15 जनवरी 2026 को मुंबई में ब्रिहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव होने जा रहे हैं। देश की सबसे बड़ी और सबसे अमीर नगरपालिकाओं में से एक बीएमसी के 227 पार्षद सीटों के लिए मतदान होगा। यह चुनाव लगभग तीन साल की देरी के बाद हो रहा है, और मुंबईवासियों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे शहर की बुनियादी सुविधाओं, साफ-सफाई, सड़कों और अन्य नागरिक सेवाओं का भविष्य तय होगा।

बीएमसी चुनाव में कुल करीब 1,700 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 879 महिलाएं और 821 पुरुष शामिल हैं। शहर में एक करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाता हैं, जो इसे भारत के सबसे बड़े नगर निगम चुनाव का दर्जा देता है। मतदान सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक चलेगा, और 15 जनवरी को महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है ताकि अधिक से अधिक लोग वोट दे सकें। मतगणना 16 जनवरी को सुबह 10 बजे से शुरू होगी।

बीएमसी में करीब 54% मामू फैक्टर

बीएमसी चुनावों में 'मामू फैक्टर' एक महत्वपूर्ण राजनीतिक रणनीति के रूप में उभरा है, जो मराठी और मुस्लिम मतदाताओं की एकजुट करने की रणनीति है। इसे इस चुनाव का गेमचेंजर बताया जा रहा है। मुंबई, जहां शहर की आर्थिक और राजनीतिक शक्ति दांव पर लगी है, यह फैक्टर ठाकरे भाइयों की एकजुटता से भी जुड़ा हुआ है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के बीच 20 वर्षों बाद हुए गठबंधन ने मराठी मतदाताओं को एकजुट करने का प्रयास किया है, साथ ही मुस्लिम समुदाय के वोटों को आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है। इसी को बीएमसी चुनाव का मामू फैक्टर बताया जा रहा है। यह रणनीति भाजपा-शिंदे गठबंधन के खिलाफ एक मजबूत चुनौती पेश करने की कोशिश भी है, जहां मुंबई की आबादी में मराठी मतदाता लगभग 28-34% और मुस्लिम 18-20% हैं।


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मुंबई में मुस्लिम वोटों को आकर्षित करने के लिए एआईएमआईएम और एनसीपी जैसे दलों के बीच विभाजन का फायदा उठाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मामू रणनीति सफल रही, तो भाजपा की ताकत और संसाधनों के बावजूद, विपक्ष मुंबई के शहरी निकाय पर कब्जा कर सकता है। हालांकि, मुस्लिम मतदाताओं का कांग्रेस या अन्य दलों की ओर झुकाव इस फैक्टर पर असर डाल रहे हैं। लेकिन शिवसेना यूबीटी के ज़मीनी कार्यकर्ता मुस्लिम मतदाताओं को समझा रहे हैं कि अगर वो ओवैसी की पार्टी या प्रत्याशी को वोट देते हैं तो उनका वोट बेकार जाएगा। इसी तरह शरद पवार या अजित पवार के प्रत्याशियों को वोट देते हैं तो भी वोट बेकार जाएगा। क्योंकि ये सारे दल बीजेपी के साथ चुनाव बाद जाने वाले हैं। अभी सिर्फ दिखावे के लिए अलग होकर चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन अंत में फायदा बीजेपी को पहुंचा रहे हैं। इसका स्पष्ट संकेत ये है कि बीएमसी नतीजे आने के बाद नए गठबंधन सामने आएंगे।

इस फैक्टर का चुनाव परिणाम पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि मुंबई के बदलते जनसांख्यिकीय ढांचे में उत्तर भारतीय, गुजराती और अन्य समुदायों के वोट भाजपा को लाभ पहुंचा सकते हैं। यदि 'मामू' गठबंधन मतदाताओं की एकजुटता बनाए रख सका, तो यह ठाकरे ब्रांड की परीक्षा होगी और शहर की राजनीति में एक नया अध्याय लिखा जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि मतदाता मतदान दर और विपक्षी वोटों का विभाजन निर्णायक साबित होगा, जो अंततः बीएमसी चुनावों के नतीजे तय करेगा।

बीएमसी चुनाव में महिला फैक्टर भी काफी महत्वपूर्ण

बीएमसी चुनाव में 1,700 उम्मीदवारों में से 879 महिलाएं मैदान में हैं, जो पुरुषों (821) से अधिक हैं। इसका मुख्य कारण महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण की व्यवस्था है। बीएमसी की 227 सीटों में से 114 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं (जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल है)। इस आरक्षण के कारण पार्टियां अनिवार्य रूप से इन सीटों पर केवल महिला उम्मीदवार उतार सकती हैं, जिससे महिला प्रत्याशियों की संख्या स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।


