आरोपी लड़के को जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) से कुछ घंटों के भीतर जमानत मिल गई गई। उसे सजा के तौर पर सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने के लिए कहा गया था। इसके अलावा 15 दिनों के लिए ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने के लिए कहा गया था। इस खबर के सामने आने के बाद देश में गुस्से की लहर दौड़ गई। लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि ऐसे हादसे में अगर आरोपी रसूखदार होता है तो पूरा सिस्टम उसके साथ बचाने में जुट जाता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी ससून अस्पताल में लड़के की मेडिकल जांच में भी अनियमितताएं पाई गईं। महाराष्ट्र मेडिकल एजुकेशन ने मामले की आगे की जांच के लिए मुंबई स्थित ग्रांट्स मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. पल्लवी सपले की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति नियुक्त की है। मामले में पुलिस पहले ही अस्पताल के दो डॉक्टरों और एक वार्ड बॉय को हिरासत में ले चुकी है।