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महाराष्ट्र: कांग्रेस नेता वडेट्टीवार का आरोप, बीजेपी दे रही है 50-50 करोड़ का ऑफ़र

महाराष्ट्र में क्या अब विधायकों की ख़रीद-फ़रोख्त शुरू हो गयी है? कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार ने इस बार में जो कहा है उसे देखते हुए तो यही कहा जा रहा है। वडेट्टीवार ने कहा कि बीजेपी की तरफ़ से शिवसेना के एक-एक विधायक को 50-50 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया है। वहीं कांग्रेस के इगतपुरी के विधायक हिरामन खोसकर के घर भी बीजेपी के कुछ लोगों के पहुँचने की बात कही गयी है। हालाँकि इस आरोप को बीजेपी ने सिरे से ख़ारिज़ कर दिया है। बीजेपी नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा है कि कांग्रेस और एनसीपी ने हमारे ख़िलाफ़ ख़रीद-फ़रोख्त का आरोप लगाया है, वे 48 घंटे में यह आरोप सिद्ध करें नहीं तो माफ़ी माँगें।

विधायकों की इस ख़रीद-फ़रोख्त से बचने के लिए विजय वडेट्टीवार के आवास पर आज कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाई गयी है। इस बैठक के बाद क़रीब 15 से 20 विधायकों को जयपुर रवाना किया जाएगा। शेष कुछ विधायक बाद में जयपुर जाने वाले हैं तथा कुछ प्रमुख नेता यहीं मुंबई में डेरा डालेंगे तथा यहाँ की गतिविधियों पर नज़रें जमाये रखेंगे।

सरकार बनाने को लेकर बीजेपी में असमंजस की स्थिति बढ़ती जा रही है क्योंकि उनके गठबंधन की पार्टी शिवसेना बात करने के लिए तनिक भी तैयार ही नहीं हो रही है। फडणवीस ने संघ प्रमुख मोहन भागवत की मध्यस्थता का दाँव भी चला लेकिन वह भी फ़ेल हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिन्हें गुरुजी बोलते हैं उन संभाजी भिड़े को भी मातोश्री में संदेश देकर भिजवाया पर बात नहीं बनी। शिवसेना ने अपने 56 व 8 निर्दलीय विधायकों को बांद्रा की रंग शारदा होटल में सुरक्षित रखा है और अब कांग्रेस अपने विधायकों को जयपुर में भेज रही है जहाँ पार्टी की राजस्थान सरकार उनकी हिफाज़त करेगी। राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने विधायकों पर निगरानी बढ़ा दी है।

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जिस तरह से बीजेपी दिन निकालते जा रही है उससे यह शंकाएँ प्रबल हो गयी हैं कि कहीं कर्नाटक पैटर्न जैसा कुछ तो रचा नहीं जा रहा? एक सवाल यहाँ के राजनीतिक गलियारों में काफ़ी चर्चा में है कि गोवा जैसे एक छोटे से राज्य में बीजेपी को सत्ता स्थापित करने के लिए इतनी बेचैनी थी तो महाराष्ट्र में क्यों नहीं? क्या नरेंद्र मोदी-अमित शाह महाराष्ट्र के मामले में हाथ नहीं डालना चाह रहे? यदि हाँ तो ऐसा क्यों? क्या बीजेपी को इस बात की आशंका है कि यदि वह सत्ता स्थापित करने के अपने पुराने फ़ॉर्मूलों या कर्नाटक पैटर्न का इस्तेमाल करती है तो महाराष्ट्र में मराठी-गुजराती वाद फिर से भड़क सकता है? इन सभी अटकलों के बीच अभी तक दोनों पार्टियों के बीच कोई प्रत्यक्ष चर्चा नहीं हुई है।

दोनों ही तरफ़ के नेता मीडिया के माध्यम से बयानबाज़ी कर रहे हैं। बीजेपी नेता बार-बार मीडिया में आकर ये बोलते हैं कि मुख्यमंत्री उनका होगा और शिवसेना मान जाए या गठबंधन का धर्म निभाए। जबकि उसके प्रति उत्तर में संजय राउत लगातार सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से बीजेपी पर आक्रमण कर रहे हैं। शुक्रवार को भी संजय राउत ने ट्विटर पर अटल बिहारी वाजपेयी की एक कविता ट्वीट की है-

'आग्नेय परीक्षा की 

इस घड़ी में-

आइए, अर्जुन की तरह 

उद्घोष करें : 

‘न दैन्यं न पलायनम्।’

उन्होंने फ़ेसबुक पर अज़ीज़ नाज़ां की कव्वाली 'चढ़ता सूरज धीरे-धीरे, ढलता है ढल जाएगा' पोस्ट करते हुए लिखा, 'किसी भी व्यक्ति में जब मुझे अहंकार नज़र आता है तो यह कव्वाली याद आती है। गुरुवार को उन्होंने कवि दुष्यंत कुमार की कविता की लाइन 'तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं, कमाल है कि, फ़िर भी तुम्हें यक़ीन नहीं' ट्वीट किया थी। यही नहीं, आज उन्होंने यह साफ़ कहा है कि शिवसेना और बीजेपी के बीच मध्यस्थता करने के लिए किसी की ज़रूरत नहीं है।  चर्चा करना है तो मुख्यमंत्री पद का प्रस्ताव लेकर आओ। राउत का इशारा भिड़े और मोहन भागवत द्वारा मध्यस्थता करने की ख़बरों की तरफ़ था। गुरुवार को भिड़े मातोश्री गये थे और वहाँ क़रीब 20 मिनट तक उद्धव ठाकरे का इंतज़ार भी किया, लेकिन उद्धव ठाकरे कहीं बाहर थे लिहाज़ा उनकी भेंट नहीं हो सकी। 

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संजय राउत ने कहा कि बीजेपी अब कार्यकारी सरकार के नाम पर नया कुछ खेल रचने की सोच रही है, वह समय इसलिए बीता रही है कि दूसरी पार्टियों के विधायकों की ख़रीद-फरोख्त कर सके। उन्होंने कहा कि चुनाव पूर्व विधायकों को तोड़ना और चुनाव बाद सरकार बनाने के लिए नव निर्वाचित विधायकों को तोड़ना यह बीजेपी की राजनीति बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन्हें प्रदेश की जनता और यहाँ के किसानों से ज़्यादा अपनी सरकार बनाने की पड़ी रहती है। इन सभी आरोप-प्रत्यारोप के बीच आज मुंबई का राजनीतिक वातावरण गरमाया हुआ है लेकिन शहर के विभिन्न हिस्सों में सुबह से ही साइक्लोन के असर की वजह से बारिश का दौर शुरू है। 

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आज कार्तिक माह की एकादशी है और महाराष्ट्र में पंढरपुर में विट्ठल रुक्मणी के मंदिर में विशेष रूप से पूजा का आयोजन होता है जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री उपस्थित रहते हैं। परंपरा के अनुसार तो आज की पूजा में देवेंद्र फडणवीस को शामिल होना चाहिए था लेकिन उन्होंने अपने प्रतिनिधि के रूप में चंद्रकांत पाटिल को वहाँ भेज दिया है। मुख्यमंत्री पद को लेकर कायम इस संकट में एक बार चंद्रकांत पाटिल का नाम भी मुख्यमंत्री पद के लिए उछला था लेकिन बात कुछ आगे नहीं बढ़ी। आज का दिन प्रदेश की राजनीति के लिए अहम है। यह देखना है कि नयी सरकार आती है या पुरानी को इस्तीफ़ा देकर जाना होगा।

संजय राय
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