मेघालय हाईकोर्ट ने अवैध कोयला खदान विस्फोट में 18 श्रमिकों की मौत के बाद स्वतः संज्ञान लेते हुए पूर्वी जयंतिया हिल्स के डीसी और एसपी को तलब किया। अदालत ने अवैध खनन संबंधी चिंताओं के मद्देनजर खदान मालिकों की गिरफ्तारी का आदेश दिया।
मेघालय की अवैध कोयला खदान में 18 मौतें
मेघालय के ईस्ट जैंतिया हिल्स जिले में एक अवैध कोयला खदान में हुए भीषण विस्फोट में कम से कम 18 मजदूरों की मौत हो गई। यह हादसा गुरुवार सुबह थांगस्को (मिन्सिंगत) क्षेत्र में हुआ, जो जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर एक दुर्गम इलाका है। हाईकोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लिया है। मेघालय के तमाम संगठन इन मौतों के लिए केंद्र सरकार और उसकी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।
अधिकारी तलब, खदान मालिक की गिरफ्तारी का आदेश
मेघालय हाईकोर्ट ने इस घटना का खुद संज्ञान लेते हुए गंभीर नोटिस लिया है। जस्टिस हमरसन सिंह थंगख्यू और जस्टिस वानलुरा डिएंगदोह की डिवीजन बेंच ने ईस्ट जैंतिया हिल्स के डिप्टी कमिश्नर शिवांश अवस्थी और पुलिस अधीक्षक विकास कुमार को 9 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का समन जारी किया है। कोर्ट ने खदान के मालिक और संचालक की तत्काल गिरफ्तारी का आदेश दिया है तथा सभी आपत्तिजनक सामग्री जब्त करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने सवाल उठाया कि 14 जनवरी को इसी क्षेत्र में एक व्यक्ति की मौत के बावजूद अवैध कोयला खनन कैसे जारी है। कोर्ट ने कहा, "यह समझ से परे है कि रिपोर्टेड मौत के बावजूद इस क्षेत्र में अवैध कोयला खनन कैसे जारी है।"
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है।
पुलिस के अनुसार, यह एक 'रैट-होल' माइन थी, जहां डायनामाइट से विस्फोट हुआ। बचाव कार्य जारी रहा और 18 शव बरामद किए गए। इलाके में कई मजदूर फंसे होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद में मौतों की संख्या 18 बताई गई।
यह घटना मेघालय में अवैध कोयला खनन की लगातार समस्या को उजागर करती है। 2014 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सुरक्षा कारणों से रैट-होल माइनिंग पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन राज्य में यह गुप्त रूप से जारी है। विपक्षी दलों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। वॉइस ऑफ द पीपल पार्टी के सांसद रिकी एंड्रयू जे सिंगकों ने कहा कि एनजीटी के प्रतिबंध के बावजूद कई इलाकों में अवैध खनन जारी है और दूरदराज के हादसे अक्सर रिपोर्ट नहीं होते। मेघालय प्रदेश महिला कांग्रेस ने इसे "आपराधिक लापरवाही" करार दिया।
प्रशासन ने खदान मालिकों की तलाश तेज कर दी है और जांच में फोरेंसिक टीम शामिल है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि आदेशों की अनुपालन न होने पर आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।
केंद्र सरकार है इन मौतों की जिम्मेदारः एनजीओ
इसी बीच, 'वॉइस ऑफ द पीपल' पार्टी ने मेघालय में राष्ट्रीय जन पार्टी की सरकार और केंद्र सरकार को श्रमिकों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया और संबंधित कैबिनेट मंत्री के इस्तीफे की मांग की। पार्टी के शिलांग से सांसद रिकी एंड्रयू जे. सिंगकॉन ने कहा, "नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा प्रतिबंध के बावजूद मेघालय के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन जारी है और दूरदराज के इलाकों में हुई कई घातक घटनाएं दर्ज नहीं की जातीं।" उन्होंने आगे कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जो ऐसी गतिविधियों की निगरानी के लिए जिम्मेदार है, को भी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।