शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों की बगावत पर संजय राउत ने कहा- "जो बैठक में आए हैं वो हमारे हैं, और जो नहीं आए वो गद्दार और बेईमान हैं।" इन सांसदों को पार्टी ने कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
शिवसेना यूबीटी के सीनियर नेता संजय राउत और अनिल देसाई दिल्ली में
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) संसदीय दल की दिल्ली बैठक में सिर्फ तीन सांसद गुरुवार को पहुंचे। पार्टी को फिर बहुत बड़ा झटका लगा है। पार्टी के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थामने की पूरी तैयारी कर ली है।
शिवसेना यूबीटी का अगला कदम क्या होगा
शिवसेना (यूबीटी) नेता अरविंद सावंत ने कहा कि पार्टी संसदीय दल की बैठक में अनुपस्थित रहने वाले छह सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर संसदीय दल की बैठक में अनुपस्थित रहे सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग करेगी। सूत्रों का कहना है कि 6 बागी सांसद 20 जून को एकनाथ शिंदे के साथ बैठक करेंगे। इसी बैठक में विलय की घोषणा हो सकती है। हालांकि लोकसभा स्पीकर के पास 6 बागी सांसदों का औपचारिक विलय प्रस्ताव पहुंच चुका है।
बैठक में शामिल होने वाले लोकसभा सांसदों में अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे का नाम शामिल है। इनके अलावा राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता संजय राउत भी बैठक में मौजूद रहे। बगावती सुर अपनाने वाले बाकी 6 सांसदों में से कोई भी इस बैठक में नहीं पहुंचा, जिससे पार्टी में बड़ी टूट की खबरों की लगभग पुष्टि हो गई है।
पर्दे के पीछे ऐसे चला पूरा घटनाक्रम
- 16 जून: बगावत करने वाले सभी 6 सांसदों ने बेहद गोपनीय तरीके से अलग-अलग जगहों से प्राइवेट जेट के जरिए दिल्ली के लिए उड़ान भरी। इसी दिन तड़के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी दिल्ली पहुंचे। दिल्ली पहुंचने के बाद सभी बागी सांसदों को नोएडा के एक होटल में ठहराया गया।
- 17 जून: इन 6 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और उन्हें एक हस्ताक्षरित (signed) प्रस्ताव सौंपा। इस पत्र में सांसदों ने एकनाथ शिंदे गुट के साथ अपने विलय को मान्यता देने की मांग की है।
- सांसदों का आरोप: बागी सांसदों ने अपने पत्र में दावा किया है कि उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है और पार्टी के वरिष्ठ नेता इसका कांग्रेस में विलय करने की योजना बना रहे हैं। ये सभी सांसद अब 20 जून को एकनाथ शिंदे से मुलाकात करेंगे।
जो नहीं आए, वो गद्दार और बेईमान हैंः संजय राउत
इस बड़ी टूट और सांसदों की अनुपस्थिति पर शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संसद भवन पहुंचने पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा: "जो बैठक में आए हैं वो हमारे हैं, और जो नहीं आए वो गद्दार और बेईमान हैं।"उन्होंने आगे कहा कि "जहाँ ठाकरे हैं, वहीं असली शिवसेना है।" राउत ने विपक्षियों को चुनौती देते हुए कहा कि वे केंद्रीय एजेंसियों के दबाव में लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ठाकरे गुट इसका डटकर मुकाबला करेगा। पार्टी सांसद अरविंद सावंत ने बैठक के लिए व्हिप भी जारी किया था और नेताओं ने संकेत दिए हैं कि अनुपस्थित रहने वाले सांसदों के खिलाफ अयोग्यता (disqualification) की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट पर तीखा हमला
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सुप्रीम कोर्ट पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में लोकतंत्र का मज़ाक उड़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ही सबसे अधिक जिम्मेदार है। राउत ने दावा किया कि अदालत के समय पर हस्तक्षेप से मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल और शिवसेना सांसदों के बीच विद्रोह को रोका जा सकता था।
केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव (शिंदे गुट) ने कहा कि सांसदों द्वारा दिया गया पत्र शिवसेना (UBT) का आंतरिक मामला है और इस पर अंतिम फैसला लोकसभा स्पीकर ही करेंगे। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को मानने वाले नेता सही जगह आ रहे हैं।
शिंदे गुट के एमएलसी चंद्रकांत रघुवंशी ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए इसे 'ऑपरेशन टाइगर' बताया। उन्होंने कहा कि 6 सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताया है, जिससे संगठन और मजबूत होगा।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले: उन्होंने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि साल 2019 में लिया गया राजनीतिक फैसला (महाविकास अघाड़ी बनाना) आज ठाकरे को भारी पड़ रहा है। इसी वजह से वे अपने विधायकों और सांसदों को एकजुट नहीं रख पा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस कदम से एनडीए (NDA) और महायुति गठबंधन को और मजबूती मिलेगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सभी की नजरें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के फैसले और आगामी 20 जून को होने वाली बैठक पर टिकी हुई हैं। ठाकरे गुट कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है, जबकि शिंदे गुट दिल्ली में अपनी इस बड़ी सियासी जीत का जश्न मना रहा है।