मुंबई की झोपड़पट्टी। ऐसी जगहों पर एक-एक कमरे में 5-7 लोग रहते हैं।
लॉकडाउन की घोषणा तो हो गई लेकिन देश की एक बड़ी जनसंख्या जो रोज़ कमाने -रोज़ खाने जैसे हालात में जीवन बसर करने के लिए मजबूर है, उसका क्या होगा? काम-धंधे बंद हैं, कमाई का कोई ज़रिया नहीं, ऐसे में ये लोग अपना पेट कैसे भरेंगे?
मुंबई महानगर में क़रीब 60 प्रतिशत आबादी झोपड़पट्टी में रहती है और इसका एक कड़वा सच यह है कि परिवार के सारे सदस्य चाहकर भी अपने घर में बैठ नहीं सकते हैं क्योंकि 200 या 250 वर्ग फुट के घर में 5 या 7 लोग रहते हैं। ऐसे में सोने की बात छोड़िए, बैठने की भी जगह अपर्याप्त होती है।