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अकेलेपन ने ली सुशांत सिंह राजपूत की जान?

सुशांत सिंह राजपूत ज़िंदगी की लड़ाई क्यों हार गए? ऐसा क्या हुआ होगा जिसके चलते सुशांत पिछले छह महीनों से डिप्रेशन के शिकार थे और उनका इलाज चल रहा था? बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ। 
अमिताभ

कैसी विडम्बना है कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने अपनी बेहद कामयाब फिल्म ‘छिछोरे’ के ज़रिये ख़ुदकुशी के ख़िलाफ़ सन्देश दिया था, लेकिन असली ज़िन्दगी में उन्होंने आत्महत्या कर ली। 

मरने से पहले होने वाली मौत!

फिल्म का एक गाना है- ‘चिंता करके क्या पायेगा, मरने से पहले मर जायेगा।’ पटकथा में अपने किरदार के लिए लिखे गए संवाद बोल कर लाखों लोगों को जीवन की सकारात्मकता का सन्देश देने वाला अभिनेता खुद उस सन्देश में आखिर यकीन क्यों खो बैठा कि ज़िन्दगी कामयाबी और नाकामी से बड़ी होती है और आत्महत्या किसी बात का कोई हल नहीं है।
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एक ऐसा अभिनेता जो उभरता हुआ सितारा था, जिसके काम की सब तरफ तारीफ हो रही थी, जिसका करियर ग्राफ़ अच्छा जा रहा था, वह अपनी अलग जगह बना रहा था, उसने ऐसा क्यों किया होगा?

चमकता सितारा

सुशांत सिंह राजपूत हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में नयी पीढ़ी के अभिनेताओं के बीच एक कामयाब सितारे और एक बहुत अच्छे अभिनेता के तौर पर बहुत तेज़ी से उभरे थे। उनमें अभिनय की एक लम्बी पारी खेलने की  बहुत अच्छी संभावनाएं थीं।

धोनी का वह हेलीकॉप्टर शॉट!

ठीक भारतीय क्रिकेटर एम. एस. धोनी की तरह, जिनके किरदार को उन्होंने परदे पर कुछ इस चमत्कारी ढंग से आत्मसात करके प्रस्तुत किया था कि लोग बस देखते रह गए। ऐसा लगा जैसे कोई अभिनेता नहीं, खुद धोनी खड़े हुए हैं कैमरे के सामने, यहाँ तक कि धोनी का ट्रेडमार्क हेलीकॉप्टर शॉट भी सुशांत ने बहुत स्वाभाविक ढंग से कॉपी करके क्रिकेट के पंडितों को भी चौंका दिया था।

अवसाद

ऐसा क्या हुआ होगा जिसके चलते सुशांत पिछले छह महीनों से डिप्रेशन के शिकार थे और उनका इलाज चल रहा था?   

1986 में जन्मे सुशांत सिंह राजपूत पटना के रहने वाले थे। शुरुआती पढ़ाई वहीँ हुई। उनकी एक बहन राज्य स्तर की क्रिकेट खिलाडी थीं। माँ की मौत के बाद उनका पूरा परिवार दिल्ली आ गया था। एक्टर बनने से पहले उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए दिल्ली कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था।

इंजीनियरिंग छोड़ी

लेकिन श्यामक डावर के डांस स्कूल में डांस सीखने के दौरान उन्हें अपने कुछ दोस्तों के मार्फ़त बैरी जॉन के एक्टिंग स्कूल का भी पता चला और वहाँ जाकर उन्हें अपने भीतर अभिनय से जुड़ाव और लगाव का एहसास हुआ। 
नतीजा यह हुआ कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई छूट गयी और सुशांत दिल्ली से मुंबई आ गए। मुंबई में वो नादिरा बब्बर के थिएटर ग्रुप ‘एकजुट’ से जुड़ गए, जहाँ मंच पर अभिनय करते हुए उन्हें धारावाहिकों में काम करने का मौका मिला। ज़ी टीवी के सीरियल पवित्र रिश्ता में मानव के किरदार ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया।

छोटे से बड़ा पर्दा!

सुशांत ने 2013 में ‘काई पो चे’ फिल्म से बड़े परदे पर शुरुआत की। वाणी कपूर और परिणीति चोपड़ा के साथ हल्की फुल्की फिल्म ‘शुद्ध देसी रोमांस’ में उनके काम को सराहना मिली। वह 2014  में आमिर खान की फिल्म ‘पी. के.’ का हिस्सा बने। अगले ही साल दिबाकर बनर्जी की फिल्म ‘डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी’ में उन्होंने मुख्य किरदार निभाया। 
सुशांत के करियर को ज़बरदस्त उछाल मिला क्रिकेटर एम. एस. धोनी के जीवन पर बनी फिल्म में धोनी के किरदार से। उसके बाद ‘राब्ता’, ‘केदारनाथ’ , ‘सोनचिरैया’ और ‘छिछोरे’ में सुशांत की अदाकारी के अलग अलग रंग देखने को मिले।   

'रील' और 'रियल' लाइफ़ में फ़र्क

जिस अभिनेता ने एम. एस. धोनी का किरदार शानदार ढंग से निभा कर सबको चौंका दिया था, जासूस व्योमकेश बक्शी से लेकर डकैत के किरदार में नज़र आया और हर किरदार में अपनी छाप छोड़ी, कमर्शियल कामयाबी और कलात्मक काम के बीच संतुलन बना रहा था वो इतना बेज़ार क्यों हो गया ज़िन्दगी से?
इंस्टाग्राम पर जिसके लगभग एक करोड़ फॉलोवर हों, उसकी निजी ज़िन्दगी में इतना अकेलापन!

माँ की याद

सुशांत अपनी माँ की मौत से बहुत दुखी थे और उन्हें बहुत याद करते थे। अपनी आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट में सुशांत ने अपनी माँ को याद किया था जिसमें आंसुओं की बूँदें, धुंधलाए हुए अतीत और सपनों की बातें थीं। एक बार फिर वही सबक कि ज़िन्दगी के उतार चढाव से लड़ने में में पैसा, कामयाबी, शोहरत, चमक दमक खूबसूरती वगैरह काम नहीं आते। सुशांत की मैनेजर रही दिशा ने भी चंद रोज़ पहले आत्महत्या कर ली थी।

34 साल की उम्र में इस तरह चले जाना एक नायक की विदाई जैसा तो नहीं ही है। लेकिन उन वजहों तक पहुँचने की ज़रूरत है, जिनका दबाव परदे के हीरो को इतना कमज़ोर कर गया की ज़िन्दगी का साथ छोड़ कर मौत को गले लगा लिया। इतना भारी पड़ गया।
कामयाब ज़िन्दगी की चमक के पीछे वो कौन सा अँधेरा था जिसने सुशांत को आत्महत्या की तरफ धकेल दिया? बहुत दुखद है। हमारे लिए सबक यह है कि अकेलापन मार डालता है। इससे खुद बचने और दूसरों को बचाने की ज़रूरत है।

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अमिताभ
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