शांता कुमार अपना टिकट कटने के बाद पार्टी के कद्दावर नेता लाल कृष्ण आडवाणी से मिलने गये तो लाल कृष्ण आडवाणी की आँखों में आँसू देख कर उन्हें बहुत पीड़ा हुई।
पिछले लोकसभा चुनावों के बाद बीजेपी ने जिस मार्गदर्शक मंडल का गठन किया था, उसमें लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी के साथ कांगड़ा से सांसद शांता कुमार को भी रखा गया था। लेकिन 5 साल तक बीजेपी ने इन नेताओं से कोई सलाह-मशविरा तक नहीं किया।
बीजेपी सांसद ने कहा कि पार्टी की ओर से चुनाव लड़ने के लिये 75 साल की आयु सीमा निर्धारित की गई है। जिससे कई वरिष्ठ बीजेपी नेता इस बार चुनाव लड़ने से इस बार महरूम हो गये। मौजूदा सांसदों तक को पार्टी ने टिकट नहीं दिया।
हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे शांता कुमार मानते हैं कि राजनीति का तेज़ी से अवमूल्यन हुआ है। हालात यह हैं कि नेताओं की मंडी सजी हुई है। टिकट ही निष्ठा का पैमाना बन गया है। जब राजनीति इस स्तर तक पहुँच जाए तो मन में सवाल उठता है कि क्या शहीदों के सपनों का भारत ऐसे ही बनेगा?