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उद्धव खेमे के एक और विधायक को एसीबी का नोटिस क्यों?

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट में तनातनी अब इस स्तर पर पहुँच गई है कि जो विधायक या सांसद उद्धव ठाकरे के साथ अभी भी हैं उन पर जाँच एजेंसियों की तरफ़ से दबाव बनाया जा रहा है। इस बात का खुलासा ठाकरे गुट के विधायक राजन सालवी ने किया है। ताज़ा घटनाक्रम में महाराष्ट्र की भ्रष्टाचार निरोधक संस्था एसीबी ने ठाकरे गुट के विधायक राजन सालवी और उनके परिवार के सदस्यों को नोटिस भेजा है। इस ख़बर की जानकारी राजन सालवी ने खुद दी है जिसमें उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो ने उन्हें 20 मार्च को ब्यूरो के अधिकारियों के सामने हाजिर होने के लिए कहा है।

महाराष्ट्र में जब से एकनाथ शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे से बगावत करके बीजेपी के साथ सरकार बनाई है तभी से उद्धव और शिंदे आमने सामने हैं। उद्धव गुट के नेता लगातार एकनाथ शिंदे और महाराष्ट्र सरकार पर एजेंसियों के बेजा इस्तेमाल का आरोप लगाते रहे हैं। इसी कड़ी में अब उद्धव ठाकरे गुट के विधायक राजन सालवी और उनके परिवार के सदस्यों को महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में नोटिस भेजा है। यह पहली बार नहीं है कि राजन सालवी को एंटी करप्शन ब्यूरो ने नोटिस भेजा है। इससे पहले भी तीन बार एसीबी राजन सालवी से पूछताछ कर चुकी है।

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एंटी करप्शन ब्यूरो का नोटिस मिलने के बाद राजन सालवी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पिछले काफ़ी समय से उन्हें और उनके परिवार को एजेंसियों से डराने की कोशिश की जा रही है और उन पर उद्धव ठाकरे गुट को छोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन मैं किसी भी एजेंसी से डरने वाला नहीं हूं। राजन सालवी ने कहा कि इससे पहले भी मैं तीन बार एंटी करप्शन ब्यूरो के सभी सवालों का जवाब दे चुका हूं लेकिन बावजूद इसके एक बार फिर मुझे और मेरे परिवार को एसीबी का नोटिस मिला है और मुझे 20 मार्च को अलीबाग के एंटी करप्शन ब्यूरो के दफ्तर में हाजिर होने के लिए कहा गया है।

राजन सालवी का कहना है कि उनके ही क्षेत्र के दूसरे विधायक वैभव नाईक पर भी महाराष्ट्र पुलिस और एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारी दबाव डाल रहे हैं। लेकिन वह किसी भी दवाब में झुकने वाले नहीं हैं। सालवी ने कहा कि वह बाला साहब ठाकरे के सच्चे शिवसैनिक हैं और कभी भी शिवसेना नहीं छोड़ेंगे। राजन सालवी का कहना है कि ठाकरे गुट के जितने विधायक हैं उन सभी पर कोई ना कोई फर्जी केस लगाया जा रहा है या फिर पुराने मामलों में उन्हें फँसाया जा रहा है यह एकदम लोकतंत्र के लिए घातक है।

बता दें कि लगातार कोई न कोई नेता ठाकरे गुट को छोड़कर शिंदे गुट में शामिल हो रहा है। कुछ दिन पहले ही उद्धव ठाकरे के सबसे खास माने जाने वाले सुभाष देसाई के बेटे ने भी शिंदे गुट का दामन थाम लिया था। इसके बाद बुधवार को महाराष्ट्र के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और ठाकरे के क़रीबी नेता दीपक सावंत ने भी एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए थे।
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बुधवार को महाराष्ट्र विधान भवन में पत्रकारों से बातचीत में आदित्य ठाकरे ने कहा था कि एकनाथ शिंदे गुट और बीजेपी इस समय वॉशिंग मशीन हो गई है। जिन नेताओं पर बीजेपी और शिंदे गुट के नेता आरोप लगाते थे अब वही नेता शिंदे और बीजेपी के खेमे में जा रहे हैं। इससे साफ़ जाहिर होता है कि विपक्ष के नेताओं को दबाने का काम इस समय महाराष्ट्र की लोकतांत्रिक सरकार कर रही है जो किसी भी तरीक़े से लोकतंत्र के लिए ठीक बात नहीं है।

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सोमदत्त शर्मा
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