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एमपी पहुंचा विवाद, अज़ान के वक़्त लाउड स्पीकर पर हनुमान चालीसा!

महाराष्ट्र से शुरू हुआ हनुमान चालीसा विवाद अब मध्य प्रदेश में भी पहुँच गया है। राज्य की व्यावसायिक नगरी इंदौर में अज़ान के विरोध में हिन्दूवादी संगठनों ने मंदिरों में लाउड स्पीकर पर हनुमान चालीसा का पाठ, और रामधुन बजाने की शुरुआत भी कर दी है।

हिंदवी स्वराज संगठन के संयोजक एडवोकेट अमित पांडेय ने मीडिया से कहा है, ‘काफ़ी वक़्त से अज़ान को लेकर मुहिम चलाई जा रही है। अज़ान के कारण अन्य समुदाय के लोगों को भारी तकलीफ होती है। पुलिस और प्रशासन को ज्ञापन भी दिए गए हैं। मगर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।’

इंदौर के चंद्रभागा क्षेत्र में स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर में शनिवार को नमाज़ के वक़्त लाउड स्पीकर पर हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। शहर के कई अन्य मंदिरों में भी शनिवार को शाम की अज़ान के वक़्त, हनुमान चालीसा का पाठ हुआ और रामधुन बजाई गई।

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अजान का विरोध करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ आरंभ करने वाले इंदौर के आयोजकों ने एलान कर दिया है, ‘वे अब हर दिन पांच वक़्त लाउड स्पीकरों पर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। रामधुन बजायेंगे। पाठ और रामधुन उसी वक़्त बजाई जायेगी, जब मसजिदों में अजान होती है।’

मध्य प्रदेश में काफी समय से अलग-अलग शहरों में अज़ान के खिलाफ हिन्दूवादी संगठन आवाज उठा रहे हैं। ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। मांग की जा रही है कि लाउड स्पीकर पर अज़ान की परिपाटी पर रोक लगाई जाये। आरोप लगाया जा रहा है कि अज़ान से पब्लिक न्यूसेंस और ध्वनि प्रदूषण होता है।

राज्य में अजान के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने में मालवा-निमाड़ सबसे आगे रहा है। पुलिस और प्रशासन को सबसे ज़्यादा ज्ञापन भी इसी क्षेत्र में सौंपे गये हैं।

खरगोन और बड़वानी दंगों के ठीक पहले अज़ान को लेकर रतलाम और इसके आसपास के क्षेत्रों में हिन्दू-मुसलिम गुट आमने-सामने आये। विवाद के हालात बने। टकराव की नौबत पैदा हुई। वह तो समय रहते पुलिस ने स्थितियों को संभाल लिया, जिससे बात नहीं बढ़ पायी।

अब इंदौर में पांच वक़्त की नमाज़ के पहले हनुमान चालीसा और रामधुन को ध्रुवीकरण के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है। इस ताज़ा पूरे मामले से टकराव की स्थितियां बनने की आशंका जताई जाने लगी है।

इन हालातों को लेकर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार, और विश्लेषक दिनेश गुप्ता ने ‘सत्य हिन्दी’ से कहा, ‘एक एजेंडा के तहत यह सब हो रहा है। देश के सद्भाव के लिए ठीक नहीं। बेहद ख़तरनाक ट्रेंड है।’ वे आगे कहते हैं, ‘सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस है, इबादत के लिए लाउड स्पीकर की वॉल्यूम कंट्रोल में होनी चाहिए। किसी को तकलीफ नहीं होनी चाहिए। स्पष्ट निर्देश के बाद भी अनदेखी अनुचित है।’

गुप्ता का कहना है, ‘यह पूरा मामला आपसी समझ का है। मिल-बैठकर सुलझाना सभी के हित में होगा। मगर क्रिया पर प्रतिक्रिया ठीक नहीं है। टकराव बढ़ेगा। नुक़सान होगा।’

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सवालों के जवाब में गुप्ता कहते हैं, ‘मध्य प्रदेश का चुनाव बाद में है। अभी गुजरात का चुनाव बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का बड़ा प्रश्न है।’

वे आगे कहते हैं, ‘गुजरात सीमा वाले हिस्सों में जो ट्रेंड प्रदेश में जोर पकड़ रहा है, वह स्पष्ट कर रहा है कि मध्य प्रदेश की धरा से गुजरात चुनाव में फायदा हासिल करने की जोड़-तोड़ हो रही है। महंगाई-बेरोज़गारी और अन्य बेहद महत्वपूर्ण मसलों पर से लोगों का ध्यान हिन्दू-मुसलिम विवादों पर केन्द्रित करने का प्रयास तेज हो रहा है।’

हिन्दुओं का बड़ा पैरोकार कौन?

