महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ देर रात हुई एक बैठक ने राज्य के सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को हवा दे दी है। इस बैठक के बाद शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। 20 जुलाई से संसद सत्र शुरू होने जा रहा है। एनडीए फ्लोर पर अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटी हुई है।

मंगलवार देर रात हुई बैठकों का सिलसिला

  • जयंत पाटिल की मुलाकात: NCP (SP) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पहले दक्षिण मुंबई स्थित शरद पवार के आवास 'सिल्वर ओक' पर उनसे मुलाकात की। इसके बाद, देर शाम वह सीधे देवेंद्र फडणवीस से मिलने पहुंचे।
  • अजित पवार गुट के नेता भी पहुंचे: इसी दौरान, सत्ताधारी दल NCP (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने भी अलग से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की।
  • सस्पेंस बरकरार: इन बैठकों में किस विषय पर चर्चा हुई, इस पर बैठक में शामिल किसी भी नेता या कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। दोनों गुटों के जमीनी सूत्रों का भी कहना है कि वे इस बैठक के एजेंडे से अनजान हैं। लेकिन उच्च पदस्थ सूत्र दोनों एनसीटी के एकजुट होकर एनडीए को समर्थन देने पर विचार हो रहा है।
ताज़ा ख़बरें

शरद पवार गुट (NCP-SP) का अंदरूनी असमंजस

जुलाई 2023 में अजित पवार के अलग होने के बाद से शरद पवार की पार्टी इस समय सबसे बड़ी रणनीतिक दुविधा का सामना कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, NCP (SP) के 10 विधायकों में से कम से कम आधे (5 विधायक) भाजपा के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन में शामिल होने के पक्ष में हैं।
  • विधायकों की चिंता: विपक्षी खेमे में रहने वाले विधायकों का तर्क है कि विपक्ष में होने के कारण उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए विकास कोष (Development Funds) और प्रशासनिक मंजूरियां (Administrative Clearances) प्राप्त करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जयंत पाटिल ने हाल ही में पार्टी के विधायकों को इस भावना से अवगत कराया था कि विधायकों का एक बड़ा धड़ा NDA की तरफ झुकाव रख रहा है। हालांकि, शरद पवार ने इस पर पूरी तरह चुप्पी साधी हुई है।

सीटों और संख्या बल का समीकरण

महाराष्ट्र विधानसभा में शरद पवार गुट के पास भले ही सिर्फ 10 विधायक हों और लोकसभा में 8 सांसद हों, लेकिन केंद्र और राज्य के मौजूदा समीकरणों में यह संख्या काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। NDA आने वाले समय में परिसीमन (Delimitation) जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में पास कराने के लिए संख्या बल मजबूत करना चाहती है। ऐसे में माना जा रहा है कि NDA छोटे दलों के समर्थन के लिए अपने रास्ते खुले रख सकता है।

अजित पवार गुट में भी बेचैनी

इस राजनीतिक हलचल का असर सिर्फ शरद पवार खेमे तक सीमित नहीं है। शरद पवार गुट द्वारा कांग्रेस में विलय या फिर सीधे NDA के साथ समझौता करने जैसे विकल्पों पर खुलेआम विचार करने से सत्ताधारी NCP (अजित पवार गुट) के भीतर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। खास बात यह है कि शरद पवार गुट ने अजित पवार की पार्टी के साथ सुलह (Reconciliation) का प्रयास किए बिना सीधे बीजेपी नेतृत्व से संपर्क के संकेत दिए हैं।

कानूनी नोटिस ने बढ़ाई तल्खी

इन बैठकों से ठीक एक दिन पहले, NCP के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने एक कानूनी नोटिस जारी कर सुनेत्रा पवार (अजित पवार की पत्नी) के पार्टी अध्यक्ष चुने जाने को चुनौती दी थी और संगठनात्मक चुनावों में अनियमितताओं का आरोप लगाया था। हालांकि महाराष्ट्र NCP अध्यक्ष सुनील तटकरे ने इस नोटिस को "निराधार" बताते हुए खारिज कर दिया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस नोटिस ने अजित पवार गुट के भीतर की अंदरूनी कलह और राज्यसभा सांसद पार्थ पवार के बढ़ते प्रभाव को लेकर कुछ नेताओं की नाराजगी को उजागर कर दिया है।
महाराष्ट्र की राजनीति में जनवरी के बाद से ही दोनों गुटों के दोबारा एक होने या शरद पवार गुट के कांग्रेस में विलय होने की अफवाहें उड़ रही थीं। लेकिन कांग्रेस में विलय की खबरों पर राज्य कांग्रेस के विरोध और अब विधायकों के विकास कार्यों को लेकर आ रहे दबाव के बाद, झुकाव पूरी तरह से NDA की तरफ होता दिख रहा है। देवेंद्र फडणवीस के साथ हुई इस सीक्रेट मीटिंग ने इन दावों को और मजबूत कर दिया है।