मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के गांव में एक शख्स ने 20 लाख रुपये खर्च कर निजी स्कूल बनवाया था। लेकिन मदरसा चलाने की अफवाह फैला दी गई। प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया। गांववालों और संगठनों ने विरोध किया। पूरी घटना जानिए।
एमपी में एक स्कूल को इसलिए गिरा दिया गया, क्योंकि उसे एक मुस्लिम ने बनवाया था
मध्यप्रदेश के एक गांव में खुद की ज़मीन पर एक मुस्लिम शख्स ने 20 लाख रूपये खर्च कर स्कूल बनवाया। नर्सरी से आठवीं तक स्कूल शुरू हो पाता, इसके पहले स्कूल को मदरसा बताकर अफवाह फैलाई गई। प्रशासन ने बुलडोजर से स्कूल को गिरा दिया। गांव गिड़गिड़ाता रहा, कपाउंडिंग यानी जुर्माना लगाने का अनुरोध भी किया गया, लेकिन प्रशासन नहीं पसीजा। मध्य प्रदेश में जम्मू जैसी हरकत दोहराई गई है। सवाल ये है कि अगर उस जगह पर मदरसा भी बनाया गया था तो भी बुलडोज़र एक्शन ग़लत था। क्योंकि पढ़ाई तो मदरसे में भी होती है।
मामला बैतूल जिले की भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र के ढाबा गांव का है। गांव के निवासी अब्दुल नईम ने 465 वर्गमीटर भूमि के एक हिस्से में स्कूल का निर्माण कराया। नईम का कहना है, उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि निर्माण के लिए पंचायत से अनुमति लेना है। जब स्कूल बन रहा था, तब पंचायत ने कोई आपत्ति भी नहीं की थी, लिहाजा वो स्कूल बनाता रहा।
बैतूल का एसके पब्लिक स्कूल, जिसे मदरसा बताकर गिरा दिया
स्कूल बनकर तैयार हुआ। एस.के.पब्लिक स्कूल के नाम से समिति बनाई गई। नर्सरी से कक्षा आठ तक स्कूल संचालन के लिए जिला शिक्षा अधिकारी बैतूल से अनुमति का आवेदन भी दिया गया था। मध्य प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा मंडल से आवश्यक अनुमतियों के हेतु आवेदन भी दिया गया।
समस्त प्रक्रिया पूरी हो पाती। स्कूल शुरू हो पाता, इसके पहले पंचायत सचिव का फरमान पहुंच गया। स्कूल का निर्माण बिना अनुमति के किया गया है। इसे स्वयं गिराया जाए। फरमान के बाद नईम और समिति के हाथ-पैर फूल गए। बकौल नईम सबसे पहले उन्होंने इस दलील के साथ पंचायत से आग्रह किया कि अनुमति लेने के बारे में उन्हें पता नहीं था, लिहाजा रास्ता निकाला जाये। स्कूल को न तोड़ा जाए। नईम का दावा है, ‘पंचायत सचिव का कहना था, ऊपर से अत्यधिक दबाव है। अतः वो कुछ कर नहीं सकते।’
इसके बाद नईम एसडीएम ऑफिस और फिर कलेक्टोरेट पहुंचे। गांव के लोग भी साथ रहे। बीते चार-पांच दिनों से सघन प्रयास किए, लेकिन कहीं से कोई सार्थक सहयोग नहीं मिला। हर तरफ से निर्माण को अवैध बताया गया। पंचायत सचिव के फरमान को सही बताकर भवन को खुद तोड़ने का मशविरा दिया गया।
अब्दुल नईम के मुताबिक उन्होंने आला अफसरों से भी वहीं अनुरोध किया जो पंचायत से किया था। उनका आग्रह रहा, यदि अनुमति नहीं ले सका तो अब जुर्माना लेकर भवन की अनुमति प्रदान कर दी जाए। बताया गया है, कतिपय लोगों ने यह बात फैलाई कि स्कूल के नाम पर मदरसा चलाने की तैयारी है। मदरसा चला तो गांव में आपसी वैमनस्यता बढ़ेगी। तमाम खबरों और शिकवे-शिकायतों को आधार बनाकर प्रशासन ने एक्शन लिया।
स्कूल पर बुलडोजर एक्शन के पहले अब्दुल नईम ने मीडिया को दी गई प्रतिक्रियाओं में कहा, ‘अगर प्रशासन को किसी तरह का शक-है तो, वो स्कूल नहीं चलाएगा, लेकिन उनकी जीवन भर की पूंजी को मिट्टी में नहीं मिलाया जाए।’ नईम ने यह भी कहा, ‘प्रशासन उसे बख्श दे। विधिवत अनुमति दे दे। सारा कुछ बेचकर वो गांव छोड़कर जाने को भी तैयार है, लेकिन नईम की एक भी नहीं सुनी गई।’
जयस ने भी की स्कूल की पैरवी
जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन के स्थानीय नेता रमेश उर्फ सोनू पासे ने मीडिया से की गई बातचीत में दावा किया, ‘कुछ लोगों ने गांव में भ्रम फैलाया। मदरसा चलाने की बात फैलाई। जबकि वहां विधिवत स्कूल चलाने की तैयारियां थीं। विधिवत अनुमति मांगी गई थी। पंचायत को निर्माण के लिए आवेदन भी किया गया था। गांव वाले अलग-अलग मंचों पर गए। अनुरोध किया। मगर साथ नहीं मिला। सोनू पासे ने कार्रवाई के विरोध में आंदोलन का एलान किया है।
11 को नोटिस 12 को बुलडोजर एक्शन
कार्यालय ग्राम पंचायत ने 11 जनवरी शनिवार को भूमि मालिक अब्दुल नईम/अब्दुल कलीम को मध्य प्रदेश ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 55 के अंतर्गत नोटिस दिया। इस नोटिस में कहा गया बिना अनुज्ञा के किए गए भवन निर्माण को तत्काल हटा (तोड़) दे, अन्यथा 12 जनवरी को तीन बजे के पूर्व इसे गिरा देंगे। नोटिस के बाद अब्दुल नईम और ग्रामीण अलग-अलग दरों पर गिड़गिड़ाते रहे, मगर कहीं सुनवाई नहीं हुई। नईम ने परिवार समेत कलेक्टोरेट में आत्मदाह की घोषणा भी की। मगर प्रशासन पर कोई असर नहीं हुआ और रविवार को उनके निर्माण को बुलडोज कर दिया गया।
मध्य प्रदेश में जम्मू दोहराया गया
इस घटना ने जम्मू की घटना की याद ताज़ा कर दी। जम्मू के मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द करने का मामला सुर्खियों में है। कुल 50 सीटों वाले इस मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने वाले 42 बच्चे मुस्लिम थे। एक सिख और बाकी हिन्दू वर्ग के। हिन्दू संगठनों ने इसे मुद्दा बनाया था। छह माह पुराने कॉलेज की मान्यता आंदोलन-प्रदर्शन और विरोध के बाद इस दलील के साथ मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया ने समाप्त की है कि कॉलेज आवश्यक शर्तों का पूरा नहीं कर रहा था। इस मसले की देश ही नहीं दुनिया में भी गूंज हो रही है। पूरी कार्रवाई की निन्दा भी हो रही है। लेकिन मध्य प्रदेश का बैतूल प्रशासन तो जम्मू से भी आगे निकल गया।