इसके अलावा, कई प्रमुख पार्टियां जैसे भाजपा, शिवसेना (यूबीटी) और शिवसेना (शिंदे गुट) ने आरक्षित सीटों के अलावा ओपन (सामान्य) वार्डों में भी महिलाओं को टिकट देकर महिला नेतृत्व को बढ़ावा दिया है। भाजपा ने 137 उम्मीदवारों में 76 महिलाओं को मैदान में उतारा है, जबकि अन्य पार्टियां भी महिला सशक्तिकरण और वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए अधिक महिलाओं पर भरोसा कर रही हैं। यह रुझान महिला भागीदारी में वृद्धि और राजनीतिक दलों की रणनीति को दर्शाता है, जिससे इस बार महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा हो गई है।

बीएमसी वार्ड के जनसांख्यिकी आंकड़े

बीएमसी के 24 प्रशासनिक वार्ड (A से T तक) हैं। लेकिन चुनावों के लिए 227 वार्डों में बंटा हुआ है। कुल जनसंख्या लगभग 1.3 करोड़ से अधिक है, जिसमें शहर (आइलैंड) क्षेत्र में 32 लाख से अधिक, पश्चिमी उपनगरों में 57 लाख से अधिक और पूर्वी उपनगरों में 40 लाख से अधिक निवासी हैं। हर वार्ड में औसतन लगभग 54,000 निवासी हैं, जो जनसंख्या वृद्धि के अनुसार समायोजित किए गए हैं। कुल पंजीकृत मतदाता 1,03,44,315 हैं, जिसमें पुरुष 55 लाख से अधिक, महिलाएं 48 लाख से अधिक और अन्य श्रेणी के 1,099 मतदाता शामिल हैं। 227 वार्डों में 10,111 मतदान केंद्र हैं। 2011 की जनगणना के आधार पर वार्डों की जनसंख्या 45,000 से 63,000 के बीच है, जिसमें एससी (अनुसूचित जाति) और एसटी (अनुसूचित जनजाति) की संख्या क्रमशः 400-10,000 और 100-2,700 के बीच है। आरक्षण में ओबीसी, एससी, एसटी और महिलाओं के लिए सीटें शामिल हैं, जिसमें महिलाओं के लिए 114 वार्ड आरक्षित हैं।

बीएमसी के मुस्लिम बहुल वार्ड

धार्मिक जनसांख्यिकी में मुंबई विविध है, जहां हिंदू बहुमत में हैं (65.99% से अधिक), उसके बाद मुस्लिम (20.65%), बौद्ध (4.85%), जैन (4.10%), ईसाई (3.27%) और अन्य हैं। आइलैंड सिटी में मुस्लिमों का हिस्सा अधिक (25.06%) है, जबकि उपनगरों में 19.19% है। मुस्लिम-प्रभावित या बहुल वार्ड लगभग 31 हैं, और महत्वपूर्ण मुस्लिम आबादी वाले अन्य 29 वार्ड हैं, कुल मिलाकर लगभग 50-60 वार्डों में मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। प्रमुख क्षेत्रों में नागपाड़ा, बायक्ला, मझगांव, माहिम, गोवंडी, चीता कैंप, कुरला, जोगेश्वरी, मिल्लत नगर आदि शामिल हैं। 2026 चुनावों में 330 मुस्लिम उम्मीदवार (कुल उम्मीदवारों का 19%) मैदान में हैं, जिनमें से लगभग 80% मुस्लिम-प्रभावित वार्डों से हैं। 
महाराष्ट्र से और खबरें
भाषाई और जातीय जनसांख्यिकी में महाराष्ट्रियन (मराठी भाषी) 30-35% (कुछ अनुमानों में 32-42%) हैं, गुजराती 14-20%, हिंदी (उत्तर भारतीय) 20%, दक्षिण भारतीय भाषाओं वाले 10% और अन्य हैं। मराठी मतदाता 130 वार्डों में 35% से अधिक हैं (कुछ में 70% तक), जबकि गैर-मराठी (हिंदी/गुजराती) लगभग 60 वार्डों में प्रभावी हैं। 'मामू फैक्टर' (मराठी-मुस्लिम वोट) के संदर्भ में, यह ठाकरे गठबंधन के लिए 90+ वार्डों में फायदेमंद हो सकता है, खासकर जहां मराठी बहुमत और मुस्लिम समर्थन मिलता है। मुंबई की जनसांख्यिकी बहुसांस्कृतिक है।