरकार बना लेने की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं क्योंकि तृणमूल कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन अगर यूपीए को समर्थन देने को राज़ी हो जाएँ तो यूपीए बहुमत के आँकड़े के क़रीब पहुँच जाएगा। लेकिन यहीं एक दिलचस्प पेच यह है कि अगर तृणमूल कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन ख़ुद मिल कर एक गुट हो जाएँ तो वे यूपीए पर यह दबाव बनाने की स्थिति में आ सकते हैं कि यूपीए उनके नेतृत्व को स्वीकार कर सरकार में शामिल हों या उसे बाहर से समर्थन दें। कुल मिला कर तीन ओपिनियन पोल राजनीतिक रूप से एक बहुत ही रोचक तस्वीर पेश करते हैं। आइए देखते हैं कि इन ओपिनियन पोल ने क्या तस्वीर पेश की हैं।  
इंडिया टुडे-कार्वी इनसाइट्स ने गुरुवार को अपने ओपिनियन पोल में बताया कि एनडीए को 237 सीटें ही मिल सकेंगी। कांग्रेस की अगुआई वाले गठबंधन यूपीए को 166 सीटें मिल सकती है, जबकि अन्य दलों को 140 सीटें मिल सकती हैं। 
इंडिया टीवी ओपिनियन पोल : 2019 चुनाव में एनडीए को बहुमत नहीं
उसी दिन यानी गुरुवार को एबीपी न्यूज-सी वोटर ने भी अपना ओपिनियन पोल जारी किया और  उसका अनुमान है कि अभी चुनाव हुए तो एनडीए को 233 और यूपीए को 167 सीटें मिल सकती हैं।अन्य के खाते में 143 सीटें जाने का अनुमान है। 
लगभग तीन हफ़्ते पहले यानी पाँच जनवरी को इंडिया टीवी-सीएनएक्स ने अपने ओपिनियन पोल में बताया था कि एनडीए को 245 सीटें मिलेंगी, जबकि यूपीए 146 सीटों पर सिमट जाएगा। अन्य दलों के खाते 152 सीटें आ सकती हैं। 

92 का फेर

अब हम देखते हैं कि चुनाव के बाद कौन से दल एनडीए या यूपीए के पाले में जा सकते हैं और यदि वे गए तो क्या स्थिति बन सकती है।  इंडिया टुडे-कार्वी इनसाइट्स ओपिनियन पोल के अनुसार, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को उत्तर प्रदेश में 58 सीटें मिल सकती हैं। तृणमूल कांग्रेस को 34 सीटें मिलने का अनुमान है। यदि इन दोनों की सीटें जोड़ दी जाएँ तो यह संख्या 92 हो जाती है और इस तरह ये तीन दल एक बड़े प्रभावी  गुट के तौर पर उभर सकते हैं। इसी तरह टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस, एआईएडीएमके और बीजेडी को कुल मिला कर 35 सीटें मिल सकती हैं। 
यदि चुनाव  बाद ये आँकड़े सही होते हैं तो इनके पर आधार पर कई संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है और कई संभावित तस्वीरें उभरती हैं। एक संभावना यह है कि एनडीए को अगर टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस, एआईएडीएमके और बीजेडी का समर्थन मिल जाए तो इन दलों के 35 और एनडीए के 237 सांसद मिल कर बहुमत के 272 का आँकड़ा छू लेंगे।  

मोदी की मुश्किल

लेकिन मोदी के साथ मुश्किल यह है कि कई दल उनके साथ असहज महसूस करते हैं। मुमकिन है कि वे उनके नेतृत्व में काम करने को राज़ी न हों। ऐसी स्थिति में यह संभावना बनती है कि बीजेपी किसी ऐसे नेता को सामने लाए जो इन दलों को मंज़ूर हो और जो इन दलों को एनडीए में ला सके। उस स्थिति में एनडीए की सरकार बन सकती है। 
अब दूसरी संभावना देखते हैं। यूपीए को 166 सीटें मिलने का अनुमान है और अगर उसमें तृणमूल कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन के कुल 92 सीट के आँकड़े को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या 258 तक पहुँचती है, जो बहुमत के आँकड़े से 14 कम है। ऐसी स्थिति में कई दूसरे छोटे दलों का समर्थन हासिल करना अनिवार्य हो जाएगा। ऐसे में विपक्ष की ओर से उस व्यक्ति के प्रधानमंत्री बनने की संभावना होगी जो दूसरे छोटे दलों का समर्थन जुटा सके। यहीं पर यह रोचक स्थिति भी  पैदा होती है कि जैसे कि कुछ दिनों पहले फ़ेडरल फ्रंट बनाने की कोशिश केसीआर और ममता बनर्जी की तरफ से शुरू हुई थी, 
अगर चुनाव बाद फिर ममता बनर्जी बीजू जनता दल और टीआरएस को साध लेती हैं तो प्रधानमंत्री पद के लिए वह अपना दावा मजबूती से पेश कर सकेंगी। दूसरी तरफ़, मायावती के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाएँ इस पर टिकेंगी कि सपा-बसपा गठबंधन किन और दलों का समर्थन मायावती के लिए जुटा सकता है।
तीसरी एक संभावना इन ओपिनियन पोल में नही आ पाई है वह यह है कि प्रियंका गाँधी के मैदान में उतरने के बाद अगर सपा-बसपा और कांग्रेस अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करें और आरएलडी के साथ मिल कर चारों पार्टियाँ एक महागठबंधन बना कर चुनाव लड़ें। ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की हालत और ख़राब हो जाएगी और महागठबंधन 80 मे से 75 सीटें तक जीत पाने की स्थिति में पहुँच सकता है। अगर ऐसे हुआ तो एनडीएन की सीटें घट कर 237 के बजाय 219 पर ही सिमट जाएँगी और उसके सरकार बना पाने की संभावनाएँ बहुत हद तक धूमिल पड़ जाएँगी क्योंकि अभी की स्थिति के अनुसार जो दल एनडीए के साथ जा सकते हैं उनकी  सीटें एनडीए के 219 (यूपी में महागठबंधन बनने की स्थिति में) के आँकड़े में जोड़ने पर भी संख्या 257 के आगे नहीं बढ़ पाती जो बहुमत के आँकड़े से 15 कम है। 

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