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ड्रग्स केस: बीजेपी नेताओं के कनेक्शन की होगी जांच?

महाराष्ट्र में इन दिनों जो चल रहा है उसे देश या प्रदेश की जांच एजेंसियों के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता। सुशांत सिंह आत्महत्या प्रकरण की जांच में मुंबई पुलिस पर सवाल खड़े किये गए और मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। सुशांत सिंह ने आत्महत्या की या उसकी हत्या की गयी इसका सच सामने आने से पहले ही पूरा फोकस बॉलीवुड और ड्रग्स की दुनिया पर केंद्रित हो गया। लेकिन इस ड्रग्स कनेक्शन में राजनीति या राजनेताओं का क्या कनेक्शन है, इसे लेकर नया विवाद छिड़ गया है। 

प्रदेश के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि यदि बॉलीवुड के ड्रग्स मामले में बीजेपी के नेताओं के कनेक्शन की जांच एनसीबी यानी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने नहीं की तो अगले सप्ताह मामले को मुंबई पुलिस को सौंप दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि सुशांत सिंह मामले में सीबीआई की एंट्री होने के अगले ही दिन नशे का एंगल आया था और एनसीबी ने अनेक फ़िल्मी हस्तियों से उनकी ड्रग्स पार्टी को लेकर पूछताछ शुरू कर दी थी। दीपिका पादुकोण सहित दर्जन भर अभिनेत्रियों और अभिनेताओं के नाम उछले और उनसे पूछताछ भी हुई। 

इसी बीच, महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने गृह मंत्री अनिल देशमुख को एक शिकायत दी थी, जिसमें ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ नाम से फ़िल्म बनाने वाले निर्माता-निर्देशक संदीप सिंह और आदित्य अल्वा का नाम दिया था। आदित्य, विवेक ओबेरॉय जिन्होंने कि इस फ़िल्म में नरेंद्र मोदी का किरदार निभाया था, के साले हैं।

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दबाव में है एनसीबी?

उल्लेखनीय है कि बुधवार और गुरुवार को विवेक ओबेरॉय के मुंबई स्थित आवास पर कर्नाटक पुलिस ने छापेमारी की है। इस छापेमारी के बाद यह मामला एक बार फिर गरमा गया। शुक्रवार को सचिन सावंत ने एक बार फिर से महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख को ज्ञापन दिया और आरोप लगाया कि एनसीबी किसी दबाव की वजह से बीजेपी नेताओं के ड्रग्स कनेक्शन मामले की जांच नहीं कर रही है, लिहाजा मामला मुंबई पुलिस को सौंपा जाए। 

गृह मंत्री देशमुख ने कहा कि सचिन सावंत की यह दूसरी बार मिली शिकायत भी हमने एक बार फिर से एनसीबी को भेज दी है। 

संदीप सिंह की हो जांच

सचिन सावंत ने कहा कि कर्नाटक में बीजेपी की स्टार प्रचारक अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी चन्दन तस्करी के मामले में गत दिनों गिरफ्तार हुई हैं। इसी मामले में गुजरात में अभिनेता विवेक ओबेरॉय के साले आदित्य अल्वा पर भी मामला दर्ज हुआ है। सचिन सावंत ने कहा कि ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ फ़िल्म बनाने वाले संदीप सिंह का भी बीजेपी नेताओं के साथ ड्रग्स को लेकर कनेक्शन है और इसकी जांच होनी चाहिए। 

1200 किलो गांजा बरामद 

उन्होंने कहा कि दो दिन पहले कर्नाटक में बीजेपी कार्यकर्ता चंद्रकांत चौहान 1200 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार हुआ था। एनसीबी ने मुंबई में बॉलीवुड ड्रग्स रैकेट में 59 ग्राम गांजा जब्त कर बड़ी सफलता या रैकेट का भंडाफोड़ जैसी बात कही थी लेकिन 1200 किलो गांजे की बरामदगी के मामले में वह उत्साह देखने को नहीं मिल रहा। 

सावंत ने एनसीबी पर आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा ड्रग्स कनेक्शन के संबंध में दी गयी सूचनाओं पर वह खामोश है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक पुलिस मुंबई आकर जांच करती है लेकिन एनसीबी के मुखिया राकेश अस्थाना सहित तमाम बड़े अधिकारियों के गत दिनों मुंबई में रहने के बावजूद जांच नहीं हुई। 

एनसीबी ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया है कि अब वह बॉलीवुड में किसी अभिनेता या अभिनेत्री से पूछताछ नहीं करने वाली है। एनसीबी ने कहा है कि पहले वह इस मामले में अब तक मिले सबूतों की समीक्षा करेगी उसके बाद जांच की दिशा तय करेगी।

सावंत ने कहा कि एनसीबी का यह रुख कुछ और इशारा दे रहा है, लिहाजा जांच अब मुंबई पुलिस को सौंपी जानी चाहिए। 

ठाकरे सरकार निशाने पर 

उल्लेखनीय है कि सुशांत सिंह राजपूत प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपने के बाद कुछ मीडिया चैनल्स ने बॉलीवुड में ड्रग्स को लेकर ख़बरों का मायाजाल बुन दिया था। इस मामले में सुशांत की मित्र रिया चक्रवर्ती और उसके भाई सहित कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई। दीपिका पादुकोण से लेकर कई अभिनेत्रियों के बयान भी दर्ज हुए। दीपिका के वाट्सअप ग्रुप की चैट भी सामने आयी। कंगना रनौत की एंट्री भी हुई और इस पूरे प्रकरण में महाराष्ट्र की सरकार, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार को निशाना बनाया गया। 

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इन ख़बरों के बहाने राजनीतिक सवाल भी उठे जो यह दर्शा रहे थे कि ये प्रदेश सरकार की छवि को खराब करने के लिए उठाये जा रहे हैं। लेकिन सुशांत सिंह प्रकरण में फैलाये गए बहुत से झूठ का पर्दाफ़ाश हो गया है। 

न्यूज़ चैनल के कंटेंट्स और उनकी भाषाओं पर अंकुश के लिए अदालत में दायर याचिकाओं पर सुनवाई भी हो रही है। साथ ही पुलिस भी कई मामलों की जांच कर रही है। कुल मिलाकर यह कहानी सामने आती है कि मीडिया और राजनीतिक दलों की बयानबाजी के कारण सबसे ज्यादा छवि जांच एजेंसियों की खराब हो रही है।  

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संजय राय
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