मुंबई के मेयर का मसला अभी नहीं सुलझा है। शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दरकिनार कर दिल्ली आकर बीजेपी नेताओं से मुलाकात की है। शिवसेना के पार्षदों ने होटल छोड़ दिया है लेकिन उनसे कुछ दस्तावेज लिए गए हैं।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने दिल्ली में भाजपा नेताओं से मुलाकात की और बातचीत जारी है। वो मंगलवार शाम को दिल्ली पहुंचे थे। बैठक में बीएमसी चुनाव नतीजों पर चर्चा हुई, जिसमें मुंबई में मेयर पद और सत्ता बंटवारे के अलावा ठाणे तथा कल्याण-डोंबिवली जैसे अन्य महानगरपालिकाओं में गठबंधन के तहत सत्ता साझेदारी के मुद्दे भी शामिल थे। शिवसेना के वरिष्ठ नेता राहुल शेवाले भी इन चर्चाओं में शामिल हुए। सूत्रों का कहना है कि शिंदे ने बीजेपी नेतृत्व को सलाह दी है कि मेयर शिवसेना से ही होना चाहिए, ताकि विरोधियों को कुछ कहने या करने का मौका नहीं मिलना चाहिए। बीजेपी के शीर्ष नेता अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का इंतज़ार कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस मुद्दे पर फडणवीस को पूरी छूट दे रखी है। इस बीच कल्याण डोंबिवली में नाटकीय घटनाक्रम चल रहा है। पूरी खबर नीचे है।
शिवसेना के 29 नए निर्वाचित पार्षदों ने मंगलवार को बांद्रा के ताज लैंड्स एंड होटल से चेकआउट कर लिया। यह कदम महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी गजट अधिसूचना के बाद उठाया गया, जिसमें इन पार्षदों के चुनाव को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई।
पार्षदों से क्या कागज लिए गए
सूत्रों का कहना है कि शिवसेना के सभी 29 पार्षदों या नगर सेवकों से इस बात की अंडरटेकिंग (लिखित हलफनामा) ली गई है कि उन्हें पार्टी आलाकमान का जो भी फैसला होगा, मानना होगा। वो दूसरे दल में शामिल नहीं होंगे। कुछ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन पार्षदों से उनके जीतने वाले सर्टिफिकेट भी ले लिए गए हैं।
बीएमसी चुनाव नतीजा घोषित होने के बाद 17 जनवरी से ये पार्षद होटल में ठहरे हुए थे। गजट अधिसूचना जारी होने के साथ ही अब वे औपचारिक रूप से पार्षद के रूप में मान्यता प्राप्त हो गए हैं। इससे शिवसेना (शिंदे गुट) को अपनी पार्टी ग्रुप को रजिस्टर करने और ग्रुप लीडर नियुक्त करने का रास्ता साफ हो गया है। अधिसूचना के बाद पार्षदों को एक साथ रखने की जरूरत नहीं रही, इसलिए उन्हें अपने-अपने वार्डों में लौटने की अनुमति दी गई। कई पार्षद पहले से ही मतदाताओं के साथ विजय रैली करने की इच्छा जता रहे थे।
शिवसेना अब अपनी पार्टी के पार्षदों ते ग्रुप को रजिस्टर कराएगी, जिसके बाद पार्टी अनुशासन लागू होगा और ग्रुप लीडर की नियुक्ति होगी। यह घटनाक्रम बीएमसी में महायुति गठबंधन की सरकार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बीएमसी में कुल 227 पार्षद हैं, जिसमें बहुमत के लिए 114 सीटें जरूरी हैं। भाजपा अकेले सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसे 89 सीटें मिली हैं, लेकिन बहुमत से कम हैं। शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिलने से महायुति गठबंधन (भाजपा + शिंदे सेना) के पास कुल 118 सीटें हो गई हैं, जो स्पष्ट बहुमत है। मेयर पद सहित सत्ता बंटवारे का अंतिम रूप दिल्ली में चल रही बातचीत के बाद स्पष्ट होने की उम्मीद है।
उद्धव सेना और राज ठाकरे की एमएनएस के बीच नाटकीय घटनाक्रम
कल्याण डोम्बिवली नगर निगम में नाटकीय घटनाक्रम चल रहा है। खबर है कि राज ठाकरे की एमएनएस कल्याण डोंबिवली नगर निगम में एकनाथ शिंदे की शिवसेना का समर्थन करेगी। खबरों के मुताबिक, इस संबंध में शिंदे समूह और एमएनएस नेताओं के बीच बातचीत चल रही है। इसलिए, आने वाले कुछ घंटों में कल्याण डोंबिवली में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम होने की संभावना है। विशेष रूप से, यदि एमएनएस शिंदे समूह का समर्थन करती है, तो कल्याण डोंबिवली में ठाकरे बंधुओं की पार्टियों के बीच विवाद की संभावना है।उद्धव के पार्षद लापता क्यों
कल्याण डोम्बिवली नगर निगम में सरकार बनाने के लिए 62 सीटों का बहुमत हासिल करना जरूरी है। फिलहाल शिंदे की शिवसेना के पास 53 पार्षद हैं, जबकि भाजपा के पास 50 पार्षद हैं। इस चुनाव में ठाकरे समूह के 11 पार्षद और एमएनएस के पांच पार्षद चुने गए। हालांकि, परिणाम घोषित होने के बाद ठाकरे समूह के दो पार्षद, मधुर म्हात्रे और कीर्ति धोणे, लापता हो गए। ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि ये दोनों पार्षद शिंदे समूह के साथ मिले हुए थे।इसी तरह, जब ठाकरे समूह अपने समूह का पंजीकरण कराने के लिए कोंकण संभागीय आयुक्त के पास गया, तो दो और पार्षद अनुपस्थित थे। ऐसी चर्चा थी कि ये पार्षद एमएनएस में शामिल हो गए थे। इसके कारण ठाकरे समूह के पार्षदों की संख्या 11 से घटकर सात हो गई थी। ठाकरे समूह के जिन दो पार्षदों ने एमएनएस ज्वाइन किया है, वे पहले एमएनएस के कार्यकर्ता थे। इसलिए, इन दोनों पार्षदों ने यह दावा किया है कि उन्होंने एमएनएस ज्वाइन किया है। अब ये दोनों और एमएनएस के 5 निर्वाचित पार्षद एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सरकार बनाने में समर्थन दे सकते हैं। हालांकि शिंदे समूह के नेता इस संबंध में एमएनएस के साथ बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।