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नूपुर विवाद: बीजेपी के कारण देश को शर्मिंदा होना पड़ा- ठाकरे 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि पैगंबर मोहम्मद साहब पर की गई टिप्पणी को लेकर बीजेपी की वजह से देश को शर्मिंदा होना पड़ा है। पैगंबर मोहम्मद साहब पर की गई टिप्पणी को लेकर इस्लामिक मुल्कों ने भारत के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया था।

बुधवार को औरंगाबाद में शिवसेना की एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए शिवसेना प्रमुख ने कहा कि जिस तरह हमारे भगवानों का अपमान नहीं किया जाना चाहिए तो आप दूसरों के भगवान का अपमान क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वजह से भारत को मध्य-पूर्व के देशों के सामने घुटनों के बल झुकना पड़ा। 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की फोटो को कूड़े के डिब्बे में फेंक दिया गया। शिवसेना प्रमुख ने पूछा कि जिस घटना के लिए बीजेपी जिम्मेदार है उसके लिए देश को माफी क्यों मांगनी चाहिए।

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शिवसेना प्रमुख ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने कभी भी देश के मुसलमानों से नफरत नहीं की और उन्होंने हमें भी यही सिखाया। छत्रपति शिवाजी महाराज के भी यही विचार थे और वह कुरान का सम्मान करते थे।

राज ठाकरे ने की थी रैली 

बता दें कि कुछ दिन पहले उद्धव ठाकरे के चचेरे भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने भी औरंगाबाद में एक बड़ी रैली की थी। उसके बाद से ही यह माना जा रहा था कि शिवसेना भी इस इलाके में अपनी ताकत दिखाएगी।

ठाकरे ने हनुमान चालीसा के मुद्दे पर विवाद खड़ा करने वालों को चेतावनी दी कि अगर उनमें हिम्मत है तो वह कश्मीर में जाकर हनुमान चालीसा पढ़ें।

‘औरंगाबाद का नाम बदलेंगे’

ठाकरे ने औरंगाबाद का नाम संभाजी नगर रखे जाने के मुद्दे पर भी रैली में अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह औरंगाबाद का नाम संभाजी नगर रखे जाने के शिवसेना के वादे को पूरा करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस शहर के एयरपोर्ट का नाम छत्रपति संभाजी महाराज के नाम पर रखे जाने का प्रस्ताव विधानसभा में पास हो चुका है अब केंद्र सरकार को इसे मंजूरी देनी है। उन्होंने कहा कि औरंगाबाद का नाम संभाजी नगर रखे जाने से पहले यहां के लोगों को पीने का पानी, शानदार सड़कें और नौकरियां उपलब्ध करवानी हैं। 

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शिव सेना संस्थापक बाला साहेब ठाकरे ने सबसे पहले 1988 में औरंगाबाद का नाम संभाजी नगर रखने का प्रस्ताव रखा था। 1995 में जब औरंगाबाद नगर निगम में शिव सेना-बीजेपी सत्ता में थे, तब इस शहर का नाम बदलने का प्रस्ताव पास किया गया था। शिव सेना नेता मनोहर जोशी के मुख्यमंत्री रहते हुए सरकार की ओर से इसे लेकर नोटिफ़िकेशन भी जारी किया गया था। लेकिन कांग्रेस और एनसीपी इसका विरोध करती रही हैं। 
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