मध्य प्रदेश में काफी समय से हिन्दुओं का बड़ा पैरोकार बनने की होड़ भी भाजपा के नेताओं में चल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती से लेकर बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक जयभान सिंह पवैया अज़ान के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद किए हुए हैं।

शिवराज सरकार के प्रवक्ता और राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के तेवर भी बेहद तीखे बने हुए हैं। मिश्रा पर तो यह भी आरोप लगे हैं कि मंत्री पद की शपथ लेते वक़्त संविधान की ‘कसम तक को वे भूला बैठे हैं।’ धर्म विशेष के लोगों के प्रति तीखे बयानों को लेकर मिश्रा से मीडिया खूब सवाल कर रहा है। मिश्रा का अंदाज, बिंदास और कट्टर हिन्दूवादी नेता के तौर पर उभरा हुआ है।

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कांग्रेस भी हनुमान की शरण में

जो ट्रेंड चल रहा है, मध्य प्रदेश की कांग्रेस भी उसी रंग में रंगी नज़र आयी है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ कमलनाथ ने पिछले दिनों बकायदा सर्कुलर जारी कर हनुमान जयंती मनाने का एलान किया था। इसको लेकर कमलनाथ को कांग्रेस के ही विधायकों और पार्टी के नेताओं ने घेर लिया था। 

भोपाल से कांग्रेस के विधायक आरिफ मसूद ने खुलकर कहा था, ‘प्रदेश कांग्रेस ने इस तरह का लेटर कभी जारी नहीं किया जैसा कमलनाथ ने किया। उन्होंने रमज़ान की याद भी अपने बयानों में दिलाई थी।’

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव अकबर बेग ने तो अपने पैसों से पीसीसी में रोजा ईफ्तार, और ईद मनाने की अनुमति कमलनाथ से मांग ली थी। पार्टीजनों के विरोध के बाद नाथ ने ‘भूल सुधार’ करते हुए नयी चिट्ठी जारी कर रमज़ान को भी संशोधित पत्र में शामिल किया था।

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लक्ष्मण सिंह ने कहा है, बेन ठीक है!

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के अनुज कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने अज़ान और हनुमान चालीसा पाठ विवाद को लेकर रविवार को एक ट्वीट किया। अपने इस ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘लाउड स्पीकर पर प्रतिबंध लगाना अच्छा निर्णय होगा। दंगे भी नहीं होंगे, जनता को राहत मिलेगी। न तो राम बहरे हैं, और न ही अल्लाह। जो शक्तियां दुनिया को पालती हैं, उन्हें कुछ मूर्ख, क्या सुनाएंगे और सिखाएंगे?’

‘मोदी-शाह का ज्वाइंट वेंचर’

पांचों वक़्त की नमाज़ के दौरान हनुमान चालीसा पाठ-रामधुन बजाने की घोषणा पर बीजेपी की चुटकी लेते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जे.पी.धनोपिया ने कहा, ‘यह सब नरेंद्र मोदी-अमित शाह का ज्वाइंट वेंचर है।’

धनोपिया आगे कहते हैं, ‘नवंबर में गुजरात सहित कई राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं। गुजरात में बीजेपी की हालत खस्ता है। मध्य प्रदेश के गुजरात से लगे इलाकों में सुनियोजित ढंग से हिन्दू-मुसलिम विवादों को हवा देकर गुजरात चुनाव में मोदी-शाह की लाज बचाने की जुगतबाज़ी हो रही है।’

धर्म नहीं जिहाद का विरोध है: शर्मा

मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व प्रोटेम स्पीकर और बीजेपी के विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस पूरे मामले तथा कांग्रेस के आरोपों के जवाब में ‘सत्य हिन्दी’ से कहा, ‘कांग्रेस में हिम्मत है तो वह भी खुलकर बीजेपी के क़दमों की मुख़ालफत करे। बीजेपी हिन्दुओं को दबाये जाने के ख़िलाफ़ है। उसे किसी के धर्म और इबादत पर आपत्ति नहीं है। धर्म को जिहाद में बदल दिए जाने, कोर्ट के आदेशों को न मानने और खुले आम बदतमीजी करने का विरोध बीजेपी कर रही है।’

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संजीव श्रीवास्तव
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